International Labour Day in Hindi: जानिए कब और क्यों मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस, क्या है इसका इतिहास?

नमस्कार दर्शको! खबरों की खबर का सच कार्यक्रम में आप सभी का एक बार फिर से स्वागत है। इस बार हम अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस (International Labour Day in Hindi) के विषय में चर्चा करेंगे और आपके सामने मजदूर दिवस से सम्बंधित जानकारी प्रस्तुत करेंगे। जैसे

  • मजदूर दिवस कब मनाया जाता है?
  • मजदूर दिवस मनाने की शुरुआत कैसे हुई, इसका क्या इतिहास है?
  • मजदूर दिवस क्यों मनाया जाता है?
  • जिन मजदूरों को हम लाचार, गरीब और बेचारा समझते हैं उनका जीवन कैसा होता है?
  • क्या मजदूरों के जीवन को बदलने के लिए कुछ किया जा सकता है?
  • मजदूरों के जीवन मे सुख और समृद्धि कैसे लायी जा सकती है? क्या मजदूरी करके भी सुखी जीवन व्यतीत किया जा सकता है? यदि हाँ, तो कैसे?
International Labour Day in Hindi

International Labour Day in Hindi: अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर यह खास पेशकश

किसी भी समाज, देश, संस्था और उद्योग में मज़दूरों, कामगारों और मेहनतकशों की अहम भूमिका होती है। उनकी बड़ी संख्या इसकी कामयाबी के लिए हाथों, अक्ल/दिमाग और तनदेही के साथ जुटी होती है। किसी भी उद्योग में कामयाबी के लिए मालिक, कामगार और सरकार अहम भूमिका अदा करते हैं। कामगारों यानी मजदूरों के बिना कोई भी औद्योगिक ढांचा खड़ा नहीं रह सकता। मजदूर नहीं तो देश मे तरक्की नहीं। महात्मा गांधी ने कहा था कि किसी देश की तरक्की उस देश के कामगारों और किसानों पर निर्भर करती है। वैसे तो देश का हर एक व्यक्ति मजदूर है। कुछ भी काम करने के लिए हमें मजदूरों की तरह ही मेहनत करनी पड़ती है और दिमाग भी लगाना पड़ता है, फिर चाहे वो काम छोटे से छोटा हो या बड़े से बड़ा।

International Labour Day History in Hindi

दरअसल दोस्तो अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस को मई दिवस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिवस को प्रतिवर्ष एक मई को मजदूरों की गरिमा और अहमियत को कायम करने के लिए मनाया जाता है। आपको बता दे की मजदूर दिवस मनाने की शुरूआत 1 मई 1886 से मानी जाती है जब शिकागो, अमेरिका की मज़दूर यूनियनों नें यह मांग रखने के लिए हड़ताल की थी कि काम का समय 8 घंटे से ज़्यादा न हो और सप्ताह में एक दिन की छुट्टी हो। वहीं भारत में एक मई का दिवस सब से पहले चेन्नई में 1 मई 1923 को राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाना शुरू किया।

भारत में मद्रास हाईकोर्ट के सामने एक बड़ा प्रदर्शन किया और एक संकल्प के साथ यह सहमति बनाई गई कि इस दिवस को भारत में भी कामगार दिवस के तौर पर मनाया जाये और इस दिन छुट्टी का ऐलान किया जाये जिसके चलते आज भारत समेत लगभग 80 मुल्कों में यह दिवस पहली मई को अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इसके अलावा 1 मई को भाई लालो दिवस के रूप में भी सिक्ख समुदाय द्वारा मनाया जाता है। दरअसल सिख धर्म के प्रवर्तक गुरू नानक देव जी ने किसानों, मज़दूरों और कामगारों के हक में आवाज़ उठाई थी और उस समय के अहंकारी और लुटेरे हाकिम ऊँट पालक भागों की रोटी न खा कर उस का अहंकार तोड़ा और भाई लालो की काम की कमाई को सत्कार दिया था।

आइए अब आपको मजदूर से परिचित करवाते हैं

हमारे देश में औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 की परिभाषा के अनुसार यह फैसला किया जाता है कि कौन मजदूर है। औद्योगिक विवाद अधिनियम के दफा 2 एस में मजदूर की परिभाषा इस प्रकार दी गयी है-

“मजदूर कोई भी ऐसा व्यक्ति है जो मजदूरी या वेतन के बदले, किसी उद्योग में शारीरिक, अकुशल, कुशल, तकनीकी, कार्यकारी, क्लर्क या सुपरवाइज़र का काम करता हो, चाहे काम की शर्तें स्पष्ट या अन्तर्निहित हों वह मजदूर है।”

भारत में लगभग 60% जनसंख्या मजदूर वर्ग के अंतर्गत आती है जो दिन रात काम कर अपनी रोजी रोटी कमाते है। यदि हम कुछ आंकड़ों पर नजर डाले तो पिछले कुछ सालों में देश में मजदूरों की स्थिति बद से बदतर होती चली जा रही है। रोटी, कपड़ा, मकान इन तीन जरूरतों को पूरा करने के लिए हर मजदूर मजदूरी करता है लेकिन उसे मिलता क्या है? भरपेट खाना भी नसीब नहीं होता! बच्चों को स्कूल नहीं भेज पाते, पहनने को अच्छे कपड़े नही, सिर पर जो छत है उसका भरोसा नहीं कब तूफान से बर्बाद हो जाये। हर कोई मजदूर को दबाना जनता है उसे उठाना नही। ये है मजदूरों की जिंदगी।

International Labour Day in Hindi: नेताओं के झूठे दावे

हम मजदूर दिवस तो मानते है लेकिन मजदूरों के न्याय के लिए कोई नेता, अभिनेता या अधिकारी बात करते नही दिखाई देते। बेशक कई मंत्री जूठे दावे और वादे करते तो दिखाई देते है लेकिन उन्हें कभी पूरा नहीं कर पाते। आइए कुछ आंकड़ों पर नजर डालते है जिस से इस बात की गहराई तक पहुंचा जा सके। पिछले साल जब अप्रैल के महीने में देश में प्रथम बार लॉकडाउन लगा था, तब से ही श्रमिको ने अपने अपने घर पलायन करना शुरू कर दिया था। रेल और बस सेवा बंद होने के कारण लाखों मजदूर पैदल ही सैकड़ों मिल दूर अपने घर को रवाना हो चुके थे। परिणाम स्वरूप कई सड़क व रेल हादसे में सैकडो मजदूर अपनी जान गवां बैठे थे। एक समय तो ऐसा था कि कोरोना संक्रमण से अधिक मौते सड़को पर मजदूरों की देखी गयी।

Read in English: Explanation about International Labour Day 2021 by SA News Channel

ये मजदूर ही हैं जो देश की तरक्की में योगदान दे रहे हैं। मजदूरों के बिना देश कुछ भी नहीं है। इन मजदूरों में से ही कोई देश का नाम रोशन करने वाला व्यक्ति बन सकता था। पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम भी पहले एक मजदूर का काम करते थे, भविष्य में जाकर एक साइंटिस्ट होने के साथ देश के राष्ट्रपति होने की भूमिका निभाई। हम नही जानते की एक मजदूर की अहमियत हमारे देश के लिए कितनी है। एक एक मजदूर को खोना हमारे देश के लिए बड़ा नुकसान दायक है।

अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी

एक सर्वे के मुताबिक भारत में अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में काम करने वालों की हिस्सेदारी लगभग 90 प्रतिशत है, जिसमें से करीब 40 करोड़ श्रमिक पिछले साल गरीबी के कारण 2 समय का खाना खा पाने में भी सक्षम नही थे। और आपको यह जानकर हैरानी होगी कि यह आंकड़े दिन प्रतिदिन बद से बदतर होते जा रहे है। सरकार द्वारा रोजगार उपलब्ध नहीं कराए जाने पर सैकडो पढ़े लिखे लोग मजदूरी करने पर मजबूर/विवश हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले महीने यानि मार्च 2021 में भारत में बेरोजगारी दर 6.5 फीसदी पहुँच गयी।

शहरी इलाकों में बेरोजगारी दर 7.1 फीसदी तो ग्रामीण इलाकों में 6.2 फीसदी आंकी गई जो की बेहद शर्मनाक है। देश के 10 राज्य ऐसे हैं, जहां की बेरोजगारी दर देश की कुल बेरोजगारी दर से भी ज्यादा है। यह राज्य है हरियाणा, राजस्थान, गोवा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, बिहार, त्रिपुरा, दिल्ली और पंजाब। इन आंकड़ों के आईने में देखने पर समझ आता है कि देश भले ही आज कुछ हद तक कोरोना से अनलॉक हो गया हो, लेकिन युवाओं के लिए रोजगार के मौके कोरोना के आते ही लॉक हो गए हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, लॉक डाउन के पहले तीन महीनों अप्रैल से जून 2020 के दौरान देश में शहरी बेरोज़गारी दर 20.9 फ़ीसदी तक पहुंच गई थी, जोकी अपनी आप में बेहद शर्मनाक है।

मजदूरों का शोषण

यदि हम वर्तमान समय की बात करें तो आज भी मजदूरों का शोषण देश में चरम सीमा पर है। आज भी मजदूरों के हित में बोलने वाला कोई नहीं है। मजदुर यदि अपने हक के लिए एक जुट होकर रैली आंदोलन आदि भी करते है तो इसका कवरेज देश की बिकाऊ मीडिया नही दिखाती, और तो और सरकार आंदोलन को दबाने के लिए धारा 144 लगाकर इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर देती है, जिससे की मज़दूरों की कोई भी खबर सोशल मीडिया आदि पर भी वाइरल बहुत कम ही होती है। खैर इसमें कोई दोराय नहीं कि सरकार समय समय पर मजदूरों के लिए नए कानून अवश्य बनाती है लेकिन सरकार मजदूरों की समस्याओं का निवारण करने में आज भी असक्षम रही है।

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यहां तक कि भारत जैसे सांस्कृतिक देश में भी मजदूरों को इज्जत नही दी जाती। मजदूरों के साथ अक्सर भेदभाव किया जाता है और उन्हें उनकी जाति, मजहब, वर्ण, रंग या काम से तोला जाता है। यही कारण है की विदेश में जाने का क्रेज समय के साथ साथ भारत की युवा पीढ़ियों में बढ़ा है। विदेश जाकर भी अधिकतर भारतीय मजदूरी का कार्य ही करते है, लेकिन वहां उन्हें उस काम की वजह से किसी भी प्रकार का भेद भाव नहीं सहना पड़ता और समाज में इज्जत भी बखूबी मिलती है।

दर्शकों आप यह जानकर अचंभित हो जाएंगे कि भारत में जात-पात आदि भेदभाव को खत्म करने के लिए एक संस्था उमड़ रही है जिसका सहयोग लाखों लोग कर रहे हैं। यह संस्था हर प्रकार के भेद भाव को जड़ से खत्म करने के मिशन को सफल बनाने में जुटी है। इससे सिर्फ मजदूर वर्ग ही नही बल्कि छोटी जाति वालों को भी राहत मिलेगी। इस संस्था से जुड़े लोग आपस मे भेद भाव नहीं करते, सबको एक ही भगवान के बच्चे मानते हैं और सबसे इज्जत से पेश आते हैं। जरूरत पड़ने पर एक दूसरे का साथ देने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।

International Labour Day in Hindi: कोरोना काल मज़दूर बेहाल


पिछले वर्ष कोरोना के चलते बहुत से लोग अन्न के दाने-दाने को तरस गए थे। ऐसे में इस संस्था ने भी सरकार का पूरी तरह साथ दिया और घर घर लोगों तक राशन पहुंचाया, पलायन करते मजदूरों को भोजन करवाया, अपने आश्रम में उन्हें पनाह दी। इस संस्था की सेवाओं से बहुत से मजदूर वर्ग के व्यक्ति भी प्रभावित हुए और संस्था से जुड़े।

Credit: SA News Channel

जिस संस्था के विषय मे हम आपको बता रहे हैं, वो संस्था भारत में बहुत प्रचलित हो रही है। संस्था का नाम है बंदिछोड भक्ति मुक्ति ट्रस्ट, सतलोक आश्रम। इस संस्था के संचालक हैं जगतगुरु तत्वदर्शी सन्त रामपाल जी महाराज जी जो देश ही नही बल्कि दुनिया की भी सभी तरह की सामाजिक बुराइयों को नष्ट करने का भरपूर प्रयत्न कर रहे हैं। जो इनकी शरण मे आएगा वो सभी सामाजिक बुराइयों से दूर सुखी जीवन जियेगा।

अब फिर वही मुश्किल घड़ी चल रही है। ऐसे भयावह समय में मजदूरों को चाहिए की अपने सभी कष्टों का निवारण पाने के लिए जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी की शरण में आकर सर्व सुखदायक परमात्मा कबीर जी की भक्ति करें। कई भविष्यव्यकताओ ने बताया है की इन घोर आपदाओं के बाद 1 हजार वर्षों तक सुवर्णयुग यानी की कलयुग में पुनः सतयुग जैसा माहौल होगा। उस समय लोगों में किसी भी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं किया जायेगा। सभी को समान दृष्टि से देखा जायेगा। भविष्य में मशीनों की बजाय मानवचलित फैक्ट्रियों का चलन किया जाएगा। सभी फैक्ट्रिया मजदूरों के श्रम से चला करेगी और धुआं रहित हो जायेगी। पूरा संसार पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी की भक्ति करेगा और अपने नीजधाम सतलोक जाने का अधिकारी होगा। ऐसे में देश दुनिया के सभी लोगों को बिना समय गवाए संत रामपाल जी महाराज जी से नमदीक्षा लेकर अपना कल्याण करवाना चाहिए।

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