RBI Repo Rate Hike [Hindi]: कर्ज लेना हुआ महंगा, बढ़ जाएगी EMI,आरबीआई ने लगातार चौथी बार 0.50% बढ़ाई रेपो रेट

Repo Rate Hike [Hindi] पिछली बार अगस्त में बढ़ी थी रेपो रेट

RBI Repo Rate Hike [Hindi]: आरबीआई ने रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी करते हुए रेपो रेट को 5.40 फीसदी से बढ़ाकर 5.90 फीसदी कर दिया है. त्योहारी सीजन में आपकी ईएमआई और महंगी हो गई है.  आरबीआई ( RBI) ने लगातार चौथी बार रेपो रेट ( Repo Rate) बढ़ाने का फैसला किया है. आरबीआई ने रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी करते हुए रेपो रेट को 5.40 फीसदी से बढ़ाकर 5.90 फीसदी कर दिया है. आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी की बैठक ( RBI Monetary Policy Meeting) के बाद गर्वनर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) ने ये ऐलान किया है. यानि अब पांच महीने में 1.90 फीसदी की  बढ़ोतरी हो चुकी है. 

RBI Repo Rate Hike [Hindi] | महंगी होगी EMI

आरबीआई के इस फैसले के बाद होम लोन ( Home Loan) से लेकर कार लोन ( Car Loan) और एजुकेशन लोन ( Education) का महंगा होना तय है. वहीं जिन लोगों ने पहले से होम लोन लिया हुआ है उनकी ईएमआई और महंगी हो जाएगी. आरबीआई गर्वनर ने रेपो रेट में बढ़ोतरी का फैसला मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी की तीन दिनों की बैठक के बाद लिया है. 

महंगाई में बढ़ोतरी के चलते लिया फैसला 

28 सितंबर से मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी की बैठक की शुरूआत हुई थी. अगस्त  महीने में खुदरा महंगाई ( Consumer Price Index) दर 7 फीसदी रहा है. जिसके चलते आबीआई को महंगाई पर नकेल कसने के लिए ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला लेना पड़ा है.  

RBI Repo Rate Hike [Hindi] | चौथी बार कर्ज हुआ महंगा

RBI Repo Rate Hike [Hindi] | वित्त वर्ष 2022-23 में आरबीआई महंगाई बढ़ने के बाद लगातार चौथी बार रेपो रेट में बढ़ोतरी करने का फैसला किया है. 4 मई को  रेपो रेट में 40 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर 4.40 फीसदी किया गया इसके बाद 8 जून को 50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की गई इसके बाद अगस्त में फिर से 50 बेसिस प्वाइंट रेपो रेट बढ़ा दिया गया. और 30 सितंबर, 2022 को फिर से रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर दी गई. आरबीआई के इस फैसले के बाद रेपो रेट में 1.90 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है. आरबीआई के लेटेस्ट फैसले के बाद निजी से लेकर सरकारी बैंक कर्ज महंगा कर सकते हैं. 

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महंगाई काबू में आएगी विकास की रफ्तार तेज बनी रहेगी

रुपया टूटा है लेकिन दुनिया के इमर्जिंग मार्केट में इसकी सबसे अच्छी है। उन्होंने आगे कहा कि कच्चा तेल अगले 6 महीने में भारतीय बास्केट के लिए 100 डॉलर के आसपास रहेगा। इससे महंगाई में राहत मिलेगी। अगले साल तक महंगाई 5 प्रतिशत पर आ जाएगी। जीडीपी की रफ्तार बनी रहेगी। 

रिवर्स रेपो रेट का आम आदमी पर ऐसे पड़ता है प्रभाव

जब भी बाजारों में बहुत ज्यादा नकदी दिखाई देती है, आरबीआई रिवर्स रेपो रेट बढ़ा देता है, ताकि बैंक ज्यादा ब्याज कमाने के लिए अपनी रकम उसके पास जमा करा दें। इस तरह बैंकों के कब्जे में बाजार में छोड़ने के लिए कम रकम रह जाएगी।

RBI Repo Rate Hike [Hindi] | पिछली बार अगस्त में बढ़ी थी रेपो रेट

केंद्रीय बैंक आरबीआई ने बीते महीने यानि अगस्त में हुई मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी की बैठक में भी रेपो रेट में इजाफा किया था. पिछली बार भी रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट्स का इजाफा हुआ था. 5 अगस्त को आरबीआई गवर्नर ने रेपो रेट में हुए इजाफे की जानकारी दी थी. जबकि इससे पहले इसी साल मई में आरबीआई ने रेपो रेट में 40 बेसिस प्वाइंट्स का इजाफा किया था.

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RBI Repo Rate Hike [Hindi] | आक्रामक वृद्धि से नये ‘तूफान’ का सामना

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करते हुए कहा कि हम कोविड महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों के नीतिगत दर में आक्रामक वृद्धि से नये ‘तूफान’ का सामना कर रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि मौद्रिक नीति समिति के छह सदस्यों में से पांच ने नीतिगत दर में वृद्धि का समर्थन किया. मुद्रास्फीति की ऊंची दर को देखते हुए मौद्रिक नीति समिति का सूझ-बूझ के साथ मौद्रिक नीति को लेकर उदार रुख को वापस लेने के रुख पर कायम रहने का निर्णय लिया गया है.

बैंक ब्याज दर बढाएंगे जिससे ईएमआई महंगा होगा

मान लीजिए रामकुमार नाम के किसी व्यक्ति ने 6.5% की दर पर बैंक से दस लाख रुपये का लोन 20 साल के लिए लिया है। उसके लोन की ईएमआई फिलहाल 7456 रुपये है। इस तरह उसे 20 साल में बैंक को 6.5% की दर से 7,89,376 रुपये ब्याज के चुकाने होंगे। यानी 10 के लोन के बदले उसे बैंक को 17,89,376 रुपए चुकाने होंगे।

क्या है एसएलआर

स्टेचुटरी लिक्विडिटी रेशियो (Statutory Liquidity Ratio) या एसएलआर (SLR) एक फाइनेंशियल टर्म है। सभी बैंकों को इस टर्म का पालन करना होता है। इससे पता चलता है कि बैंक आम जनता या कारपोरेट जगत को लोन या क्रेडिट देने से पहले कैश (Cash), गोल्ड रिजर्व (Gold Reserve), पीएसयू बांड्स (PSU Bonds) और सिक्योरिटी में कितनी आरबीआइ के पास राशि रखेंगे।

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