Guru Ravidas Jayanti 2026: भारत की मिट्टी में जन्मे महान समाज सुधारक और आध्यात्मिक संत रविदास जी की जयंती वर्ष 2026 में 1 फरवरी को मनाई जा रही है। माघ पूर्णिमा के दिन पड़ने वाला यह पर्व केवल एक समुदाय विशेष के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए एक उत्सव है। संत रविदास जी ने अपने जीवन के माध्यम से यह सिद्ध किया कि ईश्वर किसी विशेष कुल या जाति की बपौती नहीं है, बल्कि वह तो केवल सच्चे प्रेम और निर्मल मन का भूखा है। आज जब समाज फिर से वैचारिक मतभेदों में उलझा है, तब रविदास जी की वाणी हमें एकता और भाईचारे का संदेश देती है।

Guru Ravidas Jayanti 2026 के मुख्य बिंदु

प्रमुख तिथि: 1 फरवरी 2026 (माघ पूर्णिमा)।

ऐतिहासिक महत्व: संत रविदास जी भक्ति आंदोलन के प्रमुख कवि और समाज सुधारक थे।

लोकप्रिय कहावत: ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ की प्रासंगिकता।

आध्यात्मिक प्रभाव: चित्तौड़ की रानी मीराबाई के आध्यात्मिक गुरु के रूप में पहचान।

धार्मिक एकता: उनके 40 पवित्र पदों का गुरु ग्रंथ साहिब में संकलन।

संत शिरोमणि रविदास जी के जीवन से जुड़े वो प्रसंग जो आज भी प्रेरणा देते हैं

वाराणसी की गलियों में जूते गांठने का काम करने वाले रविदास जी कभी भी अपने काम को छोटा नहीं समझते थे। एक बार उनसे किसी ने पूछा कि आप मंदिर क्यों नहीं जाते? उन्होंने बड़ी सरलता से उत्तर दिया कि परमात्मा तो मेरे भीतर है। उनका सबसे प्रसिद्ध वाक्य “मन चंगा तो कठौती में गंगा” तब अस्तित्व में आया जब उन्होंने सिद्ध किया कि यदि नियत साफ है, तो आपके काम करने वाले पात्र (कठौती) में ही गंगा का वास है। रविदास जी ने उस दौर में ‘बेगमपुरा’ नामक शहर की कल्पना की थी, जिसका अर्थ है—एक ऐसा स्थान जहाँ कोई ‘गम’ (दुःख) न हो और जहाँ सभी बराबर हों।

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शुभकामनाएं और सर्वश्रेष्ठ कोट्स: गुरु रविदास जयंती 2026 पर साझा करें ये संदेश

Guru Ravidas Jayanti 2026
  • “जाति-जाति में जाति हैं, जो केतन के पात, रैदास मनुष ना जुड़ सके जब तक जाति न जात।” (अर्थ: जाति के अंदर जाति होने से मनुष्य आपस में नहीं जुड़ पाते)।
  • “हरि सा हीरा छांड़ि कै, करै आन की आस, ते नर दोजख जाएंगे, सत भाषै रविदास।”
  • “मन चंगा तो कठौती में गंगा।”
  • “पराधीनता पाप है, जान लेहु रे मीत, रैदास दास पराधीन सौं, कौन करै है प्रीत।”
  • ये शब्द आज भी हमें गुलामी और भेदभाव के खिलाफ खड़े होने की शक्ति देते हैं।

सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार और समानता का संदेश

रविदास जी ने मध्यकाल में व्याप्त छुआछूत और ऊंच-नीच की जड़ों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने समाज को बताया कि ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र सभी एक ही मिट्टी के बने हैं। उनका दर्शन इतना प्रभावशाली था कि उस समय के राजा और रानियाँ उनके चरणों में झुकते थे। गुरु रविदास जयंती 2026 हमें यह याद दिलाती है कि समाज में शांति केवल तभी आ सकती है जब हम एक-दूसरे को इंसानियत की नजर से देखना शुरू करें।

तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज द्वारा स्पष्ट किया गया रविदास जी का आध्यात्मिक रहस्य

वर्तमान समय में संत रविदास जी की वाणियों का सही और गूढ़ आध्यात्मिक अर्थ तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी ने जन-जन तक पहुँचाया है। Sant Rampal Ji Maharaj बताते हैं कि रविदास जी पूर्ण परमात्मा (कबीर साहेब) के अनन्य उपासक थे। रविदास जी ने अपनी वाणी में स्पष्ट किया है कि परमात्मा एक है और वह सतलोक में निवास करता है।

Sant Rampal Ji Maharaj जी के अनुसार, रविदास जी को स्वयं कबीर परमेश्वर मिले थे और उन्हें सत्यनाम की दीक्षा देकर पार किया था। आज के समय में समाज को उसी एकता और सच्चे नाम की आवश्यकता है जिसकी शिक्षा संत रविदास जी ने दी थी। Sant Rampal Ji Maharaj जी के सत्संगों के माध्यम से आज लाखों लोग रविदास जी की उस ‘सतभक्ति’ को समझ पा रहे हैं जो मोक्ष का एकमात्र मार्ग है।

हमारे बारे में जानकारी:

अधिक जानकारी और वास्तविक आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने के लिए हमारी आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ: www.jagatgururampalji.org। आध्यात्मिक रहस्यों को समझने के लिए YouTube चैनल ‘Sant Rampal Ji Maharaj 

निष्कर्ष 

 गुरु रविदास जयंती केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि एक विचार है। संत रविदास जी ने हमें सिखाया कि भक्ति के साथ-साथ कर्म भी प्रधान है। आज जब दुनिया हिंसा और भेदभाव से जूझ रही है, तब उनकी ‘बेगमपुरा’ की अवधारणा हमें शांति और सह-अस्तित्व का रास्ता दिखाती है। हमें उनके बताए मार्ग पर चलते हुए आडंबरों को त्यागकर सच्चे परमात्मा की खोज करनी चाहिए।

FAQs on Guru Ravidas Jayanti 2026

1. वर्ष 2026 में गुरु रविदास जयंती कब है?

गुरु रविदास जयंती 2026 में 1 फरवरी को मनाई जा रही है। यह प्रतिवर्ष माघ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है।

2. ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है कि यदि आपका मन शुद्ध है और हृदय में सच्चाई है, तो ईश्वर आपके घर में ही है, आपको तीर्थों पर भटकने की जरूरत नहीं।

3. संत रविदास जी के गुरु कौन थे?

ऐतिहासिक रूप से उन्हें स्वामी रामानंद जी का शिष्य माना जाता है, लेकिन उनकी आध्यात्मिक गहराई पूर्ण परमात्मा की कृपा से प्राप्त हुई थी।

4. गुरु रविदास जयंती कैसे मनाई जाती है?

इस दिन लोग प्रभात फेरी निकालते हैं, उनकी वाणियों का पाठ करते हैं, और सामूहिक रूप से कीर्तन व लंगर का आयोजन किया जाता है।

5. रविदास जी की वाणी कहाँ संग्रहित है?

संत रविदास जी के लगभग 40 पद सिख धर्म के पवित्र ग्रंथ ‘गुरु ग्रंथ साहिब’ में पूरी श्रद्धा के साथ शामिल किए गए हैं।