प्रयागराज में बाढ़ का तांडव: उफान पर गंगा-यमुना, सड़कों पर चलीं नावें, ट्रेनें प्रभावित और हाई कोर्ट सख्त
उत्तर प्रदेश में लगातार जारी भारी बारिश और बांधों से छोड़े गए लाखों क्यूसेक पानी के कारण प्रयागराज में बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। संगम नगरी प्रयागराज में पवित्र गंगा और यमुना दोनों प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे तटीय व निचले इलाकों समेत शहर की मुख्य सड़कों पर भी पानी भर चुका है। संगम मार्ग जहाँ आमतौर पर गाड़ियां चला करती थीं, वहाँ अब नावें चलती नज़र आ रही हैं। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि पानी प्रसिद्ध लेटे हनुमान मंदिर के करीब तक पहुँच चुका है।
जलभराव और जलस्तर के इस उफान के चलते रामबाग रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों की आवाजाही पर बुरा असर पड़ा है। वहीं इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस अव्यवस्था पर कड़ा संज्ञान लेते हुए स्थानीय जिला प्रशासन और नगर निगम को जमकर फटकार लगाई है।
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मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश पर बने कम दबाव के क्षेत्र (Low-Pressure System) के कारण पूरे प्रदेश में मूसलाधार बारिश का दौर जारी है। इसके साथ ही ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों यानी उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में हो रही भारी बारिश का जलस्तर नदियों में आ रहा है।
हरिद्वार, कानपुर, नरौरा और माताटीला बांधों से लगातार लाखों क्यूसेक पानी गंगा और यमुना में छोड़ा जा रहा है। केन, बेतवा, चंबल और टोंस जैसी सहायक नदियों के उफान ने प्रयागराज के संगम क्षेत्र पर दोहरा दबाव बना दिया है।
नदियों का वर्तमान जलस्तर एवं आंकड़े
| मापन स्थल | वर्तमान जलस्तर (मीटर में) | खतरे का निशान (मीटर में) | मुख्य स्थिति |
|---|---|---|---|
| फाफामऊ (गंगा) | ~80.43 मी. | 84.73 मी. | जलस्तर में निरंतर वृद्धि दर्ज |
| छतनाग (गंगा-यमुना) | ~79.53 मी. | 84.73 मी. | तटीय क्षेत्र और घाट डूब चुके हैं |
| नैनी (यमुना) | ~79.94 मी. | 84.73 मी. | रिहायशी मोहल्लों में पानी घुसा |
(स्रोत: सिंचाई विभाग बाढ़ खंड एवं जिला प्रशासन रिपोर्ट)
लेटे हनुमान मंदिर तक पहुँचा पानी, संगम के पुरोहितों का पलायन
गंगा का जलस्तर जिस रफ्तार से बढ़ रहा है, उससे संगम तट पर स्थित प्रसिद्ध लेटे हनुमान मंदिर (बड़े हनुमान जी) की बाउंड्री तक पानी पहुँच गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जब गंगा मैया बड़े हनुमान जी को स्नान कराती हैं, तो इसे ‘अमृत स्नान’ माना जाता है। हालांकि, जलस्तर के लगातार बढ़ने से संगम तट पर मौजूद तीर्थ पुरोहित और पंडे अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जाने को मजबूर हैl

दारागंज, सलोरी, बक्शी बांध, और फाफामऊ के निचले इलाकों में झोपड़ियां और मकान जलमग्न हो चुके हैं। सैकड़ों परिवार अपने आवश्यक सामान के साथ सुरक्षित ऊंचे स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।
रेलवे यातायात प्रभावित: रामबाग स्टेशन के बजाय झूंसी से चलेंगी ट्रेनें
शहर में भीषण जलभराव के कारण रेल सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। उत्तर पूर्व रेलवे के अंतर्गत आने वाले प्रयागराज रामबाग स्टेशन के ट्रैक और यार्ड में पानी भर गया है। पटरियों के डूबने से रामबाग से शुरू और समाप्त होने वाली चार प्रमुख पैसेंजर ट्रेनों का संचालन अस्थायी रूप से बदलकर झूंसी स्टेशन से कर दिया गया है।
पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि रामबाग स्टेशन निचले इलाके में होने की वजह से पानी लगातार जमा हो रहा है जिसे पंपों द्वारा निकालने का प्रयास जारी है। राहत की बात यह है कि प्रयागराज जंक्शन, नैनी और प्रयागराज छिवकी स्टेशनों पर ट्रेन संचालन सामान्य रूप से चल रहा है।
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इलाहाबाद हाई कोर्ट की जिला प्रशासन को सख्त फटकार
शहर में लगातार हो रहे जलभराव और प्रयागराज में बाढ़ के बिगड़ते हालातों पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए प्रयागराज के जिलाधिकारी (DM) और नगर आयुक्त को तलब किया।
हाई कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए नगर निगम और जिला प्रशासन को जल निकासी की पुख्ता व्यवस्था करने और बाढ़ प्रभावित नागरिकों को तुरंत राहत सामग्री उपलब्ध कराने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
प्राकृतिक आपदाएँ, मानवीय लाचारी और स्थाई शांति का आध्यात्मिक मार्ग
प्रयागराज में आई यह भीषण बाढ़ और जलभराव की स्थिति इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि प्राकृतिक आपदाओं और काल चक्र के आगे इंसान कितना असहाय और बेबस है। विज्ञान, आधुनिक तकनीक और प्रशासनिक दावों के बावजूद जब प्रकृति का प्रकोप आता है, तो मनुष्य का धन, संपत्ति और अहंकार कुछ ही घंटों में जलमग्न हो जाते हैं। हर साल लाखों लोग बाढ़, सूखा, महामारी या अन्य आपदाओं के कारण अपार कष्ट भोगते हैं और अपने बने-बनाये आशियाने खो देते हैं।
इस नश्वर संसार में कोई भी स्थान पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। हमारे धर्मग्रंथ श्रीमद्भगवद्गीता (अध्याय 8 श्लोक 16) में स्पष्ट उल्लेख है कि ब्रह्म लोक से लेकर मृत्युलोक तक के सभी लोक पुनरावृत्ति में हैं, यानी यहाँ दुख, विनाश और मरण निश्चित है। इस काल लोक के कष्टों से मुक्ति पाने का एकमात्र उपाय उस परमपिता परमेश्वर यानी पूर्ण परमात्मा की शरण में जाना है।
संत रामपाल जी महाराज अपने आध्यात्मिक सत्संगों में समझाते हैं कि कबीर साहेब ही वह पूर्ण परमेश्वर हैं जो अपने सच्चे साधक की हर प्राकृतिक और दैविक आपदा से रक्षा करते हैं। जब मनुष्य तत्वदर्शी संत से शास्त्रानुकूल भक्ति मर्यादापूर्वक ग्रहण करता है, तो उसे उस ‘सतलोक’ की प्राप्ति होती है जहाँ न कोई बाढ़ है, न दुख, न बीमारी और न ही मृत्यु।
आज के समय में संपूर्ण विश्व को विनाशकारी आपदाओं से बचाने और जीवन में स्थाई सुख, शांति व मोक्ष प्राप्त करने के लिए संत रामपाल जी महाराज जी के विचारों और आध्यात्मिक ज्ञान को जानना अनिवार्य है।
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FAQs on प्रयागराज में बाढ़
प्रश्न 1: प्रयागराज में बाढ़ आने का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश और हरिद्वार, कानपुर तथा माताटीला बांधों से नदियों में छोड़े गए लाखों क्यूसेक पानी के कारण गंगा और यमुना नदियां उफान पर हैं, जिससे प्रयागराज में बाढ़ की स्थिति बनी है।
प्रश्न 2: प्रयागराज के कौन-कौन से इलाके बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं?
उत्तर: बाढ़ से मुख्य रूप से संगम क्षेत्र, दारागंज, सलोरी, बक्शी बांध, फाफामऊ और तटीय इलाकों की निचली बस्तियां प्रभावित हुई हैं।
प्रश्न 3: क्या बाढ़ के कारण प्रयागराज में ट्रेनों का संचालन बंद किया गया है?
उत्तर: नहीं, पूरी ट्रेन सेवाएं बंद नहीं हुई हैं, लेकिन रामबाग रेलवे स्टेशन पर पटरियां डूबने के कारण वहाँ से चलने वाली 4 पैसेंजर ट्रेनों का संचालन अस्थायी रूप से झूंसी स्टेशन से किया जा रहा है।
प्रश्न 4: प्रयागराज में गंगा और यमुना का खतरे का निशान कितना है?
उत्तर: प्रयागराज में गंगा और यमुना नदी का खतरे का निशान 84.73 मीटर है। हालांकि नदियां अभी खतरे के निशान के नीचे हैं, लेकिन जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।
प्रश्न 5: क्या प्रयागराज में बाढ़ की वजह से स्कूल बंद किए गए हैं?
उत्तर: हां, भीषण बारिश और जलभराव की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने कक्षा 12 तक के सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित की है।
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