हरतालिका तीज का त्योहार हिंदू संस्कृति में बहुत महत्वपूर्ण है, खासकर सुहागिन महिलाओं के लिए। यह दिन शिव-पार्वती पूजा के लिए विशेष रूप से मनाया जाता है।


इस दिन, महिलाएं व्रत रखती हैं और भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। यह व्रत न केवल पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है, बल्कि सुख-समृद्धि और सौभाग्य के लिए भी किया जाता है। हम आपको इस लेख में हरतालिका तीज के महत्व और इसे मनाने के सरल उपायों के साथ-साथ संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान के अनुसार इसके वास्तविक अर्थ के बारे में बताएंगे।

मुख्य बातें

  • हरतालिका तीज का महत्व और इसकी पूजा विधि
  • हरतालिका तीज की पौराणिक कथा और इतिहास
  • संत रामपाल जी महाराज के अनुसार हरतालिका तीज का सही स्वरूप

हरतालिका तीज का महत्व और इसकी परंपरा

हरतालिका तीज की परंपरा और महत्व को समझने के लिए, हमें इसके पीछे की पौराणिक कथा और इतिहास को देखना होगा। यह त्योहार माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित है, और इसकी कहानी भारतीय संस्कृति में बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

हरतालिका तीज की पौराणिक कथा और इतिहास

पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इस तपस्या के दौरान, उन्होंने कई कठिनाइयों का सामना किया और अपनी समर्पण भावना से भगवान शिव को प्रसन्न किया।

इस कथा का महत्व न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से है, बल्कि यह महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है, जो अपने पतियों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं।

संत रामपाल जी महाराज के अनुसार हरतालिका तीज का सही स्वरूप

जहां पारंपरिक मान्यता के अनुसार हरतालिका तीज में महिलाएं व्रत-उपवास और शिव-पार्वती की मूर्ति पूजा करती हैं, वहीं संत रामपाल जी महाराज का ज्ञान एक अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। वे बताते हैं:

  1. व्रत-उपवास व्यर्थ हैं – गीता के अध्याय 16 के श्लोक 23-24 के अनुसार, जो व्यक्ति शास्त्र के नियमों को छोड़कर अपनी मनमानी पूजा करता है, उसे सुख और मोक्ष नहीं मिलता।
  2. मूर्ति पूजा शास्त्रविरुद्ध – गीता 7:20-23 में कहा गया है कि देवताओं की पूजा तात्कालिक फल देती है, स्थायी लाभ नहीं।
  3. सच्चा उपाय – पति की लंबी आयु और परिवार की समृद्धि के लिए व्रत या आडंबर नहीं, बल्कि परमात्मा कबीर साहेब की सच्ची भक्ति ही उपाय है।
  4. सच्चा श्रृंगार – आत्मा का श्रृंगार नाम-जप और अच्छे आचरण से होता है, न कि बाहरी सजावट से।

निष्कर्ष

हरतालिका तीज एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो महिलाओं के जीवन में श्रद्धा और भक्ति का अवसर प्रदान करता है। परंतु संत रामपाल जी महाराज के अनुसार इस दिन को केवल परंपरागत आडंबर तक सीमित न रखें।

पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और आत्मा की मुक्ति केवल सच्चे परमात्मा की भक्ति से ही संभव है। इसीलिए असली उपाय है – सच्चे गुरु से नाम-दीक्षा लेकर परमात्मा कबीर साहेब की भक्ति करना