World Press Freedom Day 2022 [Hindi]: क्यों मनाया जाता है विश्व प्रेस आजादी दिवस?

World Press Freedom Day 2022 [Hindi] Theme & History इसकी खास बातें

World Press Freedom Day 2022: दुनियाभर में 3 मई के दिन विश्व प्रेस आजादी दिवस मनाया जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य प्रेस की आजादी के महत्व को बताना है. 

इतिहास (World Press Freedom Day History)

अगर बात प्रेस फ्रीडम डे के इतिहास की हो तब इसके लिए हमें घड़ी की सुइयों को थोड़ा पीछे ले जाना होगा जब 1993 में 3 मई को प्रेस फ्रीडम डे के रूप में घोषित किया गया था। यूनेस्को (UNESCO) ने 26 वें जनरल कॉन्फ्रेंस सेशन में 3 मई को प्रेस फ्रीडम डे की घोषणा की।

World Press Freedom Day 2022 Theme | विश्व प्रेस आजादी दिवस थीम

हर साल एक थीम के साथ प्रेस फ्रीडम डे मनाया जाता है और इस साल भी इस दिन के लिए ‘Journalism under digital siege’ थीम के रूप में रखा गया है। इस वर्ष का थीम न केवल उन तरीकों पर प्रकाश डालती है जो पत्रकारिता को खतरे में डालते हैं बल्कि डिजिटल मीडिया पर जनता के विश्वास और इन सब के परिणामों पर भी प्रकाश डालती है। अधिकतर, यह थीम निगरानी और डिजिटल रूप से मध्यस्थता वाले हमलों से पत्रकारों के सामने आने वाले जोखिमों पर केंद्रित है। वर्ल्ड प्रेस डे की उत्पत्ति 1991 में हुई।

दिवस का नाम (Name Of The Day)अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता स्‍वतंत्रता दिवस 2022 (World Press Freedom Day)
तिथि (Date)3 मई 2022
विषय (Theme)डिजिटल घेराबंदी के तहत पत्रकारिता (Eng: Journalism Under Digital Siege)
महत्व (Importance)पत्रकारों की आजादी और उनकी रक्षा के प्रति जागरूकता
इतिहास (History)1991 में दक्षिण अफ्रीका के पत्रकारों की रुचि के बाद 3 मई 1993 को संयुक्त राष्ट्र की महासभा द्वारा मनाया गया।

महत्व (World Press Freedom Day Significance)

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है और प्रेस जनता को अपने देश और दुनिया भर में होने वाली घटनाओं के बारे में सूचित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ग्लोबल कॉन्फ्रेंस पत्रकारों, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और राष्ट्रीय अधिकारियों को समाधानों की पहचान के लिए मिलकर काम करने का अवसर देता है।

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1948 में, मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा के अनुच्छेद 19 में इस बात पर जोर दिया गया था कि सभी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है, सभी को बिना किसी डर के अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार है और सभी को प्रेस का उपयोग करके अपने विचार प्राप्त करने और प्रदान करने का अधिकार है।

विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस का उद्देश्य (Aim of World Press Freedom Day )

प्रेस का कार्य लोगों तक सच पहुंचा कर उन्हें जागरुक करना है, लेकिन बदलते वक्त के साथ उससे ये हक छीन लिए गए हैं. आज दुनिया भर से पत्रकारों के खिलाफ हिंसा की खबरें सामने आती रहती हैं. विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाने का उद्देश्य पत्रकारों के साथ हिंसा रोक कर उनको लिखने और बोलने की आजादी देना है. 

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यूनेस्को देता है गिलेरमो कानो वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम पुरस्कार

यूनेस्को  1997 से हर साल 3 मई को विश्व स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ‘गिलेरमो कानो वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम’ पुरस्कार देता है. यह पुरस्कार उस संस्थान या व्यक्ति को दिया जाता है, जिसने प्रेस के आजादी के लिए उल्लेखनीय कार्य किया हो.  भारत के किसी भी पत्रकार या संस्थान को अभी तक यह पुरस्कार नहीं दिया गया है.

Video Credit | SA News Channel

पहली बार इस दिन को कब मनाया गया?

प्रेस की आजादी के लिए पहली बार साल 1991 में अफ्रीका के पत्रकारों ने मुहिम छेड़ी थी. इन पत्रकारों ने तीन मई को प्रेस की आजादी के सिद्धांतों को लेकर बयान जारी किया था जिसे डिक्लेरेशन ऑफ विंडहोक के नाम से भी जानते हैं. इसके ठीक दो साल बाद यानी साल 1993 में संयुक्त राष्ट्र की महासभा ने पहली बार विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाने का फैसला किया था. उस दिन से लेकर आज तक हर साल तीन मई को विश्व प्रेस आजादी दिवस मनाया जाता है.

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विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस 2022 उद्धरण

  • “सच पेश करने का साहस ही मीडिया है” “
  • प्रेस के लिए आजादी जरूरी होने के साथ-साथ जिम्मेदारी भी है जो आजादी के साथ आती है।”
  • “स्वतंत्रता हमें अपनी आत्मा को जन्म और मृत्यु के झंझट से मुक्त करने की आवश्यकता की याद दिलाती है”
  • “मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है अगर उसे स्वतंत्रता है और वह केवल टीआरपी के लिए काम नहीं कर रहा है”
  • “एक स्वतंत्र प्रेस हमें खुद को व्यक्त करने की स्वतंत्रता देता है” “एक स्वतंत्र प्रेस अवाक को आवाज देता है, उत्पीड़ितों को ताकत देता है, और नम्र को न्याय देता है”

कैसे मनाया जाता है ये खास दिन?

सन 1997 से हर साल तीन मई यानी विश्व प्रेस आजादी दिवस पर यूनेस्को गिलेरमो कानो वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम प्राइज देता है. ये उस संस्थान या फिर व्यक्ति को दिया जाता है, जिसने प्रेस की आजादी के लिए कुछ बड़ा काम किया होता है. साथ ही इस दिन स्कूल-कॉलेज में इस पर चर्चा और वाद-विवाद किया जाता है. इसके अलावा इस खास दिन के बारे में लोगों को जागरुक करने के लिए सेमीनार आयोजित किए जाते हैं।

जानिए इस दिवस की खास बातें 

  • प्रेस की आजादी के लिए पहली बार साल 1991 में अफ्रीका के पत्रकारों ने मुहिम छेड़ी थी. 
  • प्रेस की आजादी के सिद्धांतों को लेकर बयान जारी किया गया था जिसे डिक्लेरेशन ऑफ विंडहोक के नाम से भी जानते हैं. 
  • साल 1993 में संयुक्त राष्ट्र की महासभा ने पहली बार विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाने का फैसला किया था
    इसका उद्देश्य है- पत्रकारों के साथ हिंसा रुके, उनको लिखने और बोलने की आजादी मिले. 
  • साल 1997 से हर साल विश्व प्रेस आजादी दिवस पर यूनेस्को गिलेरमो कानो वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम प्राइज देता है
    ये उस संस्थान या फिर व्यक्ति को मिलता है, जिसने प्रेस की आजादी के लिए उत्कृष्ट कार्य किया होता है.

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