अर्द्धसैनिक बलों की भूख हड़ताल: जंतर-मंतर पर जवानों का प्रदर्शन और 5 प्रमुख मांगें
देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की रक्षा करने वाले केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के पूर्व जवानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर अर्द्धसैनिक बलों की भूख हड़ताल शुरू हो चुकी है। कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेज मार्टियर्स वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले सेवानिवृत्त जवानों ने 7 दिवसीय क्रमिक अनशन का ऐलान किया है।
इस आंदोलन में CRPF, CISF, BSF, ITBP, SSB और असम राइफल्स के रिटायर्ड जवान एकजुट हैं। जवानों का सवाल है कि यदि वे सेना की तरह समान जोखिम उठाते हैं, तो उन्हें समान सुविधाएं क्यों नहीं दी जा रही हैं।

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वन रिस्क वन ड्यूटी: जंतर-मंतर पर 7 दिवसीय क्रमिक अनशन
पूर्व जवानों ने इस आंदोलन को “वन रिस्क वन ड्यूटी, तो पेंशन भी हो एक” का नाम दिया है। एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से लेकर बर्फीली सीमाओं तक CAPF जवान सबसे आगे तैनात रहते हैं। इसके बावजूद सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है।
| चरण | गतिविधि का नाम | स्थान | मुख्य उद्देश्य |
| प्रथम चरण | जिलाधिकारियों को ज्ञापन | सभी जिला मुख्यालय | स्थानीय प्रशासन के माध्यम से गृह मंत्रालय तक संदेश पहुंचाना |
| द्वितीय चरण | सांसद व विधायकों का घेराव | देशभर में | राजनीतिक दबाव बनाना और संसद में मुद्दा उठवाना |
| तृतीय चरण | 7 दिवसीय क्रमिक भूख हड़ताल | जंतर-मंतर, नई दिल्ली | राष्ट्रव्यापी ध्यान आकर्षित करना और मांगों की स्वीकृति |
क्या हैं अर्द्धसैनिक बलों की भूख हड़ताल के पीछे की 5 मुख्य मांगें?
रक्षा बलों (Army, Navy, Air Force) और अर्द्धसैनिक बलों (CAPF) के बीच सुविधाओं का भारी अंतर इस असंतोष का मूल कारण है। जवानों की प्रमुख मांगों का विवरण इस प्रकार है:
| क्रमांक | प्रमुख मांग | वर्तमान स्थिति | जवानों का तर्क |
| 1 | पुरानी पेंशन योजना (OPS) | 2004 के बाद भर्ती जवानों पर NPS लागू है | जोखिमपूर्ण सेवा के कारण रक्षा बलों की तर्ज पर OPS मिले |
| 2 | वन रैंक वन पेंशन (OROP) | CAPF को OROP का लाभ नहीं मिलता | समान सेवा अवधि और समान रैंक पर पेंशन में भारी अंतर |
| 3 | CSD कैंटीन सुविधा | CPC कैंटीन उपलब्ध है जिस पर GST लगता है | सेना की तरह CSD सुविधा और 50% GST छूट मिले |
| 4 | शहीद का दर्जा | ड्यूटी पर मृत्यु पर आधिकारिक ‘शहीद’ दर्जा नहीं | सर्वोच्च बलिदान देने वाले हर जवान को आधिकारिक दर्जा मिले |
| 5 | ECHS स्वास्थ्य सुविधा | CGHS कार्ड की जटिल प्रक्रिया | सेना की ECHS योजना की तरह सुलभ स्वास्थ्य योजना बने |
पुरानी पेंशन योजना (OPS) बनाम राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS)
साल 2004 में लागू NPS के तहत सेवानिवृत्त होने वाले जवानों को नाममात्र पेंशन मिल रही है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने जनवरी 2023 में CAPF को ‘Armed Forces of the Union’ मानते हुए OPS के दायरे में लाने का निर्णय दिया था। हालांकि, यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के कारण अर्द्धसैनिक बलों की भूख हड़ताल का सबसे प्रमुख बिंदु बन गया है।
सुविधाओं में असमानता और भविष्य की राह
चिकित्सा और कैंटीन सुविधाओं में अंतर के कारण जवानों को सेवानिवृत्ति के बाद कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। पूर्व जवानों ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों का समाधान नहीं हुआ, तो यह आंदोलन देशव्यापी रूप लेगा।
जीवन के वास्तविक संघर्ष और शाश्वत शांति का मार्ग
यह आंदोलन इस बात का प्रमाण है कि भौतिक संसार में कोई भी पद या पेंशन पूर्ण सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकती। इंसान जीवन भर सुरक्षा और शांति की तलाश में संघर्ष करता रहता है।
आध्यात्मिक दृष्टिकोण से, यह संसार क्षणभंगुर है। संत रामपाल जी महाराज के अनुसार, पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब की सतभक्ति ही जीव को शाश्वत लोक (सतलोक) तक ले जा सकती है, जहां कोई दुख या संघर्ष नहीं है। वास्तविक सुरक्षा और मोक्ष के मार्ग को समझने के लिए संत रामपाल जी महाराज के प्रामाणिक आध्यात्मिक विचारों का अध्ययन करना चाहिए।
FAQs
1. जंतर-मंतर पर अर्द्धसैनिक बलों की भूख हड़ताल क्यों की जा रही है?
सेवानिवृत्त जवान OPS, OROP, आधिकारिक शहीद का दर्जा और सेना के समान कैंटीन व स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग को लेकर यह भूख हड़ताल कर रहे हैं।
2. अर्द्धसैनिक बलों की मुख्य पेंशन मांग क्या है?
2004 के बाद भर्ती जवानों के लिए राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) को समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करना इनकी सबसे मुख्य मांग है।
3. क्या अर्द्धसैनिक बलों की भूख हड़ताल में सभी CAPF बल शामिल हैं?
जी हां, इसमें CRPF, CISF, BSF, ITBP, SSB और असम राइफल्स के सेवानिवृत्त जवान शामिल हैं।
4. ‘वन रिस्क वन ड्यूटी’ नारे का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि जब CAPF जवान सेना के समान जोखिम और ड्यूटी उठाते हैं, तो उन्हें पेंशन और अन्य भत्ते भी समान मिलने चाहिए।
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