Petrol Diesel Price: पैट्रोल और डीज़ल के बढ़ते दाम: कैसे बचें मंहगाई से?

Petrol Diesel Price News Update: आज की पड़ताल में हम पेट्रोल और डीजल के निरंतर बढ़ते दामों पर चर्चा करेंगे और साथ ही भारत देश में बढ़ती महंगाई पर भी एक नज़र डालेंगे। तो चलिए शुरू करते हैं आज की हमारी विशेष पड़ताल।  दोस्तों, यह तकनीकी युग है। जहां पर सब कुछ बिजली ,ईंधन और ऊर्जा पर चलने वाले यंत्रों पर निर्भर करता है। आज एक स्थान से दूसरी जगह पहुंचना, सामान और खाद्य सामग्री पहुंचाना व मदद पहुंचाने में यातायात का ही प्रयोग किया जाता है और यातायात ईंधन का प्रयोग कर चलता है। टेक्नोलॉजी की डेवलपमेंट के चलते अब संचार और यातायात की व्यवस्थाएं पहले के मुकाबले लाख गुना बेहतर और सैकड़ों गुना तेज हो गई हैं। तेज़ और अत्याधुनिक तकनीक और ईंधनों का प्रयोग कर ही यातायात की सुविधाएं संभव हुई हैं। पेट्रोलियम की खोज ने यातायात जगत में अपार संभावनाएं खोल दीं। आज सारा संसार पेट्रोल और डीज़ल से चलने वाले यातायात के साधनों पर निर्भर करता है।

Petrol Diesel Price पैट्रोल और डीज़ल के बढ़ते दाम कैसे बचें मंहगाई से

प्राचीन काल में लोग लंबी लंबी दूरियाँ अधिकतर पैदल ही तय किया करते थे। यातायात के साधन थे नहीं और पैसा भी कम लोगों के पास होता था। अमीर परिवारों की लड़कियों और औरतों को पालकी में घुमाया जाता था और उनकी रक्षा के लिए सेवक घोड़ों पर सवार रहते थे। धीरे धीरे जमींनदार और राज-घराने के सदस्य भी पालकियों का उपयोग करने लगें।

जब तेल की खोज नहीं हुई थी तब यातायात के साधनों में बैल गाड़ी, घोड़ा गाड़ी और तांगा प्रयोग हुआ करता था। यातायात के प्रारंभिक दौर में बैलगाड़ियों का उपयोग पारंपरिक रूप से किया जाता था मुख्यतः भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में। अंग्रेज़ों के आगमन के साथ ही घोड़े, घोड़ा गाड़ियां और ईंधन चालित गाडियां भी इस्तेमाल होने लगीं।

इतिहास गवाह है किफ़र्दिनान्द Verbiest (Ferdinand Verbiest), जो एक चीनी थे उन्होंने पहली भाप द्वारा चलने वाले वाहन का निर्माण सन् 1672 में किया। ये मुमकिन है की वो पहला भाप-वाहन था (‘ऑटो मोबाइल के क्षेत्र में’),उसके बाद 1769 में निकोलस-यूसुफ Cugnot (Nicolas-Joseph Cugnot) को पहली स्वयं चलने वाले मेकेनिकल वाहन या ऑटोमोबाइल को 1769 में बनाने का श्रेय दिया जाता है। इसके बाद वर्ष दर वर्ष मोटर वाहन प्रौद्योगिकी विकास तेजी से चल रहा था और इसका श्रेय दुनिया भर के छोटे और बड़े दोनों निर्माताओं को जाता है।

क्या हैं पेट्रोल–डीज़ल की कीमत बढ़ने के कारण आइए जानते हैं

पेट्रोल, केरोसिन, और डीजल जैसे पेट्रोलियम पदार्थों द्वारा देश दुनिया में यातायात की व्यवस्था को चार चांद लग गए। पिछले कई दशकों से यातायात के साधन को तेल पर निर्भर रहना पड़ रहा है। जनसंख्या वृद्धि के साथ साथ नई नई यातायात व्यवस्थाओं का निर्माण किया जा रहा है। वर्तमान समय में यातायात के साधनों के उत्पादन और मांग में आई तेज़ी के कारण ही पेट्रोल–डीज़ल की डिमांड दोगुनी हो रही है।

हवाई जहाज के ईंधन से भी ज्यादा कीमत है पेट्रोल-डीजल की कीमतों की

पेट्रोल-डीजल की कीमतें एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी हवाई जहाज के ईंधन की कीमतों से भी करीब एक-तिहाई ज्यादा हैं। दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत आज लगभग 105.84 रुपये है। वहीं एक लीटर डीजल का दाम 94.57 रुपये है। मुंबई में पेट्रोल की कीमत 111.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 102.52 रुपये प्रति लीटर है।
दूसरी ओर हवाई जहाज का ईंधन एटीएफ अब वाहन ईंधन से करीब 33 फीसदी सस्ता है। दिल्ली में एविएशन टर्बाइन फ्यूल का भाव 79,020 रुपये प्रति हजार लीटर यानी 79 रुपये प्रति लीटर है। वहीं पेट्रोल का दाम 105.84 रुपये प्रति लीटर है। इस तरह वाहन ईंधन के दाम विमान ईंधन की तुलना में करीब एक-तिहाई ज्यादा हैं।

Petrol Diesel Price: पैट्रोल और डीज़ल के बढ़ते दाम: कैसे बचें मंहगाई से?प्रतिदिन अपडेट होती है पेट्रोल-डीजल की कीमत

अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमत के आधार पर पेट्रोल और डीजल की कीमत प्रतिदिन अपडेट की जाती है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियां कीमतों की समीक्षा के बाद रोज़ पेट्रोल और डीजल के दाम तय करती हैं। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम तेल कंपनियां हर दिन सुबह विभिन्न शहरों की पेट्रोल और डीजल की कीमतों की जानकारी अपडेट करती हैं। साल 2014-15 में पेट्रोल जहां 66 रुपये प्रति लीटर और डीज़ल 50 रुपये प्रति लीटर मिल रहा था, आज लगभग देश के हर एक राज्य में पेट्रोल डीजल के दाम 100 को पार कर चुके हैं। इस समय देश के करोड़पति से लेकर मध्यम और नीचले वर्ग तक सभी का जीवन पेट्रोल–डीजल के दामों से प्रभावित हुआ है पेट्रोल–डीजल दोनों ऐसे ईंधन हैं जिसका उपयोग कम करना या बंद कर देना लोगों के लिए नामुंकिन सा है। 

आखिर पेट्रोल–डीजल की कीमतों में निरंतर बढ़ोतरी क्यों होती आ रही है?

जनवरी 2021 से देखा जा रहा है की पेट्रोल–डीजल की कीमतों में सरकार द्वारा अब तक 22 बार निरंतर बढ़ोतरी की जा चुकी है। देशभर में तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर देश की आम जनता परेशान और बेहाल है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चा तेल का भाव 90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इज़ाफा होना तय है।

Petrol Diesel Price: आगे और बढ़ सकती हैं कीमतें

सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का दाम 86 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। भारतीय बॉस्केट के लिए जो तेल आता है उसमें ब्रेंट क्रूड का बड़ा हिस्सा होता है।आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में जो कीमत चल रही है उसका असर भारतीय बाजार में अगले 25-30 दिन बाद दिखाई देता है। इसका मतलब यह है कि आने वाले दिनों में अभी पेट्रोल-डीजल में और आग लग सकती है।

पेट्रोल के बढ़ते दामों पर सरकार का तर्क

पेट्रोल-डीजल की कीमतें बाजार के हवाले हैं और वह कुछ नहीं कर सकती। यानी अंतरराष्ट्रीय दाम के मुताबिक तेल कंपनियां खुद ही दाम तय करती हैं। लेकिन सच यह भी है कि पेट्रोल-डीजल की कीमत में 50 फीसदी से ज्यादा हिस्सा टैक्सेज का होता है, जिसे केंद्र या राज्य सरकारें कम करने का नाम नहीं ले रहीं।

आम आदमी तक सामान पहुंचते पहुंचते मंहगा क्यों हो जाता है?

कच्चे तेल द्वारा बनाए गए पेट्रोल–डीजल जैसे उत्पादों पर लगने वाले टैक्स घरेलू बाजार में कीमतें बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत जैसे देश में पेट्रोल–डीजल की कीमत बढ़ने के पीछे के प्रमुख कारण को सरकार द्वारा लगाए गए टैक्स को ठहराया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भले ही पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम हों लेकिन उसका असर घरेलू बाजार में इसलिए नहीं होता है क्योंकि आम उपभोक्ता तक पहुंचते-पहुंचते सरकार कई तरह के टैक्स लगा देती है। 

आखिर क्या है पेट्रोल-डीजल की कीमत (Petrol Diesel Price) बढ़ने का फॉर्मूला?

दरअसल, तेल कंपनियां पिछले 15 दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों की एक औसत के हिसाब से दाम तय करती है। यानी जब कच्चे तेल के दाम घटते या बढ़ते हैं तो उसका असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता है। लेकिन जनवरी 2020 से लेकर जनवरी 2021 के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में 13 फीसदी की कमी आने के बावजूद घरेलू बाजार में लोगों ने 13 फीसदी से भी ज्यादा की कीमत चुकाई है। मार्च 2020 में जब दुनियाभर में लॉकडाउन लगा तो कच्चे तेल की कीमत 29 रुपये से घटकर 16 रुपये हो गई लेकिन फिर भी घरेलू बाजार में इसके दाम आसमान छू रहे हैं। सबसे पहले इस पर सरकार उत्पाद शुल्क और उपकर लगाती है, जिससे सरकार को राजस्व मिलता है।

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Petrol Diesel Price News Update: इसके अलावा राज्य सरकारें बिक्री कर या वैट यानी की वैल्यू एडेड टैक्स वसूलती हैं। उसके बाद मालभाड़ा, डीलर कमीशन आदि जुड़ जाता है। इसका मतलब हुआ कि अगर पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर है, तो केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की ओर से लगाए गए टैक्स की कुल रकम 58 है। यानी की यदि सरकार द्वारा लगाए गए सभी टैक्स को हटा दिया जाए तो इसकी कीमत 40 से 45 रुपयों के बीच रह जायेगी। इस तरह आम उपभोक्ताओं तक पहुंचते-पहुंचते पेट्रोल-डीजल महंगा हो जाता है और उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत का फायदा नहीं मिल पाता है। 

आइए अब रुख करते हैं एक्सपर्ट्स व नेताओं के सुझावों पर

कई एक्सपर्ट्स व नेताओं द्वारा पेट्रोल–डीजल को GST के अंतर्गत लेने का प्रस्ताव रखा गया। इसका मतलब बनता है की पेट्रोल–डीजल पर अधिकतम 14 फीसदी कर राज्य सरकारों द्वारा वसूला जा सकता है और 14 फीसदी केंद्र सरकार द्वारा। यदि ऐसा किया जाता है तो वर्तमान के मुकाबले सरकार द्वारा 58% से गिरकर 28% ही टैक्स वसूला जाएगा। जिसके चलते फ्यूल के दामों में 30% तक गिरावट आ सकती है। 

Petrol Diesel Price: लोग हो रहे हैं मंहगाई के शिकार

कई संस्थाओं व एजेंसियों का मानना है की कोरोना महामारी के बाद वैश्विक मंदी और इनफ्लेशन यानी की महंगाई के कारण दुनियाभर के 50 से 70 फीसदी लोगों का जीवन गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। महंगाई की इस भयंकर मार ने आज भारत जैसे देश के आम नागरिक का जीवन खौखला कर दिया है। यातायात सुविधाओं के दाम आसमान छू रहे हैं। बस, रिक्शा, मेट्रो आदि के किराए भी बढ़ गए हैं। यहां तक कि रेल मंत्रालय द्वारा ट्रेनों में जनरल डिब्बों का चलन भी बंद कर दिया गया है। जिसके चलते आम जनता के लिए यातायात का इस्तेमाल करना बहुत महंगा पड़ रहा है। ऐसे में ऑल्टरनेट फ्यूल सोर्स जैसे CNG, LPG और E vehicles की तरफ लोगों का ध्यान केंद्रित हो रहा है। लेकिन अभी देश में इन फ्यूल सोर्सेज के एक स्ट्रांग नेटवर्क की कमी के कारण काफी लोग पेट्रोल–डीज़ल के वाहनों को बदलने से कतरा रहे हैं।

Petrol Diesel Price: देश में इन दिनों त्योहार का समय भी चल रहा है। देश के अधिकतर लोगों के लिए बढ़ती महंगाई की वजह से त्योहारी सीजन में कुछ अतिरिक्त खर्च करना मुश्किल सा हो गया है। पिछले कुछ दिनों में पेट्रोल-डीजल-गैस के साथ साथ खाने के तेल, प्याज, टमाटर और हरी सब्जियों की महंगाई भी सिर चढ़कर बोल रही है। ऐसे में आम लोगों को जेब पर नियंत्रण करना पड़ रहा है। कोरोनावायरस संकट के दौर में जहां अधिकतर लोगों की आमदनी घट गई है, वहीं बढ़ते खर्चों की वजह से उनके लिए त्यौहार की रौनक भी फीकी पड़ने लग गई है। महंगाई बढ़ने और आमदनी घटने के बाद लोगों की स्थिति यह हो गई है कि अब लोग उधारी व कर्ज के तले दबते चले जा रहे हैं। सैकड़ों लोग मेंटल प्रेशर के चलते डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं। 

★बढ़ती महंगाई और ढीली होती जेब की इस विकट स्थिति में भी लोग अपना जीवन शांतिपूर्ण और संतुष्ट कैसे जी सकते हैं? आइए आध्यात्मिक दृष्टिकोण से इसका समाधान खोजने की कोशिश करते हैं-

पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी अपनी अमृतमयी वाणी में कहते हैं;

अगम निगम को खोज ले, बुद्धि विवेक विचार।
उदय-अस्त का राज मिले, तो बिन नाम बेगार।।

भावार्थ है कि पुराने समय में पुलिस थानों में जीप-कार आदि गाड़ियाँ नहीं होती थी। जब पुलिस वालों को कहीं रेड (छापा) मारनी होती तो किसी प्राइवेट थ्री व्हीलर या फोर व्हीलर वाले को जबरदस्ती पकड़ लेते और उसके व्हीकल (थ्री व्हीलर या फोर व्हीलर) में बैठकर जहाँ जाना होता, ले जाते। ड्राईवर भी थ्री व्हीलर वाला होता था तथा पैट्रोल-डीजल भी वही अपनी जेब से डलवाता था। उस दिन की दिहाड़ी भी नहीं कर पाता था। पुलिस वाले उसको सारा दिन इधर-उधर घुमाते रहते थे। आम व्यक्ति तो यह विचार करता था कि ये थ्री व्हीलर वाला आज तो बहुत ज्यादा कमाई करेगा। सारा दिन चला है, परंतु उसका मन ही जानता था। उस दिन उसके साथ क्या बीती होती थी। ऐसे ही राजा लोग इस जन्म में भक्ति ना करके केवल राज्य व्यवस्था को बनाए रखने में जीवन समाप्त कर रहे हैं तो वे बेगार करके जाते हैं। पूर्व जन्म के धर्म-कर्म से राजा बनता है। वर्तमान जन्म में उसी पुण्य को खर्च-खा रहा होता है।

जनता को तो लगता है कि राजा बड़ी मौज कर रहा है। आध्यात्मिक दृष्टि से वह बेगार कर रहा है। भक्ति कमाई नहीं कर रहा है। यदि व्यक्ति पूर्ण गुरू से दीक्षा लेकर भक्ति नहीं करता है तो उसको चाहे उदय-अस्त का यानि पूरी पृथ्वी का राज्य भी मिल जाए तो भी वह थ्री व्हीलर वाले की तरह व्यर्थ की मारो-मार यानि गहमा-गहमी कर रहा है। उसे कुछ लाभ नहीं होना। इसलिए राजा हो या प्रजा, धनी हो या निर्धन, सबको नए सिरे से भक्ति करनी चाहिए। उसी से उनका भविष्य उज्ज्वल होगा।

वर्तमान समय में केवल जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ही एकमात्र पूर्ण संत हैं जो सभी धर्मों के सद्ग्रंथों को खोलकर पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी की सत्य भक्ति साधना बता रहे हैं। देश दुनिया में व्याप्त महंगाई व अन्य सभी समस्याओं का समाधान संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा दी जा रही भक्ति साधना को करने से हो सकता है। फ्रैंच भविष्यवक्ता श्री नास्ट्रेदमस, फ्लोरेंस, किरो, वेजिलेटिन, प्रोफेसर हरार, आदि जैसे कई महान भविष्यव्यकताओं ने अपनी भविष्यवाणियों में कहा है की इक्कीसवीं सदी के उत्रार्थ में एक महापुरुष के सानिध्य में एक आध्यात्मिक संस्था का उत्थान होगा, जिसके सानिध्य में पूरे विश्व में आपसी भाईचार होगा और पृथ्वी स्वर्ग समान सुखमयी स्थान बनेगी। माया की दौड़ समाप्त हो जायेगी। कोई व्यक्ति अधिक धन संग्रह नहीं किया करेगा। रिश्वत, मिलावट, चोरी ,ठग्गी, भ्रष्टाचार
आदि बुराइयां समाप्त हो जायेंगी। जिसके चलते महंगाई भी स्वतः ही खत्म हो जाएगी। अतः इस वीडियो को देखने वाले सभी भाइयों और बहनों से प्रार्थना है की संत रामपाल जी महाराज जी की शरण ग्रहण करके अपने जीवन को धन्य बनाएं।

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