Farmers Protest: जानिए क्या है कृषि बिल और किसान क्यों कर रहे हैं इसका विरोध?

Farmers Protest Hindi News: केंद्र सरकार के कृषि कानून (Farm Law 2020) के खिलाफ पंजाब और हरियाणा के हजारों किसान गुरुवार और शुक्रवार को दिल्ली में धरना प्रदर्शन कर रहे हैं और ‘दिल्‍ली चलो’ (Delhi Chalo) मार्च निकाल रहे हैं.

केंद्र सरकार के कृषि कानून (Farms Law 2020) के खिलाफ पंजाब और हरियाणा के हजारों किसान गुरुवार और शुक्रवार को दिल्ली में धरना प्रदर्शन (Farmer’s Protest) कर रहे हैं और ‘दिल्‍ली चलो’ (Delhi Chalo March) मार्च निकाल रहे हैं. इस मार्च को रोकने के लिए हरियाणा और पंजाब सरकार ने अपने बॉर्डर सील कर दिए हैं. इसके अलावा भारी पुलिस फोर्स भी तैनात किए गए हैं. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सरकार की तरफ से ये साफ कर दिया गया है कि जो कानून बनाया गया है, वो किसानों के हित में है.

कृषि बिल की संक्षिप्त जानकारी

केंद्र सरकार की ओर से कृषि सुधार बिल कहे जा रहे तीन में से दो विधेयक रविवार को राज्यसभा में ध्वनि मत से पारित हो गए. अब इस पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अंतिम मुहर लगनी बाकी है जिसके बाद यह क़ानून बन जाएगा.

दो बिल जो संसद से पास हो चुके हैं उनमें से एक कृषक उपज व्‍यापार और वाणिज्‍य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, 2020, और दूसरा कृषक (सशक्‍तिकरण व संरक्षण) क़ीमत आश्‍वासन और कृषि सेवा पर क़रार विधेयक, 2020 है. इन विधेयकों के ख़िलाफ़ हरियाणा-पंजाब के किसान कई बार प्रदर्शन कर चुके हैं और इसको लेकर किसानों की अलग-अलग आशंकाएं हैं.

किसानों का मानना है कि यह विधेयक धीरे-धीरे एपीएमसी (एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमिटी) यानी आम भाषा में कहें तो मंडियों को ख़त्म कर देगा और फिर निजी कंपनियों को बढ़ावा देगा जिससे किसानों को उनकी फ़सल का उचित मूल्य नहीं मिलेगा. आपको बता दें जिन बिलों को मोदी सरकार (Modi Government) किसानों के लिए वरदान बता रही है आखिर उसके खिलाफ किसान क्यों सड़कों पर उतरे हुए हैं. समझते हैं कि इस आंदोलन की जड़ क्या है?

Farmers Protest Hindi News: किसानो की मांग

1. किसानों को सबसे बड़ा डर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP- Minimum Support Price) खत्म होने का है. इस बिल के जरिए सरकार ने कृषि उपज मंडी समिति (APMC-Agricultural produce market committee) यानी मंडी से बाहर भी कृषि कारोबार का रास्ता खोल दिया है.

आपको बता दें कि मंडी से बाहर भी ट्रेड एरिया घोषित हो गया है. मंडी के अंदर लाइसेंसी ट्रेडर किसान से उसकी उपज एमएसपी पर लेते हैं, लेकिन बाहर कारोबार करने वालों के लिए एमएसपी को बेंचमार्क नहीं बनाया गया है. इसलिए मंडी से बाहर एमएसपी मिलने की कोई गारंटी नहीं है.

2. सरकार ने बिल में मंडियों को खत्म करने की बात कहीं पर भी नहीं लिखी है, लेकिन उसका इंपैक्ट मंडियों को तबाह कर सकता है. इसका अंदाजा लगाकर किसान डरा हुआ है. इसीलिए आढ़तियों को भी डर सता रहा है. इस मसले पर ही किसान और आढ़ती एक साथ हैं. उनका मानना है कि मंडियां बचेंगी तभी तो किसान उसमें एमएसपी पर अपनी उपज बेच पाएगा.

3. इस बिल से ‘वन कंट्री टू मार्केट’ वाली नौबत पैदा होती नजर रही है. क्योंकि मंडियों के अंदर टैक्स का भुगतान होगा और मंडियों के बाहर कोई टैक्स नहीं लगेगा. अभी मंडी से बाहर जिस एग्रीकल्चर ट्रेड की सरकार ने व्यवस्था की है उसमें कारोबारी को कोई टैक्स नहीं देना होगा. जबकि मंडी के अंदर औसतन 6-7 फीसदी तक का मंडी टैक्स (Mandi Tax) लगता है.

4. किसानों की ओर से यह तर्क दिया जा रहा है कि आढ़तिया या व्यापारी अपने 6-7 फीसदी टैक्स का नुकसान न करके मंडी से बाहर खरीद करेगा. जहां उसे कोई टैक्स नहीं देना है. इस फैसले से मंडी व्यवस्था हतोत्साहित होगी. मंडी समिति कमजोर होंगी तो किसान धीरे-धीर बिल्कुल बाजार के हवाले चला जाएगा. जहां उसकी उपज का सरकार द्वारा तय रेट से अधिक भी मिल सकता है और कम भी.

5. किसानों की इस चिंता के बीच राज्‍य सरकारों-खासकर पंजाब और हरियाणा- को इस बात का डर सता रहा है कि अगर निजी खरीदार सीधे किसानों से अनाज खरीदेंगे तो उन्‍हें मंडियों में मिलने वाले टैक्‍स का नुकसान होगा. दोनों राज्यों को मंडियों से मोटा टैक्स मिलता है, जिसे वे विकास कार्य में इस्तेमाल करते हैं. हालांकि, हरियाणा में बीजेपी का शासन है इसलिए यहां के सत्ताधारी नेता इस मामले पर मौन हैं.

6. एक बिल कांट्रैक्ट फार्मिंग से संबंधित है. इसमें किसानों के अदालत जाने का हक छीन लिया गया है. कंपनियों और किसानों के बीच विवाद होने की सूरत में एसडीएम फैसला करेगा. उसकी अपील डीएम के यहां होगी न कि कोर्ट में. किसानों को डीएम, एसडीएम पर विश्वास नहीं है क्योंकि उन्हें लगता है कि इन दोनों पदों पर बैठे लोग सरकार की कठपुतली की तरह होते हैं. वो कभी किसानों के हित की बात नहीं करते.

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7. केंद्र सरकार जो बात एक्ट में नहीं लिख रही है उसका ही वादा बाहर कर रही है. इसलिए किसानों में भ्रम फैल रहा है. सरकार अपने ऑफिशियल बयान में एमएसपी जारी रखने और मंडियां बंद न होने का वादा कर रही है, पार्टी फोरम पर भी यही कह रही है, लेकिन यही बात एक्ट में नहीं लिख रही. इसलिए शंका और भ्रम है. किसानों को लगता है कि सरकार का कोई भी बयान एग्रीकल्चर एक्ट में एमएसपी की गारंटी देने की बराबरी नहीं कर सकता. क्योंकि एक्ट की वादाखिलाफी पर सरकार को अदालत में खड़ा किया जा सकता है, जबकि पार्टी फोरम और बयानों का कोई कानूनी आधार नहीं है. हालांकि, सरकार सिरे से किसानों की इन आशंकाओं को खारिज कर रही है.

Farmers Protests Hindi News: कल हरियाणा में किसानों को आंसू गैस, पानी की बौछारों का करना पड़ा सामना

'कहीं लाठीचार्ज तो कहीं कंटीले तार', 5 नाटकीय तस्वीरों में देखें दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर किसानों को कैसे रोक रही पुलिस?

Farmers Protest March: पुलिस ने रास्ते में कंटीले तारों से बैरिकेडिंग की हैं, ताकि किसान दिल्ली में प्रवेश न कर सकें.

Farmers Protest Hindi News: दिल्ली कूच कर रहे आंदोलनरत किसानों को पुलिस ने रास्ते में रोकने के पुख्ता इंतजाम किए हैं. रास्ते में किसानों पर कहीं लाठीचार्ज और आंसूगैस के गोले दागे गए हैं तो कहीं कंटीले तारों से उनके रास्तों की बैरिकेडिंग की गई है. हरियाणा पुलिस (Haryana Police) ने तो सड़क पर गड्ढे खोद दिए हैं. कई जगहों पर बैरिकेड्स हटाने के दौरान पुलिस और किसानों में झड़पें भी हुई हैं. किसान किसी भी कामत पर दिल्ली पहुंच कर नए कृषि कानूनों के प्रावधानों का विरोध करना चाहते हैं.

किसान ट्रैक्टर और लॉरी पर सवार होकर महीनेभर का राशन और जरूरी सामान लेकर दिल्ली में कई जगहों से और पैदल चलकर प्रवेश करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं.p6hv8grsकल हरियाणा में किसानों को आंसू गैस, पानी की बौछारों का सामना करना पड़ा था. इसके बाद, दिल्ली पुलिस आज मजबूती से किसानों के खिलाफ रास्ता रोके खड़ी है.

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पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए रेत से भरे ट्रकों और कंटीले तारों में लिपटे बैरिकेड्स का भी इस्तेमाल किया है.

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कई जगहों पर किसानों ने भारी-भारी बैरिकेड्स हटा दिए हैं. 

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पुलिस ने सड़कों पर गड्ढे खोदने के अलावा भारी ट्रकों को बैरिकेड्स के रूप में खड़े कर रखे हैं. इनके अलावा कंटीले तारों से भी बैरिकेड्स किए गए हैं.

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