भारत ने आर्थिक क्षेत्र में निरंतर प्रगति की है, और इस दिशा में “आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25” ने महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान की है। यह सर्वेक्षण वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किया गया, जिसमें भारतीय अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं का विश्लेषण किया गया है। आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था ने 6.4% की वास्तविक GDP वृद्धि दर प्राप्त की है। यह वृद्धि दर पिछले दशक की औसत वृद्धि दर के समान है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिरता और सुधार की दिशा को दर्शाती है। 

आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के मुख्य बिंदु:-

  • सरकार की कृषि नीतियों से कृषि के क्षेत्र में वृद्धि
  • सेवा क्षेत्र में प्रभावशाली वृद्धि
  • विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि रही धीमी
  • आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 प्रस्तुत करने के बाद बजट होगा महत्वपूर्ण 
  • देश की जीडीपी में वृद्धि का अनुमान 
  • सरकार की नीतियों से व्यापार घाटा कम होने की उम्मीद 
  • भारतीय अर्थव्यवस्था की चुनौतियां और संभावनाएं
  • आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 का संक्षिप्त सारांश
  • आध्यात्मिकता बन सकती है देश की आर्थिक प्रगति का आधार

कृषि क्षेत्र में सुधार

भारत का कृषि क्षेत्र, जो कि देश की एक बड़ी आबादी को रोजगार देता है, ने 3.8% की वृद्धि दर्ज की है। यह वृद्धि मानसून की अच्छी वर्षा, सरकार की कृषि नीतियों, और किसानों को दी जाने वाली सुविधाओं के कारण संभव हो पाई है।

सेवा क्षेत्र का उत्कर्ष

सेवा क्षेत्र, जो भारत की GDP में प्रमुख योगदानकर्ता है, ने 7.2% की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की है। आईटी, हेल्थकेयर, शिक्षा, और टूरिज्म जैसे उप-क्षेत्रों ने इस वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

विनिर्माण क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता

विनिर्माण क्षेत्र ने मात्र 6.2% की वृद्धि दर्ज की है, जो वैश्विक मांग में कमी के कारण धीमी रही। हालांकि, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों के कारण आने वाले वर्षों में इसमें सुधार की उम्मीद है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बजट और उसका प्रभाव

आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के प्रस्तुतिकरण के बाद, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट 2024-25 पेश किया जाएगा। इस बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे, और रक्षा क्षेत्रों में महत्वपूर्ण आवंटन किए जाने की संभावना है। 

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भारत की जीडीपी वृद्धि 2024

सरकार ने 2024-25 के लिए GDP वृद्धि दर 6.3% से 6.8% के बीच रहने का अनुमान व्यक्त किया है। यह अनुमान कृषि उत्पादन, सेवा क्षेत्र में सुधार, और घरेलू मांग में वृद्धि पर आधारित है।

भारत का आर्थिक विकास 2024-25

विकास के इस मार्ग में भारत ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को सिद्ध किया है। निर्यात में 1.6% और आयात में 5.2% की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे व्यापार घाटा बढ़ा है। हालांकि, सरकार की नीतियां व्यापार घाटे को कम करने में सहायक हो सकती हैं।

भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति: चुनौतियाँ और संभावनाएँ

भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति को देखते हुए कुछ प्रमुख चुनौतियाँ और संभावनाएँ निम्नलिखित हैं:

  1. मुद्रास्फीति नियंत्रण:

मुद्रास्फीति नियंत्रण में सरकार की सफलता आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक है। पेट्रोलियम उत्पादों और खाद्यान्न की कीमतों में उतार-चढ़ाव इसके प्रमुख कारक हैं।

  1. रोज़गार सृजन:

रोज़गार सृजन की दिशा में MSME (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग) क्षेत्रों को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। स्टार्टअप्स को अधिक वित्तीय सहायता और तकनीकी समर्थन दिया जाना चाहिए।

  1. डिजिटल अर्थव्यवस्था:

डिजिटल लेन-देन और फिनटेक के बढ़ते उपयोग से डिजिटल अर्थव्यवस्था में वृद्धि हुई है। सरकार की ‘डिजिटल इंडिया’ पहल ने इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है।

  1. बुनियादी ढांचे का विकास:

सड़क, रेल, और हवाई अड्डों के विस्तार से व्यापार और उद्योग को लाभ मिलेगा। ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’ जैसी योजनाओं ने ग्रामीण क्षेत्रों को शहरी बाजारों से जोड़ा है।

  1. हरित ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण:

सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, और बायोमास जैसे हरित ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देकर भारत पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सकता है।

आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25: निष्कर्ष

2024-25 का आर्थिक सर्वेक्षण भारत की आर्थिक विकास यात्रा का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है।आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार, भारत की वास्तविक GDP वृद्धि दर 6.4% रही, जो दशकीय औसत के करीब है। कृषि क्षेत्र में 3.8% और सेवा क्षेत्र में 7.2% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि विनिर्माण क्षेत्र में वैश्विक मांग में कमी के कारण 6.2% की धीमी वृद्धि हुई। निर्यात में 1.6% और आयात में 5.2% की वृद्धि से व्यापार घाटा बढ़ा।

आगामी वित्त वर्ष 2025-26 में GDP वृद्धि दर 6.3-6.8% रहने का अनुमान है। यह स्पष्ट करता है कि देश की आर्थिक बुनियाद मजबूत है, लेकिन बाहरी चुनौतियों और आंतरिक संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। भारतीय नीति निर्माताओं के लिए यह एक संकेत है कि सतत विकास और समावेशी वृद्धि के लक्ष्य को पाने के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण और सटीक रणनीति की आवश्यकता है।

आर्थिक विकास के साथ आध्यात्मिक उत्थान भी आवश्यक

भारत ने हाल के दशकों में उल्लेखनीय आर्थिक प्रगति की है, लेकिन सर्वांगीण विकास के लिए आध्यात्मिक उत्थान भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आध्यात्मिकता हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है और देश को विश्वगुरु बनाने में सहायक हो सकती है। आज देश भर में लाखों संत-महात्मा आध्यात्मिकता का प्रचार कर रहे हैं, लेकिन पवित्र शास्त्रों के अनुसार, संत रामपाल जी महाराज ही वास्तविक भक्ति मार्ग और मोक्ष का प्रमाणित ज्ञान प्रदान कर रहे हैं। उनका तत्वज्ञान शास्त्रसम्मत है और संपूर्ण विश्व के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। अधिक जानकारी के लिए विजि़ट करें: www.jagatgururampalji.org