मोहन यादव कैबिनेट का ऐतिहासिक निर्णय: मध्य प्रदेश के किसानों को ₹3091 करोड़ की बड़ी सौगात
मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के कृषि परिदृश्य को पूरी तरह बदलने और कृषकों की आय में अभूतपूर्व वृद्धि करने के उद्देश्य से कई बड़े नीतिगत फैसलों पर मुहर लगाई है।
हाल ही में आयोजित मंत्रिपरिषद की महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में कुल ₹42,490 करोड़ से अधिक के विभिन्न विकास प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिसमें सबसे बड़ा केंद्र बिंदु प्रदेश का कृषि और ग्रामीण अर्थतंत्र रहा है।
राज्य के किसानों को समृद्ध, आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए मोहन यादव सरकार ने उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की 8 प्रमुख राज्य पोषित योजनाओं को आगामी पांच वर्षों (1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031) तक निरंतर जारी रखने का प्रशासनिक एवं वित्तीय अनुमोदन दिया है।
इन 8 योजनाओं के लिए कुल ₹491 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। इसके साथ ही राज्य के सूखे और कम सिंचाई सुविधा वाले क्षेत्रों में जल संकट दूर करने के लिए ₹2,600 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली तीन प्रमुख वृहद एवं सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं की निरंतरता को हरी झंडी दिखाई गई है।

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मुख्यमंत्री मोहन यादव का विजन: उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा
मध्य प्रदेश में पारंपरिक खाद्यान्न फसलों जैसे गेहूं और धान के साथ-साथ अब उच्च मूल्य वाली उद्यानिकी फसलों (बागवानी) का रकबा बढ़ाने पर विशेष बल दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव का स्पष्ट मानना है कि किसानों की आय केवल पारंपरिक खेती से दोगुनी नहीं की जा सकती, इसके लिए उन्हें फल, सब्जी, मसाले और संरक्षित खेती (Protected Cultivation) की ओर मोड़ना अत्यंत आवश्यक है।
इसी सोच को धरातल पर उतारने के लिए सरकार ने अगले 5 वर्षों में ₹491 करोड़ की राशि विभिन्न 8 विभागीय मदों में खर्च करने का फैसला किया है। इस नीति के तहत फल पौध रोपण से लेकर उत्पादों की बिक्री के लिए कोल्ड चेन इन्फ्रास्ट्रक्चर स्थापित करने तक के लिए सीधी आर्थिक सहायता और सब्सिडी का प्रावधान किया गया है।
उद्यानिकी विभाग की 8 योजनाओं का वित्तीय आवंटन
| योजना का नाम / कार्य क्षेत्र | स्वीकृत वित्तीय राशि (₹ करोड़ में) | मुख्य उद्देश्य व लाभ |
| फल पौध रोपण योजना | ₹100.00 करोड़ | उन्नत किस्म के फलदार पौधे लगाने पर किसानों को अनुदान। |
| मसाला क्षेत्र विस्तार योजना | ₹100.00 करोड़ | मिर्च, धनिया, हल्दी व अन्य मसालों के रकबे में वृद्धि। |
| संरक्षित खेती प्रोत्साहन योजना | ₹85.00 करोड़ | पॉलीहाउस और शेडनेट हाउस निर्माण पर सीधी छूट। |
| खाद्य प्रसंस्करण उद्योग विकास | ₹53.00 करोड़ | कृषि आधारित प्रसंस्कृत इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा। |
| उद्यानिकी फसल बीमा योजना | ₹53.00 करोड़ | प्राकृतिक आपदाओं से बागवानी फसलों की सुरक्षा। |
| एकीकृत शीत श्रृंखला (Cold Chain) | ₹50.00 करोड़ | आधुनिक कोल्ड स्टोरेज व कोल्ड चेन इन्फ्रास्ट्रक्चर। |
| कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम | ₹25.00 करोड़ | किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीकों का प्रशिक्षण। |
| विभागीय परिसंपत्तियों का संधारण | ₹25.00 करोड़ | शासकीय नर्सरी व अधोसंरचना का रखरखाव और जीर्णोद्धार। |
| कुल योग | ₹491.00 करोड़ | आगामी 5 वर्षों (2026-2031) हेतु संपूर्ण वित्तीय आकार |
1.27 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि होगी सिंचित: ₹2600 करोड़ का मेगा प्लान
कृषि उत्पादन में वृद्धि का सीधा संबंध सिंचाई सुविधाओं की उपलब्धता से है। मध्य प्रदेश में वर्तमान जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव सरकार ने राज्य के तीन प्रमुख जिलों में जारी बड़ी सिंचाई परियोजनाओं के लिए ₹2,600 करोड़ से अधिक की राशि की विस्तार स्वीकृति दी है।
जल संसाधन विभाग द्वारा संचालित इन परियोजनाओं से उज्जैन, सिंगरौली और अशोकनगर जिलों की कुल 1,27,500 हेक्टेयर से अधिक कृषि योग्य भूमि को पाइपलाइन एवं सूक्ष्म सिंचाई (Micro Irrigation) प्रणाली के माध्यम से पानी पहुंचाया जाएगा।
प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं का विवरण
- चितावद वृहद सिंचाई परियोजना (जिला: उज्जैन)
- स्वीकृत बजट: ₹1,846.05 करोड़
- समयावधि: वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक
- लक्ष्य: महिदपुर तहसील के समीप क्षिप्रा नदी पर विशाल बांध का निर्माण कर लगभग 65,000 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में सुनिश्चित सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना।
- गौंड वृहद सिंचाई परियोजना (जिला: सिंगरौली)
- स्वीकृत बजट: ₹749.62 करोड़
- समयावधि: वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक
- लक्ष्य: बांध निर्माण के साथ-साथ आधुनिक सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली (Underground Pressure Pipe Network) स्थापित कर सिंगरौली के आदिवासी बहुल क्षेत्रों की 34,500 हेक्टेयर भूमि को पानी देना।
- चंदेरी माइक्रो सिंचाई परियोजना (जिला: अशोकनगर)
- स्वीकृत बजट: ₹11.49 करोड़
- समयावधि: वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक
- लक्ष्य: ड्रिप और स्प्रिंकलर आधारित अत्याधुनिक माइक्रो इरिगेशन नेटवर्क के जरिए क्षेत्र के किसानों की 28,000 हेक्टेयर जमीन को सिंचित करना।
मार्कफेड (MARKFED) को ₹2,220.62 करोड़ का ब्याज मुक्त ऋण
किसानों की उपज का सही समय पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर उपार्जन और उन्हें समय पर खाद-बीज की आपूर्ति सुनिश्चित करने में मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ (MARKFED) की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। मोहन यादव कैबिनेट ने मार्कफेड की वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए एक और अत्यंत संवेदनशील और ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
रबी विपणन वर्ष के खाद्यान्न साख-सीमा (Credit Limit) ऋण के पुनर्भुगतान हेतु मार्कफेड को ₹2,220.62 करोड़ की राशि का ब्याज मुक्त ऋण (Interest-Free Loan) राज्य सरकार के खजाने से उपलब्ध कराया जाएगा।
इस कदम से मार्कफेड पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा और राज्य के लाखों किसानों को रबी और खरीफ सीजन के दौरान खाद, बीज तथा उपार्जन भुगतान में किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।
भौतिक सुख-सुविधाओं से परे: शाश्वत शांति और सच्चे सुख का मार्ग
वर्तमान समय में सरकारें चाहे जितनी भी लोक-कल्याणकारी योजनाएं बना लें, सिंचाई के साधन बढ़ा दें या अरबों रुपये का बजट आवंटित कर दें, परंतु इंसान का जीवन दिन-प्रतिदिन चिंता, तनाव, आर्थिक अनिश्चितताओं और प्राकृतिक आपदाओं से घिरा हुआ है। आज किसान फसल की अनिश्चितता से परेशान है, तो व्यापारी घाटे से और आम नागरिक बीमारियों व मानसिक तनाव से ग्रस्त है। मनुष्य जीवन भर भौतिक संसाधनों को जुटाने की अंतहीन दौड़ में भागता रहता है, लेकिन इसके बावजूद भी उसे वह परम शांति और स्थायी सुख प्राप्त नहीं होता जिसकी उसकी आत्मा को वास्तव में तलाश है।
तमाम सांसारिक प्रयास और धन-दौलत भी इंसान को अकाली मृत्यु, असाध्य बीमारियों और कर्म-बंधनों के भय से मुक्त नहीं करा सकते। अध्यात्म ही वह एकमात्र माध्यम है जो मनुष्य को जीवन के वास्तविक उद्देश्य का बोध कराता है। संत रामपाल जी महाराज अपने तत्वज्ञान के माध्यम से स्पष्ट करते हैं कि इस नश्वर संसार के दुखों का स्थायी समाधान केवल और केवल कबीर साहेब (पूर्ण ब्रह्म) की शास्त्रानुकूल सतभक्ति में निहित है।
मानव शरीर कोई साधारण वस्तु नहीं है, यह केवल पूर्व जन्मों के कर्मों का फल भोगने और पूर्ण परमात्मा की भक्ति करके मोक्ष प्राप्त करने के लिए मिला है। जब इंसान शास्त्रानुकूल साधना करता है, तो उसे न केवल आध्यात्मिक शांति मिलती है, बल्कि उसके सांसारिक और आर्थिक कष्ट भी स्वतः ही दूर होने लगते हैं। सच्चे गुरु की शरण में जाकर सतभक्ति करने से जीव जन्म-मरण के चक्र से छूटकर उस अमर लोक (सतलोक) को प्राप्त करता है जहाँ न कोई दुख है, न गरीबी, न बीमारी और न ही किसी प्रकार का विनाश। यदि आप भी अपने जीवन में स्थायी शांति, सुख और आध्यात्मिक उन्नति चाहते हैं, तो Sant Rampal Ji Maharaj YouTube Channel पर आधिकारिक आध्यात्मिक सत्संग अवश्य देखें और शास्त्रप्रमाणित ज्ञान को समझकर अपना कल्याण करवाएं।
FAQs on मोहन यादव कैबिनेट निर्णय
प्रश्न 1: मुख्यमंत्री मोहन यादव कैबिनेट ने किसानों के लिए हाल ही में क्या बड़ा निर्णय लिया है?
उत्तर: मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में उद्यानिकी की 8 प्रमुख योजनाओं के लिए ₹491 करोड़ और तीन प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं के लिए ₹2600 करोड़ से अधिक का बजट स्वीकृत किया गया है।
प्रश्न 2: उद्यानिकी विभाग की 8 योजनाओं के लिए कितने बजट की मंजूरी मिली है और यह कितने वर्षों के लिए है?
उत्तर: उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की 8 योजनाओं के लिए कुल ₹491 करोड़ मंजूर किए गए हैं, जिन्हें आगामी 5 वर्षों (1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031) तक संचालित किया जाएगा।
प्रश्न 3: मुख्यमंत्री मोहन यादव सरकार द्वारा स्वीकृत तीन प्रमुख सिंचाई परियोजनाएं कौन-कौन सी हैं?
उत्तर: स्वीकृत परियोजनाओं में उज्जैन की चितावद वृहद सिंचाई परियोजना (₹1846.05 करोड़), सिंगरौली की गौंड वृहद सिंचाई परियोजना (₹749.62 करोड़) और अशोकनगर की चंदेरी माइक्रो सिंचाई परियोजना (₹11.49 करोड़) शामिल हैं।
प्रश्न 4: इन नई सिंचाई परियोजनाओं से मध्य प्रदेश के कितने कृषि क्षेत्र को पानी मिलेगा?
उत्तर: इन तीनों परियोजनाओं के पूर्ण होने और निरंतर संचालन से प्रदेश के कुल 1.27 लाख हेक्टेयर (1,27,500 हेक्टेयर) से अधिक कृषि क्षेत्र में सिंचाई क्षमता का विकास होगा।
प्रश्न 5: मार्कफेड (MARKFED) को राज्य सरकार द्वारा कितना ऋण स्वीकृत किया गया है?
उत्तर: रबी विपणन वर्ष की साख-सीमा ऋण अदायगी हेतु मोहन यादव कैबिनेट ने मार्कफेड को ₹2,220.62 करोड़ का ब्याज मुक्त (Interest-Free) ऋण देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
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