ओलंपिक्स खेल प्रतियोगिता 2020-2021 (Olympic Games Tokyo 2020)

ओलंपिक्स खेल प्रतियोगिता 2020-2021“खबरों की खबर का सच स्पेशल कार्यक्रम में आप सभी का एक बार फिर से स्वागत है। इस बार हम “ओलंपिक्स खेल प्रतियोगिता 2020” के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे और साथ ही हम ओलंपिकस फ्लैग और ओलंपिक्स फ्लेम के बारे में भी जानेंगे ।

दोस्तों, पिछले साल होने वाले टोक्यो ओलंपिक खेलों का आरंभ 23 जुलाई,2021 को हुआ जो 8 अगस्त , 2021 तक चलेगा। ओलंपिक खेल हर चार साल के अंतराल में होते हैं। इस साल जापान के टोक्यो में इसका आयोजन हो रहा है। जापान सरकार ने कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए टोक्यो में आपातकाल लगाने की घोषणा की जो पूरे ओलंपिक खेलों के दौरान जारी रहेगा। ये आपातकाल ओलंपिक के बाद भी 26 अगस्त तक जारी रहेगा। ओलंपिक में इस बार 33 खेलों में 339 मेडल के लिए मुक़ाबले होंगे। इस बार ओलंपिक में 5 नए खेल जोड़े गए हैं- सर्फ़िंग, स्केटबोर्डिंग, स्पोर्ट्स क्लाइंबिंग, कराटे और बेसबॉल। भारत की ओर से टोक्यो ओलंपिक में 127 एथलीट हिस्सा ले रहे हैं जिनमें 56 महिलाएं शामिल हैं। जापान के अलावा किसी दूसरे मुल्क के दर्शक टोक्यो जाकर इस खेल को नहीं देख सकेंगे। अब तक कुल 31 बार ओलंपिक खेलों का आयोजन किया जा चुका है। जापान पहले भी तीन बार ओलंपिक का आयोजन कर चुका है – 1964, 1972 और 1988 में।

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ओलंपिक्स खेल प्रतियोगिता 2020: टोक्यो में होने वाले ओलंपिक खेलों के शुभंकर को ‘मिराइटोवा’ और ‘सोमेती’ नाम दिया गया है। इसे ख़ास जापानी इंडिगो ब्लू रंग का पैटर्न दिया गया है। यह जापान की सांस्कृतिक परंपरा और आधुनिकता दोनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ‘मिराइतोवा’ जापानी कहावत से प्रेरित है।जापानी शब्द मिराइतोवा में ‘मिराइ’ का अर्थ ‘भविष्य’ और तोवा का ‘अनंत काल’ होता है।

आखिर क्या होती है ओलंपिक्स खेल प्रतियोगिता और इसकी शुरुआत कब और कैसे हुई थी? 

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खुल कूद में दिलचस्पी रखने वाले लोग जानते है की ‘ओलम्पिक खेल प्रतियोगिता एक ऐसी अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता है जिसमे हज़ारों एथेलीट कई विभिन्न प्रकार के खेलों में भाग लेते हैं। इन प्रतियोगिताओं में 200 से भी अधिक देश हिस्सा लेते हैं। यह प्रतियोगिता प्रत्येक चार वर्ष में आयोजित की जाती है। इस खेल का नियंत्रण अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति द्वारा किया जाता है, यह समिति हर चार साल में होने वाली प्रतियोगिता के लिए होस्ट कंट्री तय करती है। इस साल होस्ट कंट्री के रूप में जापान को चुना गया है। इस प्रतियोगिता के दौरान अलग अलग देशों की सरकार अपने देश के बेहतरीन खिलाड़ियों को अलग अलग खेलों में भाग लेने के लिए भेजती है और वह अपने खिलाडियों से यह उम्मीद करते हैं की वे अपने देश के नाम भी ओलम्पिक पदक हासिल कर लाएं।

भारत के लिए यह गर्व की बात है कि ओलंपिक्स खेलों के दूसरे दिन ही भारत की महिला वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने सिल्वर मेडल जीत कर अपनी मेहनत को रंग दिया। उन्होंने सिल्वर मेडल जीतकर ओलंपिक्स 2021 में देश का खाता भी खोला। मीराबाई को यह मेडल 49 किग्रा कैटेगरी में मिला है। भारत के बेहतरीन महिला एंव पुरूष खिलाड़ी पूरे जोश और जीत की उमंग लिए खेलों में जीत हासिल कर भारत का परचम विश्व में ऊंचा कर रहे हैं।

ओलंपिक्स खेल प्रतियोगिता 2020: क्या है ओलंपिक खेलों का इतिहास?

यदि हम ओलम्पिक खेलों के शुरुआत की बात करे़ तो इसका इतिहास बहुत ही पुराना है। प्राचीन ओलम्पिक की शुरुआत 776 बीसी में हुई मानी जाती है। जबकि प्राचीन ओलम्पिक खेलों का आयोजन लगभग 1200 साल पूर्व योद्धा और खिलाड़ियों के बीच हुआ करता था। पुराने समय में शांतिपूर्ण समय अंतराल के दौरान योद्धाओं के बीच प्रतिस्पर्धा के साथ खेलों का भी विकास होने लगा। शुरुआती दौर में दौड़, मुक्केबाजी, कुश्ती और रथों की दौड़ सैन्य प्रशिक्षण का हिस्सा हुआ करते थे। इनमें से सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले योद्धा प्रतिस्पर्धी को खेलों में अपना दमखम दिखाने का मौका मिलता था। 

महिला एथलीटों ने ओलंपिक खेलों में कब से भाग लिया?

ओलंपिक्स खेल प्रतियोगिता 2020: पेरिस ओलंपिक खेलों में पहली बार महिला एथलीटों को भी अपना दमखम दिखाने का मौक़ा मिला। चार साल बाद पेरिस में साल 1900 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में 20 महिलाओं सहित चार बार कई एथलीटों को आकर्षित किया, जिन्हें क्रॉसकेट, गोल्फ, नौकायन और टेनिस में आधिकारिक तौर पर पहली बार प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति दी गई थी।हेलसिंकी में चार महिलाओं के साथ 60 पुरुषों की टीम ओलंपिक के लिए गई थी। चार महिलाओं में से एक ट्रैक एंड फील्ड एथलीट नीलिमा घोष (Nilima Ghose) ने ओलंपिक में भाग लेने वाली पहली भारतीय महिला बनकर इतिहास रच दिया। कर्णम मल्लेश्वरी भारत की महिला भारोत्तोलक (वेटलिफ़्टर) हैं। वे ओलम्पिक खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली प्रथम महिला खिलाड़ी हैं।

खेलों का नाम ओलंपिक गेम्स कैसे पड़ा?

दोस्तों , प्राचीन काल में प्रथम बार यह ग्रीस यानी यूनान की राजधानी एथेंस में सन 1896 में आयोजित किया गया था। ओलंपिया पर्वत पर खेले जाने के कारण इसका नाम ओलम्पिक पड़ा। ओलम्पिक में राज्यों और शहरों के खिलाड़ी भाग लेते थे। इसकी लोकप्रियता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि ओलम्पिक खेलों के दौरान शहरों और राज्यों के बीच युद्ध तक स्थगित कर दिए जाते थे। इन खेलों में लड़ाई और घुड़सवारी काफी लोकप्रिय खेल थे। 

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ओलंपिक खेलों का चिन्ह क्या दर्शाता है?

यह आपस में जुड़े “5 छल्ले” है जो कि पांच प्रमुख महाद्वीपों (एशिया, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया या ओसिनिया, यूरोप और अफ्रीका) को दर्शाते हैं. इन छल्लों को “पियरे डी कुबर्तिन” ने डिज़ाइन किया था, जिन्हें आधुनिक ओलिंपिक गेम्स का सह-संस्थापक माना जाता है।

ओलंपिक्स खेल प्रतियोगिता 2020: शुरुआत में ओलंपिक गेम्स में मौजूद थी सुविधाओं की कमी

तमाम सुविधाओं की कमी, आयोजन की मेज़बानी की समस्या और खिलाड़ियों की कम भागीदारी जैसी सभी समस्याओं के बावजूद धीरे-धीरे ओलम्पिक अपने मक़सद में क़ामयाब होता गया और देखते ही देखते यह स्पर्धा पूरे विश्व में लोकप्रिय हो गई। वर्तमान समय में लगभग हर एक देश अपने सालाना बजट में लाखों करोड़ों रुपए स्पोर्ट्स और खेल कूद इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं के लिए पारित करता है। साल 2021- 22 के लिए भारत सरकार ने स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया को 660.41 करोड़ रुपए ग्रांट किए हैं, जबकि पिछले साल महज़ 500 करोड़ किए गए थे। 

इस बार कैसे बनाए गए हैं टोक्यो ओलंपिक के पदक?

ओलम्पिक खेलों में तीन प्रकार के पदक दिए जाते हैं 1.स्वर्ण पदक 2.रजक पदक 3.कांस्य पदक, जिसे हम आम भाषा में गोल्ड ,सिल्वर और ब्रॉन्ज़ मैेडल के नाम से जानते हैं। टोक्यो ओलंपिक में खिलाड़ियों को दिए जाने वाले पदक पुराने इलेक्ट्रॉनिक सामानों और फ़ोन से बनाए गए हैं। इसके लिए आयोजकों ने फरवरी 2017 में जापान के लोगों से इलेक्ट्रॉनिक सामानों और फोन दान करने कि अपील की थी। साल 2010 में वैंकूवर में आयोजित ओलंपिक में भी इसी तरह इलेक्ट्रॉनिक सामानों के इस्तेमाल से पदक बनाए गए थे। पदक के पीछे के हिस्से में टोक्यो ओलंपिक का लोगो लगा है, आगे स्टेडियम की तस्वीर के सामने विजय का प्रतीक माने जाने वाली ग्रीक देवी ‘नाइक’ को दर्शाया गया है।

ओलंपिक्स खेल प्रतियोगिता 2020: मैडल जितने वाले देशों में भारत है सबसे पीछे

ओलंपिक्स खेल प्रतियोगिता 2020: पूरे विश्व में सबसे अधिक ओलंपिक मेडल हासिल करने वाली सूची में अमरीका, यूके, जर्मनी, फ्रांस, इटली आदि देश शामिल हैं। जिनमें अमरीका 2,827 मेडल्स के साथ सबसे आगे है। उसके बाद यूके 883 मेडल्स तो जर्मनी 855 मेडल्स हासिल कर चुका है। यदि हम भारत की बात करें तो हाल ही में प्राप्त हुए मेडल को मिलाकर अब तक भारत को कुल 29 मेडल्स हासिल हो चुके हैं। जिसमें 9 गोल्ड, 8 सिल्वर और 12 ब्रॉन्ज़ मेडल हैं। प्राप्त किए गए मेडल्स में से 11 मेडल्स इंडियन हॉकी टीम को हासिल हुए हैं।  भारत से सुशील कुमार, विजेंदर सिंह, विजय कुमार, गगन नारंग ,मेरी कोम, साइना नेहवाल, मीराबाई चानू, पीवी सिंधु, साक्षी मलिक, और कई अन्य खिलाडियों के नाम मैडल जीतने वालों की लिस्ट में शामिल हैं।  खुशी की बात यह है कि अब भारत के खिलाड़ी अधिक से अधिक खेलों में जीत हासिल कर कोई न कोई मैडल अपने नाम दर्ज कराने लगे हैं। यह प्रतिस्पर्धा भारत में खेलों के प्रति सकारात्मक नज़रिए को बढ़ावा दे रही है।

आइए अब ओलंपिक्स फ्लेम और ओलंपिक्स फ्लैग के बारे में जानते है।

ओलंपिक्स का सबसे बड़ा आदर्श ओलम्पिक ध्वज माना जाता है।  सिल्क के बने ध्वज के मध्य में ओलंपिक का प्रतीक चिन्ह “पांच छल्ले” हैं। बेरोंन पियरे डी कोबर्टीन नामक एक शख्स के सुझाव पर 1913 में ओलम्पिक ध्वज का सृजन किया गया था। 1914 में पेरिस में इसके उद्घाटन के बाद सर्वप्रथम इसे सन् 1920 के ओलम्पिक में फहराया गया था, तब से लेकर अब तक हर ओलंपिक्स टूर्नामेंट में इसे फहराया जाता है। इस ध्वज को 5 महाद्वीपों के प्रतिनिधित्व करने के सांथ ही निष्पक्ष एवं मुक्त स्पर्धा का प्रतीक है माना जाता है। 

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ओलम्पिकस मशाल को सूर्य की किरणों से किया जाता है प्रज्वलित 

ओलंपिक्स खेल प्रतियोगिता 2020: इसके अलावा प्रतियोगिता में ओलम्पिकस मशाल को भी जलाया जाता है। इसे जलाने की शुरुआत साल 1928 से एम्स्टर्डम ओलम्पिक से हुई। 1936 में बर्लिन ओलम्पिक में मशाल के वर्तमान स्वरूप को अपनाया गया। इसी समय से मशाल को आयोजित स्थल तक लाने का प्रचलन शुरू हुआ। इस मशाल को खेल शुरू होने के कुछ दिन पूर्व यूनान के ओलम्पिया में हेरा मन्दिर के सामने सूर्य की किरणों से प्रज्वलित किया जाता है। मेज़बान देश का एक जाना माना एथलीट उद्घाटन समारोह के दिन इससे स्टेडियम में लगाए गए मशाल को प्रज्जवलित करता है और इसके साथ ही ओलंपिक खेलों की शुरुआत हो जाती है। इस बार पैनाथेनिक स्टेडियम में एक समारोह के दौरान मशाल को जापान को सौंप दिया गया और फिर इसे विभिन्न खिलाड़ियों द्वारा वहाँ से आयोजन स्थल तक लाया गया। इसी मशाल से खेल समारोह विशेष की मशाल प्रज्वलित की गई।

आध्यात्मिक दृष्टिकोण

दोस्तों, खेलों में अपना करियर बनाने के लिए खिलाड़ी बचपन से ही फोकसड हो जाते हैं और मैडल जीतने के लिए जी जान से लगे रहते हैं।  बिना यह समझे और जाने की मनुष्य जीवन का अहम उददेश्य खेल में पदक हासिल करने से कहीं ऊंचा और आवश्यक है। मृत्यु होने उपरांत न तो कोई पुरस्कार साथ ले जाया जा सकता है न कोई मेडल। 

Credit: SA News Channel

जो मनुष्य, मानव जीवन के उद्देश्य को न समझकर अन्य कामों में उलझ कर अपना जीवन नष्ट कर जाते हैं वह मृत्यु के बाद बहुत पछताते हैं क्योंकि फिर उन्हें कुत्ता, गधा, सुवर आदि के जन्म लेकर कष्ट सहने पड़ते हैं। यदि जन्म मृत्यु के खेल से उबरना है तो सांसारिक कार्यों को करते हुए सतभक्ति करना अति आवश्यक बताया गया है। परमात्मा का संविधान हमें बताता है की मृत्यु के बाद यदि कुछ साथ चलता है तो वह हमारी भक्ति की कमाई है और सतभक्ति प्राणी को पूर्ण संत से नामदीक्षा लेने के बाद करनी होती है। पूर्ण संत शास्त्र अनुसार सत्य भक्ति साधना बताते हैं जिस से प्राणी के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसको पूर्ण मोक्ष की प्राप्ति होती है। वर्तमान समय में केवल जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ही केवल एक पूर्ण संत हैं।

संत रामपाल जी महाराज परमात्मा के संविधान यानि “सूक्ष्म वेद” में से बताते है की भक्ति मार्ग में लगे खिलाड़ी को इस खेल के सभी नियमों का आखिरी सांस तक पूरी निष्ठा से पालन करना होता है। यदि भक्ति मर्यादा का पालन नहीं किया तो खिलाड़ी की हरकत को फाउल प्वाइंट जानकर उसे खेल के मैदान से बाहर कर दिया जाता है और उसे कोई लाभ नहीं मिल पाता। इसी प्रकार वर्तमान समय में प्रभु प्रेमी आत्माएं भक्ति तो कर रहे हैं लेकिन वह पवित्र श्रीमद भगवद गीता अध्याय 16 के श्लोक 23 और 24 के विपरीत शास्त्र विधि को त्यागकर मन माना आचरण है, इसलिए उस से कोई लाभ प्राणी को नहीं मिल सकता । अतः इस कार्यक्रम को देखने वाले हमारे सभी दर्शक मित्रों से निवेदन है की संत रामपाल जी महाराज जी से नामदीक्षा लेकर अपना कल्याण करवाएं

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