Coal Crisis in India: क्या भारत के लिए कोयला संकट प्रायोजित संकट है?

Home Hindi News Coal Crisis in India: क्या भारत के लिए कोयला संकट प्रायोजित संकट है?
Coal Crisis in India [Hindi] क्या भारत के लिए कोयला संकट प्रायोजित संकट है

Coal Crisis in India: टेलीविजन और अखबारों में आजकल एक मुद्दा और छाया हुआ है जो खबरों का हिस्सा बना हुआ है जिससे आम जन की भी नींदें उड़ी हुई हैं। खबर है कि आने वाले दिनों में भारत के कुछ हिस्सों में भारी कोयला संकट के कारण अंधकार हो सकता है क्योंकि यह देशभर में बिजली उत्पादन को प्रभावित करेगा। बड़ी अजीब बात है क्योंकि ये स्थिति तब हो रही है जब कोयले का उत्पादन करने वाली नंबर एक कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड ने कोयले का रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन किया है जानकारी के मुताबिक, इस साल अगस्त से सितंबर तक कोल इंडिया ने 249.8 मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया है, जो पिछले साल की समान अवधि में हुए उत्पादन से 13.8 मिलियन टन ज्यादा है।

Coal Crisis in India [Hindi] क्या भारत के लिए कोयला संकट प्रायोजित संकट है

लेकिन इस सबके बावजूद भी देश में कोयले की कमी (Coal Shortage) की बातें सामने आ रही हैं और वो भी तब जब कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) ने इस साल रिकॉर्ड उत्पादन किया है।जबकि भारत ने इस वित्त वर्ष की पहली छमाही में पिछले साल की तुलना में 12 फीसदी ज्यादा कोयले का उत्पादन किया है और 2021 का प्रोडक्शन 2019-20 की तुलना में 6 फीसदी ज्यादा है।

पिछले 2 सालों से कोरोना महामारी और लॉकडाउन के कारण देश में आर्थिक मंदी का माहोल है। समय के साथ स्थिति में सुधार आते आते जैसे ही अर्थव्यवस्था में तेजी आई वैसे ही बिजली की खपत में भी वृद्धि होने लगी। सैकड़ों फेक्ट्रियां फिर से सुचारू हो गई, बंद पड़े कारोबार फिर से शुरू किए गएे, स्कूल, दफ्तर, सिनेमा, माल फिर से खोले गए। कोयला संकट की खबरों के कारण व्यापक स्तर पर भारत में बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी होना शुरू हो गई है। इसी बीच देशभर के थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले की किल्लत होने लगी है, अब तक देश की बिजली उत्पादक कंपनिया घरेलू या देसी कोयले की खानों पर निर्भर थी। लेकिन अब ऐसी स्थिति हो चुकी है की कोयले को दूसरे देशों से आयात भी करना पड़ सकता है। बढ़ती हुई ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए हाल ही में केंद्र सरकार ने बिजली कंपनियों को घरेलू कोयले में आयातित कोयले की 10 फ़ीसदी तक मात्रा मिलाने की मंज़ूरी दी है.

Coal Crisis in India | Latest News Updates

सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी की 7 अक्टूबर की रिपोर्ट तो यह बताती है की इस समय भारत के 135 कोयला संचालित बिजली संयंत्रों में से 110 गंभीर कोयला संकट से जूझ रहे हैं। कुछ कारणों को इसका जिम्मेदार ठहराया जा रहा है-

  • माना ये जा रहा है कि कोरोना काल में लाकडाउन के बाद अर्थव्यवस्था में सुधार आते ही बिजली की मांग बढ़ गई है।
  • सितंबर में कोयला खदानों के आसपास ज्यादा बारिश होने से कोयले का उत्पादन प्रभावित हुआ है।
  • विदेशों से आने वाले कोयले की कीमतें बढ़ गई हैं , जिससे आयात प्रभावित हुआ है।
  • मॉनसून की शुरुआत से पहले कोयले का स्टॉक नहीं रखा गया।

आपको बता दें कि भारत में 90 फ़ीसदी से अधिक कोयले का उत्पादन कोल इंडिया करती है। कुछ खदानें बड़ी कंपनियों को भी दी गई हैं, इन्हें कैप्टिव माइन्स कहा जाता है। इन कैप्टिव खदानों का उत्पान कंपनियां अपने संयंत्रों में ही ख़र्च करती हैं। भारत दुनिया के उन पांच देशों में से एक है जहां कोयले के सबसे बड़े भंडार हैं। दुनिया में कोयले के सबसे बड़े भंडार अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया, चीन और भारत में हैं।

Coal Crisis in India Latest News in Hindi: भारत सरकार के कोयला मंत्रालय के मुताबिक़ भारत के पास 319 अरब टन का कोयला भंडार हैं।भारत में कोयले के सबसे बड़े भंडार झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, तेलंगना और महाराष्ट्र में हैं। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, मेघालय, असम, सिक्किम, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश में भी कोयला मिला है। दुनिया के सबसे बड़े कोयला उत्पादक देशों में शामिल भारत आज अभूतपूर्व कोयला संकट के कगार पर खड़ा है। आशंका जाहिर की गई है कि यदि समय रहते देश इस संकट से नहीं उबरा, तो बड़े पैमाने पर बिजली कटौती हो सकती है।

Coal Crisis in India: देश में कोयला crisis क्यों पैदा हुआ?

कोल इंडिया और कोयला मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार मांग में बढ़ोतरी की वजह से ही मौजूदा हालात पैदा हुए हैं। बताया जा रहा है कि इसी साल मार्च में कोल इंडिया ने पावर प्लांट्स को कोयले का स्टॉक रखने की सलाह दी थी, लेकिन प्लांट ने इस सलाह को नहीं माना। मार्च में कोल इंडिया के 16 फीसदी कोयले का इस्तेमाल ही नहीं हो सका। सूत्र ये भी बताते हैं कि कोल इंडिया अक्टूबर 2020 से ही पावर प्लांट को लिख रहा था कि उसके पास कोयला ज्यादा है और प्लांट इसे स्टॉक कर रख सकते हैं।

  • Coal crisis के बीच देशभर में कोयले का संकट जारी है। सरकार का दावा है कि कोयले की कमी नहीं है, लेकिन इसी बीच महाराष्ट्र में 13 और पंजाब में 7 थर्मल पावर प्लांट भी बंद हो गए हैं। कई राज्य सरकारों ने केंद्र सरकार को कोयले की कमी की चिंता जताते हुए पत्र भी लिखे हैं।
  • रिकॉर्ड तोड़ प्रोडक्शन के बाद भी ऐसे हालात बन गए हैं। देश में 135 पावर प्लांट ऐसे हैं, जहां कोयले से बिजली बनाई जाती है और सरकार के ही आंकड़े बताते हैं कि इनमें से 18 प्लांट में कोयला पूरा खत्म हो चुका है, यानी यहां कोयले का स्टॉक है ही नहीं।सिर्फ 20 प्लांट ऐसे हैं जहां 7 दिन या उससे ज्यादा का स्टॉक बचा है।

कोयले की कमी पर सरकार का क्या है कहना?

केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने बीते रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोयले का संकट होने की बात खारिज कर दी थी।आरके सिंह ने दावा किया कि देश में कोयले का संकट न था, न है और न रहेगा। लेकिन उसके बावजूद राज्यों ने सवाल उठाया है। हालांकि, उन्होंने ये बात जरूर मानी थी कि पहले जहां प्लांट में 17-17 दिन का स्टॉक हुआ करता था, वहां अब 4-5 दिन का ही स्टॉक है। उन्होंने कहा था कि जल्द ही इस संकट को दूर कर लिया जाएगा। आरके सिंह ने कहा देश में कोयले की कमी को क्राइसिस बनाया गया है। उन्होंने कहा कि हमारे अधिकारी हर दिन कोयले के स्टॉक की निगरानी कर रहे हैं। ‘जितने पॉवर की जरूरत होगी, हम उतनी सप्लाई करेंगे।

Coal Crisis in India Latest News in Hindi: केंद्रीय कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयले के महंगे होने की वजह से इसकी आपूर्ति करने में और बिजली के उत्पादन में कमी आई है। मंत्री ने 3 से 4 दिनों में स्थिति को सामान्य करने का आश्वासन तो दिया था किंतु देशभर में स्थिति अभी भी गंभीर है।

  • दूसरी ओर दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि दिल्ली में अगर 24 घंटे का स्टॉक बचा तो हमें भी पावर कट प्लान करना पड़ेगा। मनीष सिसोदिया ने कहा कि कई पावर प्लांट में कोयले की किल्लत है और प्लांट बंद भी हुए हैं।
  • आम आदमी पार्टी के ही नेता संजय सिंह का कहना है कि भारत दूसरे नंबर का कोयला उत्पादन करने वाला देश है भारत में कोयले की कमी हो जाएगी यह बड़ी ही हास्यास्पद बात है। कोयले का संकट भारत में प्रायोजित संकट है। यह वास्तविक संकट नहीं है। कोयला खदानों में काम करने वाले इंजीनियरों ने कहा कोयले के उत्पादन में कोई कमी आई ही नहीं है।कोयले के स्टाक की कमी भारत में हो ही नहीं सकती।

जब कोयले की कमी नहीं तो बिजली का संकट क्यों?

Coal Crisis in India Latest News in Hindi: भारत में 135 बिजली घर ऐसे हैं जहां कोयले से बिजली बनाई जाती है, लेकिन इनमें से आधे के पास तीन दिन से भी कम का कोयला बचा है। भारत की बिजली की लगभग 70% सप्लाई कोयले से ही होती है।अब ऐसे में सवाल उठता है कि जब सरकार खुद कह रही है कि देश में कोयले का संकट नहीं है तो फिर थर्मल पॉवर प्लांट बंद क्यों हो रहे हैं? महाराष्ट्र में 13 और पंजाब में 7 थर्मल पॉवर प्लांट बंद हो गए हैं। केरल में कुछ प्लांट के बंद होने की खबरें हैं। महाराष्ट्र इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड ने सुबह 6 से 10 बजे तक और शाम को 6 बजे से रात 10 बजे तक बिजली का कम से कम इस्तेमाल करने की अपील की है। इसी तरह पंजाब में भी बिजली का संकट पैदा हो गया है और वहां 13 अक्टूबर तक हर दिन 3 घंटे की बिजली कटौती रहेगी।चीन के बाद भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर हैं जहां कोयले का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। चीन में भी कोयले का संकट खड़ा हो गया है और वहां इस संकट से निपटने के लिए फैक्ट्रियां और स्कूलों को बंद कर दिया गया है।

क्या सच में है बिजली का संकट?

न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स ने POSOCO यानी पॉवर सिस्टम ऑपरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड से मिले आंकड़ों के हवाले से बताया है कि अक्टूबर के 7 दिनों में पॉवर सप्लाई में 11.2% की कमी दर्ज की गई। POSOCO के आंकड़े ये भी बताते हैं कि झारखंड, बिहार और राजस्थान में हालात और भी खराब हैं। झारखंड में बिजली की 18% से 24% की कमी दर्ज की गई है, जबकि बिहार में 6% और राजस्थान में 17% कमी आई है। आंकड़ों से ये भी पता चलता है कि गुजरात और हरियाणा जैसे इंडस्ट्रियल स्टेट्स में भी बिजली का संकट हो रहा है। साथ ही उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भी बिजली की सप्लाई में कमी आ रही है।

ताजा स्थिति क्या कहती है?

नेशनल पॉवर पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक, अभी 110 प्लांट में से 16 ऐसे हैं जिनका स्टॉक खत्म हो चुका है। वहीं, 30 प्लांट के पास 1 दिन, 18 के पास 2 दिन, 19 के पास 3 दिन, 9 के पास 4 दिन, 6 के पास 5 दिन और 10 प्लांट के पास 6 दिन का कोयले का स्टॉक है। जबकि, दो प्लांट ही ऐसे हैं जिनके पास 7 और 8 दिन का स्टॉक है। और यह स्टाक दिन पर दिन खत्म होने की कगार पर है।

■ Also Read: क्या अंडे वाकई में शाकाहारी भोजन में आते हैं?

Coal Crisis in India Latest News in Hindi: समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, कोयला मंत्रालय ने भरोसा दिया है कि देश की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त कोयला है। कोयला बिजली संयंत्रों में रोज़ाना 18.5 लाख टन कोयले की ज़रूरत होती है जबकि प्रतिदिन 17.5 लाख टन कोयले की ही आपूर्ति हो पा रही है। जुलाई और अगस्त के दौरान, देश में बिजली की मांग 200 गीगा वॉट को भी पार कर गई थी। अप्रैल 2020 में 5 मिट्रिक टन कोयले का आयात किया गया था जो घटकर अगस्त 2021 में करीब 2 मिट्रिक टन पर आ गया। इसका सीधा असर बिजली उत्पादन के अन्य स्रोतों पर भी पड़ा है। हाईड्रो पॉवर प्रोजेक्ट से बिजली के उत्पादन की हिस्सेदारी 12-13 फीसदी से गिरकर 4 फीसदी पर आ गई है। इसी तरह गैस की कीमतों में दोगुना बढ़ोतरी ने गैस से पैदा होने वाली बिजली में 27 फीसदी की कमी हो गई है।

जब भी देश की जनता पर कोई संकट आता है तब तब राज्य सरकारें और केंद्र सरकार आपस में विवाद करने लगती हैं और अपना अपना पल्ला झाड़ती हैं। अंत में शोषण जनता का ही होता है। ऐसी गंभीर स्थिति में जब घर का और देश का सारा सामान बिजली संचालित है तो ऐसे समय में देश की जनता को इस स्थिति से निजात पाने के लिए क्या करना चाहिए ? आइए जानते हैं-

दोस्तों! इंसानी फितरत है मनुष्य किसी भी समस्या से बचने के लिए यदि उसके पास अधिक धन है तो रिश्वत देकर, चापलूस है तो चापलूसी से , ताकतवर है तो ताकत के दम पर सामने वाले से अपना काम निकलवाता है या पूरा करवाता है। परंतु अब स्थिति सर्वत्र अंधकार की आने वाली है। लगता है मानो चारों ओर अंधकार पसरेगा। एक ऐसा समय भी आता है जब बात इंसानी हाथों , ताकत और बुद्धि से ऊपर की होती है। ऐसे समय में केवल भगवान ही याद आता है। वह भगवान जो सर्वशक्तिमान है जो अंसभव को संभव कर सकता है। जिसके पास सभी परिस्थितियों का सहज समाधान होता है। वह परमात्मा जो सारी सृष्टि को बनाने वाला है जिसने अंधकार में डूबी हुई पृथ्वी को प्रकाशमान किया और हमें यह जीवन दिया।

पवित्र श्रीमद्भागवद गीता के अनुसार पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब हैं जो तीनों लोकों में प्रवेश करके सबका धारण पोषण करते हैं। सभी कार्यों को सिद्ध करने वाले भगवान कबीर हैं । वर्तमान समय में कबीर परमात्मा संत रामपाल जी महाराज जी के रूप में इस पृथ्वी पर अवतरित हुए हैं। शायद कुछ लोगों को यह बात मज़ाक लगेगी परंतु यह सच है इसमें ज़रा भी मिथ्या नहीं है।

परमात्मा कबीर संसार में रह रहे सभी मनुष्यों को व अन्य प्राणियों की सभी समस्याओं को सदा के लिए समाप्त करने, उन्हें आध्यात्मिक ज्ञान देने और मोक्ष प्रदान करने के लिए ही पृथ्वी पर अवतरित होते हैं। कबीर जी के अवतार संत रामपाल जी महाराज जी की शरण में आने वाले सभी लोगों की सांसारिक व सामाजिक समस्याओं को परमात्मा दूर कर देते हैं। संत रामपाल जी की शरण में आकर मर्यादा में रहकर शास्त्र अनुसार सतभक्ति करने वाले साधकों को जीवनभर सुख प्राप्त होता है और मरने के बाद भी सदा सुखमेव स्थान सतलोक की प्राप्ति होती है। सतलोक में स्वप्रकाशित पृथ्वी हैं वहां दूधों की नदियां बहती हैं वहां सुख ही सुख हैं। वर्तमान समय में उत्पन्न महामारी, आर्थिक मंदी, तेज़ी से बढ़ रही आपराधिक गतिविधियों, आतंकवाद, प्राकृतिक आपदाओं,भ्रष्टाचार, भ्रष्ट राजनीति से परमात्मा ही निजात दिलवा सकते हैं। वर्तमान समय में देश विदेश की सरकारों को चाहिए की संत रामपाल जी महाराज जी की शरण में आएं और सतभक्ति की ओट लें। ऐसा करने से देश विदेश में शांति ,सुख,सदभावना और भाईचारा बढ़ेगा तथा अज्ञान का अंधकार भी दूर होगा और सभी परेशानियों का हल भी निकलेगा। 

Leave a Reply

Your email address will not be published.

14 + 4 =