क्या आप भी हैं गैमिंग के शौकीन ?

क्या आप भी हैं गैमिंग के शौकीन

नमस्कार दर्शकों! खबरों की खबर का सच स्पेशल कार्यक्रम में आप सभी का एक बार फिर से स्वागत है। आज की हमारी पड़ताल का विषय है “गेमिंग। हम बच्चों और युवा पीढ़ी पर गेमिंग से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में चर्चा करेंगे और साथ ही आपको देश की युवा पीढ़ी को टेक्नोलॉजी के सही प्रयोग का उपाय भी बताएंगे।

दोस्तों ! आजकल बच्चों और बड़ों सभी में घंटों मोबाइल या टीवी पर गेम खेलने की लत देखी जा रही है। इस आदत का असर खेलने वालों की सेहत पर भी पड़ता है। यदि आपके बच्चे भी बहुत देर देर तक मोबाइल या प्लेस्टेशन पर वीडियो गेम खेलते रहते हैं तो इससे उनके स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है।

टेक्नालॉजी का हो रहा है दुरूपयोग

टेक्नालॉजी के इस दौर में युवा पीढ़ी के लिए मोबाइल ऑक्सीजन जितना जरूरी हो गया है। ऐसे में दिन प्रतिदिन मनोरंजन की चाहत में ऑनलाइन गेमिंग, प्लेस्टेशन, एक्सबॉक्स, और कंप्यूटर गेमिंग आदि के बढ़ते ट्रेंड के चलते करोड़ों बच्चों का जीवन मिट्टी में मिल रहा है। एक अध्ययन से मिली जानकारी के मुताबिक भारत में रहने वाले बीस साल से कम उम्र के लगभग 41 प्रतिशत लोग ऑनलाइन गेम्स खेलने के आदी हो गए हैं। भारत जैसे विकासशील देश में ऑनलाइन गेम की लत एक पूरी पीढ़ी को बर्बाद कर रही है क्योंकि इंटरनेट पर मौजूद पॉपुलर गेम्स में से अधिकांश गेम्स हिंसक हैं।

अक्सर यह देखने में आता है कि अधिकांश बच्चे टीनएज आते आते ज्यादातर शराब, सिगरेट, हीरोइन, गांजा, शराब और बैड कंपनी के आदि हो जाते हैं। लेकिन आज कल महँगे मोबाईल फोन इस्तेमाल करने की लत और ऑनलाइन गेम खेलना भी एक नशा बन गया है जो एक बार लग जाए तो छोड़ना बड़ा ही कठिन है। ऑनलाइन गेम्स के जरिए युवाओं को मानसिक रूप से विकृत करने का काम किया जाता है। ऑनलाइन गेम्स में प्लेयर्स को ऐसे ऐसे टास्क दिए जाते हैं जिसको पूरा करने के लिए युवा किसी भी हद तक चले जाते हैं।

आपको बता दें की गेम के द्वारा ऑनलाइन पैसा कमाने का ट्रेंड भी फिलहाल जोरों पर चल रहा है। आजकल शहर से लेकर गांव तक सारे युवा इसी तरह से पैसा कमाने का काम कर रहे हैं या यूं कहें आत्मनिर्भर हो रहे हैं। यूट्यूब पर गैमिंग को लैकर लोगों और युवाओं में अलग ही क्रैज़ है। कई युवा गेम खेल खेलकर मालामाल होने के साथ साथ बहुत ही अधिक फैमस भी हो चुके हैं। जिन्हें देखकर अन्य बच्चे और युवा भी प्रेरित होते हैं। पर सब सक्सेसफुल नहीं हो पाते और गेम खेलना एक लत बनकर ही रह जाता है।

बच्चे किताबों और पढ़ाई से हो रहे हैं दूर

कोरोना काल में आनलाइन पढ़ाई शुरू होने के कारण आज सैकड़ों बच्चों के पास अपने पर्सनल स्मार्टफोन और लेपटॉप आ चुके है, पढ़ाई के नाम पर ज्यादातर बच्चे मोबाइल का दुरुपयोग कर ऑनलाइन गेमिंग में अपना समय बर्बाद करने लगे हैं।

एक ओर जहां देश में चारों तरफ अपराध, लूट, हत्या ,बलात्कार अपने चरम पर हैं। कानून का नाम केवल किताबों तक सीमित होकर रह गया है। वहीं दूसरी ओर देश के युवा बच्चे ऑनलाइन गेम्स से प्रेरित होकर ऐसे अपराध करने लगे है जो अपने आप में ही खौफनाक हैं। कुछ समय पहले तक ब्लू व्हेल जैसी कुछ अजीबोगरीब गेम्स को खेलने पर हजारों की संख्या में युवाओं ने अपनी जान तक गवा दी थी।

नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्‍थ एंड न्‍यूरो साइंस में 120 से ज्‍यादा मामले रिर्पोट किए जा चुके हैं। जिनमें PUBG गेम की लत के कारण मेंटल हेल्‍थ पर इसका बुरा प्रभाव देखा गया है।
कई युवा बच्चे पबजी, फ्रीफायर ,कैंडी क्रश आदि गेम्स के आदि होकर पढ़ाई छोड़ देते है और तो और सुसाइड तक कर लेते है। यहां तक की ऑनलाइन गेम की आड़ में बच्चे अपने माता पिता का कत्ल भी कर देते है। कई युवा ऑनलाइन गेम्स में in app purchases यानी की ‘टोकन’ या ‘पास’ खरीदने के लिए इन-ऐप खरीदारी कर हजारों रुपए खर्च कर देते है।

ज्यादा गेम खेलने से क्या होता है?

गेमिंग से नींद की कमी, सर्कैडियन रिद्म डिसऑर्डर, अवसाद, आक्रामकता आदि समस्याएं हो सकती हैं। यही नहीं अधिक गेमिंग की वजह से बच्चों में हिंसक प्रवृत्ति बढ़ रही है। लगातार घंटों तक गेम खेलने के बाद सैकड़ों की संख्या में युवा डिप्रेशन, एंजाइटी, स्ट्रेस आदि मानसिक बीमारियों के शिकार हो रहे है। कइयों की आंखों की शक्ति भी कमजोर पड़ जाती है जिसके चलते उन्हें कम उम्र में ही चश्में लगवाने पड़ते है।

गैमिंग से जुड़े सैकड़ों खौफनाक कैसों की खबरों से गूगल भरा पड़ा है। आपको राजस्थान के नागौर का एक किस्सा बताते हैं:

राजस्थान के नागौर में एक 16 वर्षीय लड़के ने अपने चचेरे भाई की हत्या कर दी ताकि वह ऑनलाइन गेम खेलकर कर्ज चुका सके। 16 वर्ष के किशोर ने ऑनलाइन गेम टोकन खरीदने के लिए लाखों रुपये उधार लिए थे और इस पैसे को चुकाने के लिए उसने अपने 12 वर्षीय चचेरे भाई का अपहरण कर अपने ही परिवार से फिरौती की मांग की।

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इस समय पूरे देश में ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जहां बच्चे ऑनलाइन गेम खेलने के लिए अपने ही घरों में चोरी और अपराध कर रहे हैं।

इससे पहले छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में 19 साल के एक लड़के ने ऑनलाइन गेमिंग की लत के चलते अपने अपहरण की झूठी कहानी गढ़ी थी। लड़के को पबजी खेलने की लत थी और उसने अपनी बाइक भी बेच दी थी। उसके परिवार ने उसे पैसे देने से इनकार कर दिया था, जो उसे खेल में अगले स्तर तक पहुंचने के लिए आवश्यक था, उसने अपने हाथों और पैरों को बांधकर अपनी एक तस्वीर ली और अपने माता-पिता को भेज दी। उसने लिखा कि उसका अपहरण कर लिया गया है और अगर वे चार लाख रुपये निर्धारित स्थान पर नहीं पहुंचाते हैं, तो उसे मार दिया जाएगा। जब पुलिस ने जांच शुरू की, तो पता चला कि यह फर्जी अपहरण का मामला था, जिसकी योजना लड़के ने खुद ही बनाई थी क्योंकि उसे और पैसे की जरूरत थी।

वहीं मुंबई में बीते दिनों 14 साल के एक बच्चे ने अपने घर पर आत्महत्या कर ली। जांच में पता चला कि बच्चा ऑनलाइन गेम फ्रीफायर खेलने का आदी था। ऐसे ही मध्यप्रदेश में 6वीं कक्षा के एक छात्र ने ऑनलाइन गेम में 40 हजार रुपए गंवाने के बाद फांसी लगाकर अपनी जान दे दी।

बच्चों ने बताई कई चौंकाने वाली बातें

पिछले साल भारत में किए गए एक सर्वे में 20 साल से कम उम्र के 65 फीसदी बच्चों ने कहा था कि वे ऑनलाइन गेम खेलने के लिए खाना और नींद तक छोड़ने को तैयार हैं। कई लोगों ने यह भी स्वीकार किया कि वे ऑनलाइन गेम खेलने के लिए अपने माता-पिता के पैसे चुराने के लिए भी तैयार हैं। ऑनलाइन गेमिंग के चलते बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर तो असर पड़ता ही है लेकिन साथ ही उनका विद्यार्थी जीवन, करियर व भविष्य तीनों लगभग बरबाद हो जाते हैं।
जरूरत से अधिक समय तक मोबाइल पर गेम खेलने से मानसिक और शारीरिक स्‍वास्‍थ्‍य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। गेम खेलने की लत के कारण बच्‍चे और युवाओं के स्‍वभाव व खाने पीने की आदतों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

क्या आप जानते हैं? WHO ने गेमिंग डिस्ऑर्डर को बीमारी की श्रेणी में रखा है।

सोशल नेटवर्किंग साइट जागरण में छपी खबर के अनुसार विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने गेमिंग डिसऑर्डर को कुछ इस तरह एकसप्लेन किया है- “ऑफलाइन या ऑनलाइन लगातार गेम खेलने की लत, जिस पर स्वयं नियंत्रण करना मुश्किल हो, जिससे व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो और उसके स्वास्थ्य पर नकारात्मक परिणाम दिखे, गेमिंग डिसऑर्डर कहलाएगा।

194 देशों की सहमति से ‘गेमिंग’ को बीमारी माना गया है।

WHO ने ये कदम सभी 194 सदस्त देशों की सहमति से उठाया है। इसका ड्राफ्ट विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2017 में ही बना लिया था। जिसके बाद जून 2018 में ‘गेमिंग डिसऑर्डर एडिक्शन’ (ज्यादा गेम खेलने की लत) को ‘तकनीकी संबंधी व्यवहारिक समस्याओं’ की कैटेगरी में रखा था। इस कैटेगरी में पहले ही इंटरनेट, कंप्यूटर और स्मार्टफोन के ज्यादा इस्तेमाल की आदत को रखा गया है।

आखिर युवाओं, बच्चों और सभी को किस प्रकार की शिक्षाएं दी जाएं कि वे गेमिंग और स्मार्टफोन के आदि न हों और साथ ही टेक्नोलॉजी का सही उपयोग भी करें?

दोस्तों! हमारे शास्त्रों में लिखा है की बच्चों को 3 साल की उम्र में पूर्ण सतगुरु से नाम उपदेश दिलाकर पूर्ण परमात्मा की सत्य भक्ति साधना करानी चाहिए। पूर्ण सतगुरु की शरण में जाने से बालक कम उम्र में ही नेक विचारों और अच्छे आचार व्यवहार से परिपूर्ण हो जाता है। परमेश्वर के सत्य भक्ति मंत्र का सिमरन करने से बालक के अंदर विकार और बुराइयां भी घर नहीं करती और वह नैतिक और संस्कारवान बन जाता है। पूर्ण सतगुरु के सत्संग प्रवचन सुनकर बालक के अंदर अच्छे गुण आते हैं जिसके कारण वह माता पिता की सेवा करना, बड़ों का आदर करना, और चोरी, जारी, ठगी, नशा, आदि बुराइयों से दूर रहना सीख जाता है। सत्संग में बताया जाता है की टीवी सीरियल, फिल्म, अश्लील गाने देखने, सुनने और गाने से तथा गेम खेलने आदि से युवा पीढ़ी में अश्लीलता और अस्थिरता फैलती है। इन साधनों से वास्तव में युवा मनोरंजन के नाम पर अपनी बर्बादी को आमंत्रित करते है।

बचपन से ही सतगुरु की शरण मिल जाने से बालक एक सुखी और नेक जीवन जीता है। वही माता पिता अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देते हैं जो परमात्मा से डर कर जीवन जीते हैं। अच्छे माता पिता ही नेक संतान और नेक समाज बनाने में अपनी भूमिका निभा सकते हैं।

दूसरी ओर सबसे ज़रूरी बात परमात्मा ने हमें यह टेक्नोलॉजी, उपकरण , शिक्षा और तमाम सभी सुख सुविधाएं इनका कुशलता से उपयोग कर परमात्मा को पहचानने के लिए और आध्यात्मिक ज्ञान समझने, सत्संग सुनने और विश्व तक परमात्मा का ज्ञान पहुंचाने के लिए दिया है। यदि परमात्मा हमें सब सुविधाएं दे सकता है तो हमारे द्वारा इनका सही उपयोग और प्रयोग न करने पर हमसे वापिस ले भी सकता है।

वर्तमान समय में पूरे विश्व में केवल जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी ही एक मात्र पूर्ण सतगुरु हैं जिनसे नामदीक्षा लेकर सभी माता पिता व उनकी संतानें स्वयं को सभी तरह के बुरे संस्कारों और लतों से बचा सकती हैं। विश्वभर के दर्शकों से निवेदन है कि संतरामपाल जी महाराज जी की शरण ग्रहण करें और एक नेक जीवन जीने की शुरुआत करें।

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