उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से प्रशासनिक शिथिलता, लालफीताशाही और मानवीय संवेदनहीनता का एक झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। जिले के नरैनी तहसील अंतर्गत ग्राम स्योढ़ा निवासी दोनों पैरों से शत-प्रतिशत दिव्यांग बृजभूषण पिछले 12 वर्षों से अपना वैध Ration Card बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के अनगिनत चक्कर काट रहे थे। एक गंभीर सड़क हादसे में अपने दोनों पैर गंवा चुके बृजभूषण जब अपनी अंतिम उम्मीद लेकर बांदा जिलाधिकारी (DM) कार्यालय पहुंचे, तो कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया।

हाथ जोड़कर आंखों में आंसू लिए पीड़ित ने प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा कि विभाग वर्षों से उनका कार्ड नहीं बना रहा है और वे दाने-दाने को मोहताज हैं। इस दारुण स्थिति का तत्काल संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन ने जिला पूर्ति विभाग के लापरवाह अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई और प्राथमिकता के आधार पर तत्काल नया Ration Card जारी करने के सख्त आदेश दिए।

बांदा कलेक्ट्रेट का मामला: 12 साल का लंबा संघर्ष और प्रशासनिक विफलता

स्योढ़ा गांव के निवासी बृजभूषण कई वर्ष पूर्व एक भीषण सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए थे, जिसमें डॉक्टरों को उनकी जान बचाने के लिए दोनों पैर काटने पड़े। शत-प्रतिशत शारीरिक अक्षमता के कारण उनके पास आजीविका उपार्जन का कोई भी स्वतंत्र साधन शेष नहीं बचा। उनका पूरा जीवन और दैनिक भरण-पोषण पूर्णतः राज्य सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर निर्भर हो चुका है।

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पीड़ित के अनुसार, उन्होंने वर्ष 2014 से लेकर अब तक ब्लॉक मुख्यालय, तहसील दिवस, संपूर्ण समाधान दिवस और मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर दर्जनों बार लिखित प्रार्थना पत्र दिए। प्रत्येक समाधान दिवस पर उन्हें केवल फाइलों के आगे बढ़ने का मौखिक आश्वासन मिला, परंतु जमीनी स्तर पर पूर्ति विभाग के कर्मचारियों ने उनके आवेदन को ठंडे बस्ते में डाले रखा।

बांदा दिव्यांग उत्पीड़न एवं प्रशासनिक कार्रवाई सारांश

प्रमुख पैरामीटरप्रकरण का संपूर्ण विवरण
पीड़ित का नामबृजभूषण
मूल निवास स्थानग्राम स्योढ़ा, तहसील नरैनी, जनपद बांदा (उत्तर प्रदेश)
दिव्यांगता का स्तरसड़क दुर्घटना में दोनों पैर कटे (100% प्रमाणित दिव्यांग)
मुख्य समस्यापिछले 12 वर्षों से वैध खाद्य सुरक्षा पहचान से वंचित
अतिरिक्त आर्थिक संकटपिछले 9 महीनों से दिव्यांग भरण-पोषण पेंशन का भुगतान बंद
सक्षम प्रशासनिक हस्तक्षेपजिलाधिकारी निर्देशानुसार सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा पूर्ति विभाग को तलब कर तत्काल निस्तारण का आदेश

उपरोक्त विवरण से स्पष्ट है कि किस प्रकार एक असहाय और चलने-फिरने में असमर्थ नागरिक को कल्याणकारी व्यवस्था के बुनियादी अधिकारों से एक दशक से भी अधिक समय तक वंचित रखा गया।

9 महीने से पेंशन भी बंद: भुखमरी और सामाजिक लाचारी का दोहरा संकट

कलेक्ट्रेट सभागार में अधिकारियों के समक्ष पेश हुए बृजभूषण ने अपनी चरम आर्थिक विपन्नता का विवरण देते हुए बताया कि वे न केवल खाद्यान्न सुरक्षा से महरूम हैं, बल्कि पिछले 9 महीनों से समाज कल्याण विभाग द्वारा मिलने वाली दिव्यांग पेंशन भी अचानक रोक दी गई है। आय का कोई नियमित स्रोत न होने और बैंक खाते में पेंशन की राशि न आने से उनके समक्ष भुखमरी की नौबत आ गई है।

उन्होंने भरे गले से उपस्थित मीडिया और अधिकारियों को बताया कि कभी गांव के दयालु पड़ोसी भोजन करा देते हैं तो उनका पेट भरता है, अन्यथा कई रातें उन्हें भूखे पेट ही काटनी पड़ती हैं। चलने में असमर्थ होने के बावजूद वे बार-बार तिपहिया रिक्शा और अन्य साधनों से कर्ज लेकर जिला मुख्यालय तक गुहार लगाने आते रहे, किंतु हर बार विभागीय संवेदनहीनता के कारण उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा।

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पूर्ति विभाग को सख्त चेतावनी: प्रशासन ने दिए त्वरित जांच के निर्देश

दिव्यांग बृजभूषण की मार्मिक पुकार सुनकर बांदा के नगर मजिस्ट्रेट दिनेश चंद्र ने मामले में तत्काल कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) कार्यालय के संबंधित पटल सहायकों और निरीक्षकों को कलेक्ट्रेट में तलब कर कड़ी फटकार लगाई। नगर मजिस्ट्रेट ने दो टूक शब्दों में कहा कि शासन की प्राथमिकताओं में अंत्योदय और अत्यंत निर्धन वर्ग सबसे ऊपर हैं, ऐसे में 100% दिव्यांग व्यक्ति को 12 साल तक भटकाना अक्षम्य अपराध है।

प्रशासन द्वारा मामले में निम्नलिखित त्रि-स्तरीय दंडात्मक व सुधारात्मक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं:

  1. प्राथमिकता पर निस्तारण: जिला पूर्ति निरीक्षक को 24 से 48 घंटे के भीतर समस्त विधिक औपचारिकताएं पूर्ण कर पीड़ित का नया अंत्योदय कार्ड जारी करने के निर्देश दिए गए।
  2. लापरवाह कर्मियों पर विभागीय जांच: पिछले 12 वर्षों के दौरान जितने भी कर्मचारियों और पूर्ति निरीक्षकों के पास बृजभूषण की फाइल लंबित रही, उनकी जवाबदेही तय करने हेतु आंतरिक जांच कमेटी गठित कर दी गई है।
  3. पेंशन बहाली का तत्काल आदेश: समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि पेंशन पोर्टल पर तकनीकी त्रुटि को तत्काल दूर कर पिछले 9 महीनों के बकाया एरियर सहित पेंशन खाते में हस्तांतरित की जाए।

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सांसारिक व्यवस्थाओं की असहायता और शाश्वत सुख का आध्यात्मिक मार्ग

बांदा जनपद की यह हृदयविदारक घटना भौतिक जगत की एक अत्यंत कड़वी सच्चाई को उजागर करती है। इंसान जिस भौतिक समाज, सांसारिक नाते-रिश्तेदारों और मानवीय व्यवस्थाओं के सहारे अपने सुखद जीवन की कल्पना करता है, वे व्यवस्थाएं अक्सर स्वार्थ, लालफीताशाही और उदासीनता के कारण बिखर जाती हैं। एक बेबस, दोनों पैरों से लाचार व्यक्ति को अपने जीवित रहने के न्यूनतम अधिकार यानी दो जून की रोटी के लिए भी बारह वर्षों तक दर-दर की ठोकरें खानी पड़ती हैं। शारीरिक अपंगता, भुखमरी और सामाजिक तिरस्कार से जूझता हुआ प्राणी जब चारों तरफ से हताश हो जाता है, तब उसे स्पष्ट भान होता है कि यह मृत्युलोक (काल लोक) केवल दुखों और कर्म बंधनों का कारागार है।

तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज अपने ज्ञान सत्संगों में चारों पवित्र वेदों, श्रीमद्भगवद्गीता, पवित्र कुरान, पवित्र बाइबल और श्री गुरु ग्रंथ साहिब के अकाट्य प्रमाणों से समझाते हैं कि जब तक जीवात्मा पूर्ण परमात्मा की मर्यादापूर्ण सत्य साधना नहीं करती, तब तक वह अपने पूर्व जन्मों के संचित पाप कर्मों और प्रारब्ध के कष्टों को भोगने के लिए विवश रहती है। कबीर साहेब की पावन वाणी में आता है:

“कबीर, सब जग निर्धना, धनवंता ना कोय।

धनवंता सोई जानिये, जाके राम नाम धन होय।।”

जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज प्रमाणित करते हैं कि कबीर साहेब ही सर्व सृष्टि रचनहार, सर्वशक्तिमान पूर्ण परमेश्वर हैं। वे अपने सच्चे साधक के घोर से घोर पाप कर्मों और प्रारब्ध के संकटों को समाप्त करने में सक्षम हैं। पूर्ण संत से शास्त्रानुकूल सतनाम और सारनाम की दीक्षा लेकर मर्यादा में रहने वाले भक्तों को न केवल शारीरिक व आर्थिक कष्टों से मुक्ति मिलती है, बल्कि उन्हें उस अविनाशी लोक (सतलोक) की प्राप्ति होती है, जहाँ कभी कोई दुख, दरिद्रता, बीमारी या उपेक्षा नहीं होती।

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Frequently Asked Questions (FAQs) on Ration Card

प्रश्न 1: बांदा में पीड़ित दिव्यांग नागरिक को Ration Card बनवाने में 12 साल का समय क्यों लगा?

उत्तर: पीड़ित बृजभूषण के अनुसार, स्थानीय ब्लॉक और तहसील स्तर पर पूर्ति विभाग के कर्मचारियों की घोर लापरवाही और लालफीताशाही के चलते उनके आवेदनों पर वर्षों तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। लगातार प्रार्थना पत्र देने के बावजूद उन्हें केवल झूठे आश्वासन दिए जाते रहे।

प्रश्न 2: 100% दिव्यांगता के मामले में शासन का Ration Card आवंटन नियम क्या है?

उत्तर: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) एवं राज्य खाद्य रसद नियमावली के अंतर्गत गंभीर रूप से दिव्यांग और असहाय नागरिकों को विशेष प्राथमिकता श्रेणी में रखकर अंत्योदय अन्न योजना के तहत रियायती खाद्यान्न उपलब्ध कराने का स्पष्ट प्रावधान है।

प्रश्न 3: बांदा जिला प्रशासन ने संबंधित दोषी अधिकारियों के विरुद्ध क्या कदम उठाया है?

उत्तर: नगर मजिस्ट्रेट ने जिला पूर्ति विभाग के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए 12 साल तक फाइल लंबित रखने वाले दोषी पटल सहायकों और निरीक्षकों की जवाबदेही तय करने हेतु विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।

प्रश्न 4: उत्तर प्रदेश में राशन कार्ड न बनने पर नागरिक कहां शिकायत दर्ज करा सकते हैं?

उत्तर: यदि किसी पात्र नागरिक का राशन कार्ड समय पर जारी नहीं किया जाता, तो वे मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (IGRS), खाद्य एवं रसद विभाग के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1967/1800-1800-150 पर अथवा तहसील दिवस में लिखित शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

प्रश्न 5: क्या पीड़ित नागरिक की रुकी हुई पेंशन भी बहाल कर दी गई है?

उत्तर: जी हां, बांदा प्रशासन ने समाज कल्याण विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पीड़ित की पोर्टल पर तकनीकी जांच कर पिछले 9 महीनों से रुकी हुई दिव्यांग पेंशन को एरियर सहित तत्काल उनके बैंक खाते में निर्गत किया जाए।