दक्षिण एशिया के दो पड़ोसी देशों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर जारी तनाव अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर और अधिक गहरा गया है। Indus Water Treaty भारत पाकिस्तान संबंधों का एक बेहद संवेदनशील और रणनीतिक पहलू रहा है। हाल ही में पाकिस्तान द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) को एक पत्र भेजकर भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने का प्रयास किया गया, जिस पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।

भारतीय विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस ब्रीफिंग में स्पष्ट किया कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहा है। पाकिस्तान जिस कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (Court of Arbitration) यानी स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) के फैसले का हवाला देकर खुद को पीड़ित दिखाने की कोशिश कर रहा है, भारत उस संस्था और उसके क्षेत्राधिकार को सिरे से खारिज करता है।

क्या है पाकिस्तान का UNSC ड्रामा और भारत का दोटूक जवाब?

पाकिस्तान ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्यों को एक पत्र भेजकर दावा किया था कि नीदरलैंड्स के हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) ने 31 अगस्त को Indus Water Treaty के तहत उसके पक्ष में एक “अवॉर्ड” जारी किया है। पाकिस्तान के अनुसार, इस फैसले में कहा गया है कि 1960 की Indus Water Treaty पूरी तरह लागू है और भारत इसे एकतरफा तरीके से निलंबित या स्थगित नहीं कर सकता।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान के इस दावे की हवा निकालते हुए भारत की स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट किया:

  • गैर-कानूनी गठन: भारत का मानना है कि विवाद सुलझाने के लिए जिस कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन का गठन किया गया, वह 1960 की Indus Water Treaty की मूल शर्तों और तय तंत्र के विपरीत था।
  • क्षेत्राधिकार का अभाव: क्योंकि इस संस्था का गठन ही प्रक्रियात्मक त्रुटियों के साथ हुआ था, इसलिए भारत ने इसकी किसी भी कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया।
  • संप्रभुता पर कोई असर नहीं: भारत की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसलों पर इस अवैध रूप से गठित कोर्ट के किसी भी फैसले या अवॉर्ड का कोई असर नहीं पड़ेगा।

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Indus Water Treaty का इतिहास और विवाद की मुख्य समयरेखा

वर्ष 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के बीच Indus Water Treaty पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसके तहत पूर्वी नदियों (रावी, व्यास, सतलुज) का पानी भारत को और पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) का पानी मुख्य रूप से पाकिस्तान को आवंटित किया गया था।

हालाँकि, पाकिस्तान द्वारा लगातार सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा दिए जाने के कारण भारत ने अपनी नीति में कड़ा बदलाव किया। अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले के बाद भारत ने स्पष्ट कर दिया था कि “रक्त और पानी एक साथ नहीं बह सकते” और संधि को स्थगित कर दिया गया।

घटना / पड़ाववर्ष / तिथिविवरण व मुख्य प्रभाव
संधि पर हस्ताक्षर19 सितंबर 1960विश्व बैंक की मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान के बीच ऐतिहासिक समझौता।
पहलगाम आतंकी हमलाअप्रैल 2025पाकिस्तान पोषित आतंकवाद के विरोध में भारत द्वारा संधि पर रोक का निर्णय।
PCA का विवादित फैसला31 अगस्त 2026स्थायी मध्यस्थता न्यायालय ने पाकिस्तान के पक्ष में एकतरफा अवॉर्ड जारी किया।
भारत का कड़ा विरोध23 सितंबर 2026विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने UNSC में भेजे गए पाक के पत्र को खारिज किया।

आतंकवाद और जल कूटनीति पर भारत की दोटूक नसीहत

पत्रकारों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान को नसीहत दी कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बेबुनियाद शिकायतें दर्ज कराने के बजाय उसे अपनी धरती से संचालित होने वाले आतंकवाद पर लगाम लगानी चाहिए। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार से होने वाली आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ कोई ठोस, विश्वसनीय और सत्यापन योग्य (verifiable) कार्रवाई नहीं करता, तब तक किसी भी कूटनीतिक या रणनीतिक समझौते की बहाली संभव नहीं है।

भारत का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि देश अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभु अधिकारों के साथ किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव में कोई समझौता नहीं करेगा।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल प्रेस ब्रीफिंग के दौरान Indus Water Treaty पर भारत का रुख स्पष्ट करते हुए

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जल विवाद, वैश्विक अस्थिरता और शांति की असली राह

दुनिया भर में आज संसाधनों पर कब्जे, सीमाओं के तनाव और राजनीतिक खींचतान के कारण अशांति का माहौल बना हुआ है। कभी जल संसाधनों के बंटवारे पर दो देश आमने-सामने होते हैं, तो कभी आतंकवाद और युद्ध करोड़ों मासूम लोगों के जीवन को तबाही के मुहाने पर लाकर खड़ा कर देते हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल नदी के पानी को लेकर दशकों से चल रहा यह संघर्ष इस बात का प्रमाण है कि केवल भौतिक संसाधनों, कूटनीतिक संधियों या कानूनी संस्थाओं के सहारे दुनिया में स्थायी शांति और सद्भाव स्थापित नहीं किया जा सकता।

संसार के सभी भौतिक साधन, नदियाँ और धन-दौलत क्षणभंगुर हैं। इंसान जब तक स्वार्थ, नफरत और छल-कपट के मार्ग पर चलता रहेगा, तब तक समाज में भय और अनिश्चितता बनी रहेगी। इन तमाम सांसारिक संकटों, प्राकृतिक आपदाओं, युद्ध के खतरों और मानसिक अशांति का एकमात्र स्थाई समाधान पूर्ण परमात्मा की भक्ति और आध्यात्मिक मार्ग में निहित है।

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FAQs on Indus Water Treaty भारत पाकिस्तान

प्रश्न 1: Indus Water Treaty को लेकर हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच क्या नया विवाद उत्पन्न हुआ है?

 उत्तर: पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) को एक पत्र भेजकर स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) के उस फैसले का हवाला दिया है जिसमें संधि को लागू रखने की बात कही गई थी। भारत ने इस पत्र और फैसला सुनाने वाले कोर्ट के गठन दोनों को अवैध बताते हुए खारिज कर दिया है।

प्रश्न 2: भारत स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) के फैसले को क्यों स्वीकार नहीं कर रहा है?

 उत्तर: भारत का स्पष्ट मानना है कि इस कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन का गठन 1960 की Indus Water Treaty की मूल शर्तों और तय प्रक्रियाओं का उल्लंघन करके किया गया था। इसलिए भारत इस संस्था के क्षेत्राधिकार को मान्यता नहीं देता।

प्रश्न 3: भारत ने Indus Water Treaty को निलंबित करने का फैसला कब और क्यों लिया था? 

उत्तर: भारत ने अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद इस संधि को स्थगित करने का निर्णय लिया था। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद पर ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि बहाल नहीं होगी।

प्रश्न 4: Indus Water Treaty कब और किनके बीच हस्ताक्षरित हुई थी? 

उत्तर: Indus Water Treaty 19 सितंबर 1960 को भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई थी।

प्रश्न 5: भारत ने आतंकवाद पर पाकिस्तान को क्या स्पष्ट संदेश दिया है? 

उत्तर: भारत के विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि पाकिस्तान को बयानबाजी छोड़कर जमीनी स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ ठोस, विश्वसनीय और सत्यापन योग्य कदम उठाने होंगे, तभी कोई बातचीत संभव है।