12वें ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक: नई दिल्ली में जलवायु संकट और हरित अर्थव्यवस्था पर मंथन
नई दिल्ली: वैश्विक जलवायु संकट के बीच, नई दिल्ली में बहुप्रतीक्षित 12वें ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया है। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ-साथ नए ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करने के लिए एक ठोस रणनीति तैयार करना है।
इस बार की 12वें ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक मुख्य रूप से हरित अर्थव्यवस्था (Green Economy), सतत विकास और जलवायु वित्त पोषण (Climate Finance) जैसे गंभीर मुद्दों पर केंद्रित रही। नीति निर्माताओं, पर्यावरण विशेषज्ञों और तकनीकी उत्साही लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ब्रिक्स समूह विकासशील देशों के हितों की रक्षा करते हुए कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में क्या नई नीतियां लागू करेगा।
12वें ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक के मुख्य उद्देश्य
दुनिया के सबसे बड़े विकासशील देशों का यह समूह वैश्विक आबादी और अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा कवर करता है। इसलिए, 12वें ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में लिए गए निर्णय सीधे तौर पर वैश्विक पर्यावरण नीतियों को प्रभावित करते हैं। इस बैठक का प्रमुख उद्देश्य विकसित देशों द्वारा किए गए जलवायु वित्त के वादों की समीक्षा करना था।
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सदस्य देशों ने इस बात पर जोर दिया कि जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए स्वच्छ ऊर्जा तकनीक का हस्तांतरण बिना किसी बड़ी शर्त के होना चाहिए। इसके अलावा, सम्मेलन में जैव विविधता के संरक्षण और वनों की कटाई को रोकने के लिए एक संयुक्त ब्रिक्स फ्रेमवर्क तैयार करने पर भी गहन मंथन हुआ।
ब्रिक्स देशों का वैश्विक पर्यावरण में योगदान और वर्तमान स्थिति
ब्रिक्स देश न केवल तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं हैं, बल्कि वे ग्रीन एनर्जी में भी भारी निवेश कर रहे हैं। नीचे दी गई तालिका में ब्रिक्स के प्रमुख देशों की हरित पहल और उनके लक्ष्यों का विवरण है:
| ब्रिक्स देश (BRICS Nation) | मुख्य पर्यावरणीय लक्ष्य (Key Environmental Goal) | ग्रीन इनिशिएटिव फोकस (Green Initiative Focus) |
| भारत (India) | 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन (Net-Zero by 2070) | अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन, नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन |
| चीन (China) | 2060 तक कार्बन न्यूट्रल (Carbon Neutral by 2060) | इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण, पवन ऊर्जा विस्तार |
| ब्राजील (Brazil) | अमेज़ॅन वनों की कटाई रोकना (Halt Deforestation) | जैव ईंधन (Biofuels) और सतत कृषि |
| रूस (Russia) | 2060 तक कार्बन तटस्थता | ऊर्जा दक्षता और परमाणु ऊर्जा का स्वच्छ उपयोग |
| दक्षिण अफ्रीका (South Africa) | कोयला निर्भरता कम करना (Reduce Coal Dependency) | नवीकरणीय ऊर्जा कार्यक्रम (REIPPPP) |
12वें ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में लिए गए 5 अहम फैसले
इस ऐतिहासिक 12वें ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक के दौरान कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर सहमति बनी है। विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने के लिए मंत्रियों ने कुछ सख्त और दूरदर्शी फैसले लिए हैं।
- क्लाइमेट फाइनेंस की मांग: ब्रिक्स देशों ने एक स्वर में विकसित देशों से मांग की है कि वे विकासशील देशों को स्वच्छ ऊर्जा अपनाने के लिए प्रति वर्ष 100 बिलियन डॉलर के जलवायु वित्त का अपना वादा पूरा करें।
- सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा: अपशिष्ट प्रबंधन (Waste Management) और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने के लिए ब्रिक्स सर्कुलर इकोनॉमी पहल को मंजूरी दी गई।
- ग्रीन टेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर: सदस्य देशों के बीच तकनीकी ज्ञान साझा करने के लिए एक संयुक्त अनुसंधान केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया गया।
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- वन्यजीव और समुद्री संरक्षण: तटीय क्षरण और प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने के लिए समुद्र तटों की सफाई का एक साझा कार्यक्रम शुरू किया जाएगा।
- कार्बन क्रेडिट बाजार का एकीकरण: ब्रिक्स देशों के बीच एक पारदर्शी और प्रभावी कार्बन ट्रेडिंग तंत्र विकसित करने की रूपरेखा तैयार की गई।
The 12th BRICS Environment Ministers’ Meeting concluded with the consensual adoption of the Joint Ministerial Statement (JMS) and the launch of four Knowledge Compendiums in New Delhi today. The JMS comprises four Outcome Documents.
As envisioned by Hon’ble PM Shri @narendramodi ji, BRICS under the Chairship of India placed the concerns of the Global South at the forefront of the agenda with a people-centric approach and the spirit of ‘Humanity First’.
@BRICSIndia
भारत का नेतृत्व और ग्रीन इनिशिएटिव का प्रभाव
भारत ने इस 12वें ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में एक वैश्विक नेता के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की है। ‘मिशन लाइफ’ (LiFE – Lifestyle for Environment) जैसी पहलों के माध्यम से भारत ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि केवल सरकारी नीतियां ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर जीवनशैली में बदलाव भी पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक है।
भारतीय प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि विकासशील देशों पर उत्सर्जन कम करने का अनुचित दबाव नहीं डाला जाना चाहिए, बल्कि उन्हें इसके लिए उचित संसाधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए। तकनीकी सहयोग के माध्यम से भारत ने अन्य ब्रिक्स देशों को सौर ऊर्जा ग्रिड से जोड़ने का भी अनूठा प्रस्ताव रखा।

जनभागीदारी और नीतियां
पर्यावरण को बचाने के लिए नीतियों का सफल क्रियान्वयन जनभागीदारी के बिना संभव नहीं है। इस 12वें ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में यह भी तय किया गया कि स्थानीय समुदायों और स्वदेशी लोगों को वन संरक्षण नीतियों का मुख्य हिस्सा बनाया जाएगा। ब्रिक्स देश अब पर्यावरण से जुड़ी शिक्षा को स्कूली पाठ्यक्रम में अनिवार्य करने पर भी विचार कर रहे हैं। अधिक जानकारी के लिए आप भारत सरकार केपर्यावरण मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट
पर जारी किए गए श्वेत पत्र को पढ़ सकते हैं।
प्राकृतिक आपदाओं और जलवायु संकट के बीच जीवन का वास्तविक उद्देश्य और स्थायी शांति का मार्ग
आज विश्व के तमाम बड़े नेता पर्यावरण को बचाने के लिए 12वें ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक जैसे मंचों पर नीतियां बना रहे हैं। ग्लोबल वार्मिंग, बेमौसम बारिश, सूखा और महामारियां यह स्पष्ट कर रही हैं कि मानव जाति ने प्रकृति का अत्यधिक दोहन किया है। यह विनाशकारी स्थिति हमारे असीमित लालच और जीवन के वास्तविक उद्देश्य को भूल जाने का ही परिणाम है। हम भौतिक विकास की दौड़ में उस सर्वशक्तिमान परमात्मा से दूर हो गए हैं, जिसने इस पूरी सृष्टि की रचना की है।
संत रामपाल जी महाराज बताते हैं कि जब तक मनुष्य पूर्ण परमात्मा (कबीर साहेब) की सतभक्ति नहीं करता, तब तक उसके विचार और कर्म स्वार्थ से भरे रहते हैं। पूर्ण गुरु से नाम दीक्षा लेकर सही तरीके से भक्ति करने से मनुष्य के अंदर दया, करुणा और प्रकृति के प्रति सम्मान का भाव जागृत होता है। सतभक्ति करने वाला व्यक्ति कभी भी प्रकृति का विनाशक नहीं हो सकता, क्योंकि वह जानता है कि यह संसार नश्वर है और उसका असली घर ‘सतलोक’ है।
संत रामपाल जी महाराज का ज्ञान समाज में शांति, नशा मुक्ति और भाईचारे की स्थापना कर रहा है, जो अंततः धरती पर एक संतुलित और खुशहाल जीवन की नींव रखता है। वास्तविक शांति और मोक्ष प्राप्त करने के लिए और यह जानने के लिए कि हमारे जीवन का मूल उद्देश्य क्या है, आप संत रामपाल जी महाराज के आध्यत्मिक यूट्यूब चैनल (Sant Rampal Ji Maharaj) पर सत्संग सुन सकते हैं।
FAQs on 12वें ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक
1. 12वें ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक कहाँ आयोजित की गई?
12वें ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक का आयोजन भारत की राजधानी नई दिल्ली में किया गया। इस सम्मेलन में ब्रिक्स सदस्य देशों के पर्यावरण मंत्रियों और उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया।
2. इस 12वें ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक का मुख्य एजेंडा क्या था?
इस बैठक का मुख्य फोकस जलवायु परिवर्तन, हरित अर्थव्यवस्था (Green Economy), सतत विकास, और विकसित देशों से जलवायु वित्त (Climate Finance) सुरक्षित करने पर था।
3. ब्रिक्स देशों ने विकसित देशों से क्या प्रमुख मांग की है?
ब्रिक्स देशों ने विकसित राष्ट्रों से मांग की है कि वे विकासशील देशों को स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण अनुकूल तकनीक अपनाने के लिए 100 बिलियन डॉलर प्रति वर्ष के जलवायु वित्त के वादे को पूरा करें।
4. इस बैठक में भारत ने किस वैश्विक पहल को बढ़ावा दिया?
भारत ने इस बैठक में ‘मिशन लाइफ’ (LiFE – Lifestyle for Environment) को प्रमुखता से उठाया, जो पर्यावरण की रक्षा के लिए व्यक्तिगत जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाने पर जोर देता है।
5. क्या 12वें ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में कोई नई संस्था बनाने का निर्णय हुआ?
हां, सदस्य देशों के बीच स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण तकनीकों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए एक संयुक्त ब्रिक्स ‘ग्रीन टेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर’ स्थापित करने पर सहमति बनी है।
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