यह है धनवान बनने का सही तरीका | भक्ति के धनवान बनिए

यह है धनवान बनने के का सही तरीका भक्ति के धनवान बनिए

नमस्कार दर्शकों! खबरों की खबर का सच कार्यक्रम में आप सभी का एक बार फिर से स्वागत है। आज के कार्यक्रम में हम देश दुनिया में लोगों द्वारा धनी बनने की कुछ ऐसी क्रियाओं पर नजर डालेंगे जिससे अंधविश्वास और अंधभक्ति को बढ़ावा मिलता है और साथ ही
जानेंगे अखंड धनवान बनने का रहस्य।

दोस्तों! जीवन एक बार मिलता है और यहां सभी धनी बनकर खुशहाल जीवन जीने की चाहत रखते हैं। जीवन में धन और धनी व्यक्तियों की बहुत महिमा होती है। पास में धन न हो तो इसे कमाने, पाने और चोरी तक करने की तरकीबें खोजी जाती हैं। वो कहते हैं न किस्मत से ज्यादा और कम किसी को नहीं मिलता। परंतु अधिक और अधिक धन पाने की लालसा बढती ही रहती है। बाजार में लाखों करोड़ों ऐसे लोग हैं जो लोगों को धनी बनाने के आइडिया देने और बेचने का व्यवसाय करते हैं और इनमें से कितने कारगर साबित होते हैं ये तो इनके आइडियाज़ को सीरियसली ट्राई करने वाले लोग ही जानते हैं।

  • खुद का बिजनेस करें …
  • इन्वेस्टमेंट करें …
  • क्रिप्टो करंसी खरीदें …
  • शेयर मार्किट में इन्वेस्ट करें …
  • प्रॉपर्टी ख़रीदे …
  • हर छोटे फायदे पर फोकस रखें …
  • पैसे की बचत करें आदि.आदि..

कई बार व्यक्ति तमाम कोशिशों के बावजूद भी धनवान नहीं बन पाता है। आम व्यक्ति जब अपने बलबूते पर सफलता नहीं पाता है तब वह तांत्रिकों,नकली गुरूओं,ओझाओं, पंडितों,वास्तुकारों और ज्योतिषियों के चक्कर काटता है।

धनवान बनने के लिए कछुआ ही सही

धनवान बनने के लिए लगभग हर इंसान अपने शुभ संस्कारों की वृद्धि करने की बजाय अंधश्रद्धा व पाखंडवाद का सहारा लेता है। घर परिवार में धन से जुड़ी सभी प्रकार की परेशानियों को दूर करने के लिए कुछ लोग तरह तरह के ताबीज़, धागे और अंगूठियां पहनते हैं। धनी बनाने के टोटकों वाली अंगूठी के डिज़ाइनों में”श्री मेरु” या “कछुआ रिंग” लोगों में काफी फेमस हैं।

ज्यादातर लोग कछुए के शेप की अंगूठी पहनना शुभ मानते है। वे मानते हैं की इसको पहनने से धन का मार्ग खुल जाता है। लोग इस अंगूठी को शुक्रवार के दिन या नवरात्रि के दौरान धारण करना शुभ मानते हैं। लोगों का ऐसा भी मानना है की कछुए की अंगूठी पति-पत्नी और प्रेमी-प्रेमिकाओं के बीच प्यार को बढ़ाती है। साथ ही जिंदगी में खुशहाली को भी स्थापित करती है। इसके अलावा ऐसा माना जाता है की इस अंगूठी को पहनने से नकारात्मक ऊर्जा भी दूर भागती है।

आइए ऐसे ही कुछ मनगढंत टोटकों के बारे में भी जान लेते हैं जिन्हें करने वाले लोग काफी भोले होते हैं और इनकी खोज करने वाले बहुत अनुभवी हैं।

अनुभवी व्यक्तियों के सुझावों अनुसार यदि घर में कोई मांगलिक कार्य होने वाला है और आप चाहते हैं कि वह निर्विघ्न संपन्न हो जाए तो इसके लिए एक उपाय है। जिस दिन मंगल कार्य हो उस दिन एक मुठ्ठी गेहूं लें और उसे लाल कपड़े में पोटली जैसा बांधकर उसे घर की पूर्व दिशा में किसी कोने में रख दें। आपका जो भी मंगल कार्य है वह ईश्‍वर की कृपा से आपके ईष्टदेव की कृपा से बिना किसी बाधा के पूरा हो जाएगा।

कपड़े पहनें सोच समझ कर: हमारे भाग्य का संबंध कपड़ों से भी होता है। अत: आप कौन से ग्रहों के वस्त्र पहनते हैं इससे भी आपका भाग्य निर्मित होता है। यदि आप राहु और केतु से संबंधित वस्त्र पहन रहे हैं तो जीवन में अचानक आने वाले संकटों का सामना करना होगा।

महिलाओं को चाहिए कि वे अपने वस्त्रों में पीले रंग का उपयोग करें और पुरुषों को चाहिए कि वे अपने वस्त्रों में चमकदार सफेद, गुलाबी और आसमानी रंग का इस्तेमाल करें। पेंट काली पहन सकते हैं। इसी तरह आप अपने घर के पर्दों और अन्य वस्तुओं के रंग पर भी ध्यान दें। काला, भूरा, कत्थई, मटमेला, सूर्ख लाल, जामूनी आदि रंगों का कम ही इस्तेमाल करें। इस टोटके के अनुसार मार्केट में इन रंगों के कपड़ें बनने और बिकने पर रोक लगनी चाहिए।

अनुभवियों के द्वारा सुझाए कुछ खास टोटके

यदि आप मालामाल होना चाहते हैं तो काली मिर्च के 5 दाने लें और उन्हें अपने सिर पर से 7 बार वार लें। इसके बाद किसी चौराहे या किसी सुनसान स्थान पर खड़े होकर चारों दिशाओं में 4 दाने फेंक दें। इसके बाद 5वें दाने को ऊपर आसमान की ओर फेंक दें। इसके बाद चौराहे से पुन: लौटते वक्त पीछे पलटकर न देंखें। माना जाता है कि इस उपाय से अचानक धन प्राप्ति के योग बनते हैं।

यह टोटका आप गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार को भी कर सकते हैं।
इसके लिए सबसे पहले 5 लौंग ले लें और इसे एक लाल कपड़े में लपेट लेना है। इसके बाद महालक्ष्मी और कुबेर जी को ध्यान में रखकर घर के मंदिर में बैठ कर लक्ष्‍मी जी की पूजा करें और धन प्राप्‍त करने की अराधना करें इसके बाद उसे अपनी तिजोरी में रख दे। ये उपाय करने के बाद माना जाता है कि 7 दिन के अंदर आपकी आर्थिक स्थिति ठीक हो जाएगी।

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वास्तविकता तो यह है कि इन सभी मनमानी शास्त्र विरुद्ध क्रियाओं का उल्लेख पवित्र श्रीमद्भगवद् गीता और पवित्र पांचों वेदों में न होने से यह साधना व्यर्थ होगी। श्रीमद भगवत गीता के अध्याय 16 श्लोक 23 और 24 के अनुसार ऐसी बेमानी क्रियाओं को करने से साधकों को कोई लाभ प्राप्त नहीं हो सकता। गीता के पवित्र श्लोक बताते हैं की जो साधक शास्त्र विधि को त्यागकर मनमाना आचरण करता है, उसे न कोई सुख न ही कोई सिद्धि और न मोक्ष प्राप्त होता है।

धन कमाने के लिए मेहनत से हटकर किए जाने वाले सभी उपाय अंधश्रद्धा भक्ति खतरा ए जान हैं

यदि रंग बिरंगे पत्थरों और जानवर शक्ल की अंगुठियों को पहनने से और अन्य ऊलजलूल टोटकों को करने से घर का माहोल खुशहाल होता, लोगों को करियर में बरकत मिलती, सभी बिगड़े हुए काम सुलझ जाते तो आज देश में इतनी दरिद्रता, बेरोजगारी और अशांति न होती। यह सब नकली ज्योतिषों, ब्राह्मणों और गुरुओं द्वारा फैलाया गया अंधश्रद्धा जाल है। जिसमें भोले श्रद्धालु फसते हैं।

आइए जानते है कि आखिरकार किस विधि या शास्त्र अनुकूल साधना के करने से आपके व आपके परिवार में धन वृद्धि व सुखशांति और स्वास्थ्य को स्थापित किया जा सकता है?

इच्छा रूपी खेलन आया,
तातैं सुख सागर नहीं पाया।।

इस काल ब्रह्म के लोक में शांति व सुख का नामोनिशान भी नहीं है। त्रिगुणी माया से उत्पन्न काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, राग-द्वेष, हर्ष-शोक, लाभ-हानि, मान-बड़ाई रूपी अवगुण हर जीव को परेशान किए हुए हैं। यहां एक जीव दूसरे जीव को मार कर खा जाता है, शोषण करता है, ईज्जत लूट लेता है, धन लूट लेता है, शांति छीन लेता है। यहां पर चारों तरफ आग लगी है। यदि आप शांति से रहना चाहोगे तो दूसरे आपको नहीं रहने देंगे। आपके न चाहते हुए भी चोर चोरी कर ले जाता है, डाकू डाका डाल ले जाता है, दुर्घटना घट जाती है, किसान की फसल खराब हो जाती है, व्यापारी का व्यापार ठप्प हो जाता है, राजा का राज छीन लिया जाता है, स्वस्थ शरीर में बीमारी लग जाती है अर्थात् यहां पर कोई भी वस्तु सुरक्षित नहीं। राजाओं के राज, ईज्जतदार की ईज्जत, धनवान का धन, ताकतवर की ताकत और यहां तक की हम सभी के शरीर भी अचानक छीन लिए जाते हैं।

माता-पिता के सामने जवान बेटा-बेटी मर जाते हैं, दूध पीते बच्चों को रोते-बिलखते छोड़ कर मात-पिता मर जाते हैं, जवान बहनें विधवा हो जाती हैं और पहाड़ से दुःखों को भोगने को मजबूर होते हैं। विचार करें कि क्या यह स्थान रहने के लायक है ? लेकिन हम मजबूरी वश यहां रह रहे हैं क्योंकि इस काल के पिंजरे से बाहर निकलने का कोई रास्ता नजर नहीं आता और हमें दूसरों को दुःखी करने की व दुःख सहने की आदत सी बन गई। यदि आप जी को इस लोक में होने वाले दुःखों से बचाव करना है तो यहां के प्रभु काल से परम शक्ति युक्त परमेश्वर (परम अक्षर ब्रह्म) की शरण लेनी पड़ेगी।

जिस परमेश्वर का खौफ काल प्रभु को भी है। जिस के डर से यह कष्ट उस जीव को नहीं दे सकता जो पूर्ण परमात्मा अर्थात् परम अक्षर ब्रह्म (सत्य पुरूष) की शरण पूर्ण सन्त के बताए मार्ग से ग्रहण करता है। वह जब तक संसार में भक्ति करता रहेगा, उसको कष्ट आजीवन नहीं होते। जो व्यक्ति पुस्तक ‘‘ज्ञान गंगा’’ को पढ़ेगा उसको ज्ञान हो जाएगा कि हम अपने निज घर को भूल गए हैं। वह परम शांति व सुख यहां न होकर निज घर सतलोक में है जहां पर न जन्म है, न मृत्यु है, न बुढ़ापा, न दुःख, न कोई लड़ाई-झगड़ा है, न कोई बिमारी है, न पैसे का कोई लेन-देन है, न मनोरंजन के साधन खरीदना है। वहां पर सब परमात्मा द्वारा निःशुल्क व अखण्ड है।

इस विडियो को देखने वाले सभी लोगों से प्रार्थना है कि यदि आप अपने जीवन में सफलता, धन वृद्धि, व पूर्ण मोक्ष चाहते हैं तो आज ही संत रामपाल जी महाराज जी से नाम दीक्षा लें और अपना कल्याण करवाएं।

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