रथ सप्तमी 2026: सनातन धर्म में सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता माना गया है, जो न केवल जगत को प्रकाश देते हैं बल्कि आरोग्य के भी प्रदाता हैं। माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को रथ सप्तमी के रूप में मनाया जाता है, जिसे सूर्य जयंती और अचला सप्तमी भी कहते हैं। वर्ष 2026 में यह पर्व 25 जनवरी को मनाया जाएगा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान सूर्य ने अपने रथ के साथ प्रकट होकर ब्रह्मांड को आलोकित किया था। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान का विशेष महत्व है, जो मनुष्य के मानसिक और शारीरिक विकारों को दूर करने में सहायक होता है।
रथ सप्तमी 2026 के मुख्य बिंदु और शुभ मुहूर्त का महत्व
- सप्तमी तिथि का प्रारंभ 24 जनवरी 2026 को रात 10:45 बजे से।
- सप्तमी तिथि का समापन 25 जनवरी 2026 को रात 08:32 बजे तक।
- अरुणोदय स्नान समय सुबह 05:27 से 07:11 के बीच (कुल अवधि: 1 घंटा 44 मिनट)।
- विशेष संयोग इस दिन सूर्य देव के सात घोड़ों वाले रथ की पूजा का विधान है, जो सात रंगों और जीवन की सात ऊर्जाओं का प्रतीक हैं।
- दान की महिमा रथ सप्तमी पर तिल, वस्त्र और स्वर्ण के दान को अत्यंत फलदायी माना गया है।
रथ सप्तमी की पूजा विधि और अर्घ्य का विधान
रथ सप्तमी के दिन भक्त सूर्योदय से पूर्व उठकर अरुणोदय काल में स्नान करते हैं। शास्त्रों के अनुसार, सिर पर सात आक (मदार) के पत्ते रखकर स्नान करने का विशेष महत्व है। स्नान के पश्चात तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, अक्षत और लाल फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। इस दौरान “ॐ घृणि सूर्याय नमः” या “गायत्री मंत्र” का जाप करना कल्याणकारी होता है। महिलाएं अपने आंगन में सूर्य देव के रथ की रंगोली बनाती हैं और घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाती हैं।
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आरोग्य और मोक्ष प्राप्ति का आधार: रथ सप्तमी
धार्मिक दृष्टि से रथ सप्तमी को ‘अचला सप्तमी’ भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन किया गया पुण्य कभी समाप्त नहीं होता। मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण के पुत्र साम्ब ने अपने कुष्ठ रोग से मुक्ति पाने के लिए इसी दिन सूर्य की उपासना की थी। यह दिन सौर मंडल के राजा सूर्य की ऊर्जा को आत्मसात करने का अवसर है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी, इस समय की सूर्य किरणें त्वचा रोगों को दूर करने और शरीर में विटामिन-D के स्तर को संतुलित करने में सहायक मानी जाती हैं।
जीवन का परम लक्ष्य: संत रामपाल जी महाराज का शास्त्रानुकूल मार्ग
अध्यात्म की गहराइयों में जाने पर यह ज्ञात होता है कि संसार में प्रचलित सूर्य पूजा और अन्य साधनाएँ केवल अस्थायी लाभ दे सकती हैं। संत रामपाल जी महाराज बताते हैं कि सूर्य देव स्वयं काल ब्रह्म के अधीन हैं और जन्म-मृत्यु के चक्र में बंधे हुए हैं। संत रामपाल जी महाराज के अनुसार, वास्तविक परमात्मा सत्य कबीर साहेब जी महाराज हैं, जो सतलोक के अधिपति हैं। वे समझाते हैं कि वास्तविक सुख और पूर्ण मोक्ष केवल शास्त्रानुकूल भक्ति के माध्यम से ही संभव है।
जब साधक उनके बताए गए सतनाम और सारनाम का सुमिरन करता है, तो उसे 33 करोड़ देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है और वह चौरासी लाख योनियों के जन्म-मरण के दुःखों से मुक्त हो जाता है।
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निष्कर्ष
रथ सप्तमी का पर्व हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने का संदेश देता है। जैसे सूर्य देव का प्रकाश भौतिक जगत को रोशन करता है, वैसे ही संत रामपाल जी महाराज का ज्ञान आत्मा के अंधकार को मिटाता है। व्रत और त्यौहारों के सामाजिक महत्व के साथ-साथ मनुष्य को उस पूर्ण ब्रह्म की खोज करनी चाहिए, जिससे जन्म-मरण का चक्र समाप्त हो। उनके दिव्य ज्ञान से वर्तमान जीवन सुखमय और भविष्य मोक्षदायक बन सकता है।
FAQs on Ratha Saptami 2026
1. वर्ष 2026 में रथ सप्तमी कब है?
2026 में रथ सप्तमी 25 जनवरी, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्य देव की जयंती का विशेष उत्सव मनाया जाता है।
2. रथ सप्तमी पर स्नान का सबसे शुभ समय क्या है?
अरुणोदय स्नान का शुभ समय सुबह 05:27 से 07:11 बजे तक है। इस समय किया गया स्नान पापों का नाश करता है।
3. रथ सप्तमी को ‘अचला सप्तमी’ क्यों कहा जाता है?
इसे अचला सप्तमी इसलिए कहते हैं क्योंकि इस दिन किए गए दान और पूजा का पुण्य फल स्थिर (अचल) रहता है और कभी समाप्त नहीं होता।
4. क्या रथ सप्तमी पर व्रत रखना अनिवार्य है?
अनिवार्य नहीं है, लेकिन आरोग्य और संतान सुख की कामना रखने वाले भक्त इस दिन उपवास रखकर सूर्य देव की आराधना करते हैं।
5. संत रामपाल जी महाराज के अनुसार सच्ची पूजा क्या है?
Sant Rampal Ji Maharaj के अनुसार, शास्त्रानुकूल साधना और पूर्ण परमात्मा की भक्ति ही सच्ची पूजा है, जो पूर्ण मोक्ष की प्राप्ति करवाती है।