Jallianwala Bagh Massacre Hindi: जलियांवाला बाग हत्याकांड के 102 साल बाद भी नहीं भरे जख्म, हजारों भारतीयों पर हुई थी अंधाधुंध फायरिंग

Jallianwala Bagh Massacre in Hindi: भारत के इतिहास में 13 अप्रैल एक महत्वपूर्ण तारीख है। 102 साल पहले पंजाब में अमृतसर में जालियांवाला बाग हत्याकांड हुआ था। इस हत्याकांड में सैकड़ों-हजारों लोगों की मौत हुई। अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में 484 शहीदों की सूची है, जबकि जलियांवाला बाग में कुल 388 शहीदों की सूची है। अनाधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 1000 से अधिक लोग मारे गए और 2000 से अधिक घायल हुए। इस घटना ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर सबसे अधिक प्रभाव डाला। कहा जाता है कि इसी घटना के बाद से भारत में ब्रिटिश शासन के अंत की शुरुआत हुई। जानिए Jallianwala Bagh Massacre : History, Facts, Quotes, Essay हिंदी में।

Jallianwala Bagh Massacre Hindi History, Facts, Quotes, Essay
Jallianwala Bagh Massacre Hindi History, Facts, Quotes, Essay

13 अप्रैल 1919 में जलियांवाला बाग में अंग्रेजों ने निहत्थे भारतीयों के साथ खूनी होली खेली थी। रौलेट एक्ट का विरोध करने के लिए यहां एक सभा हो रही थी जिसमें जनरल डायर नाम के एक अंग्रेज ऑफिसर ने उस सभा में उपस्थित भीड़ पर गोलियां चलवा दीं। उसने खुद कहा कि 1650 राउंड फायरिंग की गईं।

Jallianwala Bagh Massacre: जान बचाने के लिए कुए में कूदे थे लोग

कुछ ही देर में पूरे बाग में लाशें बिछ गईं। जान बचाने के लिए लोग इधर-उधर भागने लगे। भगदड़ में ही कई लोगों की मौत हुई। एक के ऊपर एक कई लाशें थीं। कुछ लोग जान बचाने के लिए वहां मौजूद एकमात्र कुएं में कूद गए। थोड़ी ही देर में कुआं भी लाशों से पट गया। करीब 10 मिनट तक फायरिंग होती रही और इस दौरान कुल 1650 राउंड गोलियां चलाई गईं। कुए से ही 120 शव मिले। ऐतिहासिक स्वर्ण मंदिर के नजदीक जलियांवाला बाग लोग शांतिपूर्ण सभा के लिए जमा हुए थे। अंग्रेज हुक्मरान ने उन पर ही अंधाधुंध गोलियां बरसाईं। गोलीबारी से घबराई बहुत सी औरतें अपने बच्चों को लेकर जान बचाने के लिए कुएं में कूद गईं।

21 साल बाद ऊधम सिंह जी ने लिया बदला

इस हत्याकांड के समय जलियांवाला बाग में मौजूद रहे उधम सिंह ने 21 साल बाद 1940 में जनरल डायर को लंदन में गोली मारकर बदला लिया। जनरल डायर को मारने के लिए वे लंदन गए। इसके लिए उन्हें लंदन कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी। 31 जुलाई 1940 को लंदन की जेल में उन्हें फांसी दी गई। इस हत्याकांड ने 12 साल के भगत सिंह की सोच पर गहरा प्रभाव डाला था। इस घटना के बाद आजादी हासिल करने की चाहत लोगों में और जोर से उफान मारने लगी। आजादी की चाह न केवल पंजाब बल्कि पूरे देश के बच्चों के सिर चढ़ कर बोलने लगी। उस दौर के हजारों भारतीयों ने जलियांवाला बाग की मिट्टी को माथे से लगाकर देश को आजाद कराने का दृढ़ संकल्प लिया।

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दरअसल, 9 अप्रैल (कुछ स्त्रोतों में 10 अप्रैल) को रोलैट एक्ट का विरोध करने के आरोप में पंजाब के दो बहादुर शेर डाॅ. सत्यपाल एवं डाॅ. सैफुद्दीन किचलू को ब्रिटिश सरकार ने गिरफ्तार कर लिया था, जिसके विरोध में एक शान्तिपूर्ण सभा जलियांवाला बाग में हो रही थी। किसी को अंदेशा नहीं था कि ब्रिटिश हुकूमत अपनी क्रूरता की सारी हदें पार कर देगी। उस सभा में बूढ़े, बच्चें, महिलाएं सभी शामिल थे। जनरल डायर ने इस सभा को अपने आदेशों की अवहेलना मानकर सभा में मौजूद निहत्थे हजारों लोगों पर गोली चलाने का आदेश दे दिया।

Jallianwala Bagh Massacre History in Hindi (इतिहास के दस्तावेजों में दर्ज किस्से)

इतिहास के दस्तावेजों में दर्ज ऐसी अनगिनत किस्से हैं, जिनसे पता चलता है कि उस शाम चारों ओर से बड़ी-बड़ी दीवारों से घिरे जलियांवाला बाग में कितनी जिंदगियों ने मौत की होली खेली थी। दीवारों पर गोलियों के निशान आज भी जनरल डायर की हैवानियत को शिद्दत से बखान करते हैं। कहते हैं बहुत लोगों ने उन दीवारों को लांघने की कोशिश की थी, लेकिन डायर ने सैनिकों की बंदूक उनकी ओर मुड़वा दी थी।

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Jallianwala Bagh Massacre History in Hindi: जनरल डायर के लगभग 50 सैनिकों ने हजारों निर्दोष भारतीयों का कत्ल कर दिया। हंटर कमेटी, जो कि ब्रिटिश सरकार ने इस हत्याकांड की जांच के लिए गठित की थी के सामने डायर ने माना कि उन्होंने लोगों पर मशीनगन का इस्तेमाल किया था। समिति ने डायर पर दोषों का हल्का बोझ डालते हुए कहा की डायर ने कर्तव्य को गलत समझते हुए जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया परंतु जो किया वो निष्ठा से किया। इसके लिए उसे नौकरी से हटाने का दंड दिया गया।

जलियांवाला बाग हत्याकांड की जांच के लिए कांग्रेस ने भी एक समिति की नियुक्ति की जिसे ‘तहकीकात कमेटी’ कहा गया। इसके अध्यक्ष मदन मोहन मालवीय थे और अन्य सदस्यों में महात्मा गांधी, मोती लाल नेहरू, अब्बास तैय्यब जी, सी.आर.दास एवं जयकर थे।

जनलर डायर ने खुद पर हमले की झूठी कहानी बनाई

हत्याकांड के बाद डायर ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को बताया कि उस पर भारतीयों की एक फौज ने हमला किया था। इस हमले से बचने के लिए उसको गोलियां चलानी पड़ीं। लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ डायर ने उसके निर्णय को सही ठहराया। इसके बाद गवर्नर डायर ने अमृतसर और अन्य क्षेत्रों में मार्शल लॉ लगा दिया।

Jallianwala Bagh Massacre: एक दिन पहले ही हो गई थी मार्शल लॉ की घोषणा

13 अप्रैल को बैसाखी के दिन आजादी मांगने वाले आंदोलनकारी जलियांवाला बाग में जमा हो रहे थे। यह खबर मिलते ही पंजाब प्रशासन ने 11 अप्रैल को ही वहां कर्फ्यू लगा दिया था। ब्रिगेडियर जनरल डायर के कमान में सेना की एक टुकड़ी 11 अप्रैल की रात को अमृतसर पहुंची और अगले दिन शहर में फ्लैगमार्च भी निकाला। एक दिन पहले ही यहां मार्शल लॉ की घोषणा भी हो चुकी थी।

सभा शुरू होने तक 10 से 15 हजार लोग जमा हुए थे

आंदोलनकारियों ने जलियांवाला बाग में एक सभा रखी थी, जिसमें कुछ नेता भाषण देने वाले थे। सैकड़ों लोग बैसाखी के मौके पर परिवार के साथ मेला देखने आए थे और सभा की खबर सुनकर वहां पहुंचे थे। सभा के शुरू होने तक वहां 10-15 हजार लोग जमा हो गए थे।

Jallianwala Bagh Hatyakand (massacre) Facts in Hindi

  • ब्रिटिश हुकूमत के अनुसार इस घटना में  200 लोग घायल और 379 लोग शहीद हुए थे
  • Jallianwala Bagh Hatyakand में शहीद होने वालों में 337 पुरुषमहिलाएं, 41 नाबालिग लड़के और एक 6 हफ़्तों का बच्चा था.
  • Jallianwala Bagh Hatyakand का बदला शहीद भगत सिंह और उनके साथी उधम सिंह ने लिया था.
  • इस नर संघार में कुछ लोगो ने कुए में कूद कर भी जान गवाई थी.

Jallianwala Bagh Massacre: अंग्रेज़ों के अत्याचार

आंदोलन के दो नेताओं सत्यपाल और सैफ़ुद्दीन किचलू को गिरफ्तार कर कालापानी की सजा दे दी गई। 10 अप्रैल 1919 को अमृतसर के उप कमिश्नर के घर पर इन दोनों नेताओं को रिहा करने की माँग पेश की गई। परंतु ब्रिटिशों ने शांतिप्रिय और सभ्य तरीके से विरोध प्रकट कर रही जनता पर गोलियाँ चलवा दीं जिससे तनाव बहुत बढ़ गया और उस दिन कई बैंकों, सरकारी भवनों, टाउन हॉल, रेलवे स्टेशन में आगज़नी की गई। इस प्रकार हुई हिंसा में 5 यूरोपीय नागरिकों की हत्या हुई। इसके विरोध में ब्रिटिश सिपाही भारतीय जनता पर जहाँ-तहाँ गोलियाँ चलाते रहे जिसमें 8 से 20 भारतीयों की मृत्यु हुई। अगले दो दिनों में अमृतसर तो शाँत रहा पर हिंसा पंजाब के कई क्षेत्रों में फैल गई और 3 अन्य यूरोपीय नागरिकों की हत्या हुई। इसे कुचलने के लिए ब्रिटिशों ने पंजाब के अधिकतर भाग पर मार्शल लॉ लागू कर दिया।

Jallianwala Bagh Hatyakand (Massacre) Quotes in Hindi

 शेरों- जालियां वाले बाग़ में फसे हिंदुस्तानी।शेर- शहीद-ए-आजम भगत सिंह।

 जलियांवाला बाग हत्याकांड के किस्से ने, अभी भी चैन से न सोने दिया है. आग जो सीने में जाली थी, ठंडा न उसे होने दिया है। 

Credit: BBC Hindi

 

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