विश्व कैसे बनेगा बलात्कार और अपराध मुक्त?

नमस्कार दर्शकों! ‘खबरों की खबर का सच’ के स्पेशल कार्यक्रम में आप सभी का एक बार फिर से स्वागत है। इस बार हम देश दुनिया में न थमने वाले बलात्कार की घटनाओं पर चर्चा करेंगे और साथ ही एक ऐसे बेजोड़ उपाय के बारे में भी जानेंगे जिस से देश दुनिया में होने वाली बलात्कार की वारदातों पर सदा के रोक लगाई जा सकती है।

भारत में कहने मात्र के लिए स्त्री को देवी का रूप माना जाता है

यहाँ नारी सम्मान, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ आदि के झूठे नारे लगाए जाते हैं। वर्तमान समय में देश में समाज का चेहरा अति भयानक हो गया है। समाज से घिनौनेपन, हैवानियत, निर्लजता, धोखाधड़ी, चोरी, भ्रष्टाचार , बलात्कार और नशाखोरी की बूं आने लगी है। यहाँ एक दिन की नवजात बच्ची से लेकर सत्तर साल की बुढ़िया और जानवरों तक की असमत खतरे में है। स्थिति अति भयावह हो चुकी है यहाँ घर के आंगन में खेल रही बच्ची,पड़ोस से पानी भरने गई बच्ची,बकरियां चराने गई बच्ची, स्कूल से लौट रही बच्ची, अंकल के साथ खेल रही बच्ची, पालने में झूल रही बच्ची , मां के साथ जंगल से घास लेने गई बच्ची, दोस्त के साथ टहल रही लड़की या अन्य कोई बहन बेटी भी सुरक्षित नहीं है। हर उम्र की बच्चियों और औरतों के लिए समाज में न दिखाई देने वाला डर व्याप्त है। समाज समझ नहीं पा रहा है कि आखिर इस पुरुष प्रधान समाज में बलात्कार के घिनौने कृत्यों पर अंकुश कैसे लगाया जाए।

देश दुनिया में बलात्कार के बढ़ते कारण

विकृत मन और विकारी दिमाग कहीं भी किसी भी संस्कृति में पनप सकता है। भारत की अधिकतर जनसंख्या सिनेमा से प्रभावित है और इसे अपने जीवन का अभिन्न अंग भी मानते हैं। गरीब और अमीर दोनों मनोरंजन के लिए सिनेमा,टेलीविजन, रेडियो, समाचार पत्रों पत्रिकाओं और अब मोबाईल फोनों पर निर्भर हैं। भद्दा सिनेमा गरीब तबके के मनोरंजन की कमी को पूरा करता है। कम वस्त्र, खुलापन,अधिक धन – एशोआराम और नशा अमीर व्यक्तियों के मनोरंजन को सौ गुणा बढ़ा देता है। अमीर व्यक्ति पाश्चात्य सभ्यता को माडर्न लाइफस्टाइल में शामिल कर चुके हैं। जहाँ लड़के लड़कियों का खुलापन और मेलजोल टेलीविजन पर मनोरंजक फिल्मों और टेलिसीरियलों में दिखाया जाता है जिसका प्रभाव समाज के सभी तबकों पर असर डालता है।

बलात्कार के मामलों को बढ़ावा देने में बॉलीवुड – हॉलीवुड और वहाँ पर काम करने वाले सेलिब्रिटियों की भूमिका

ऐसा इसलिए क्योंकि फिल्मों के द्वारा परोसी जाने वाली अश्लीलता ने लोगों की सोच को विकृत कर दिया है। बालीवुड हिरोइनें जिस तरह के कपड़े फिल्मों में और निजी जीवन में पहनती हैं इसने लोगों की सोच को बहुत ही गंभीरता से प्रभावित किया है। फिल्म स्टारों के गिरते चरित्र ने समाज की सोच का पतन कर दिया है। इरोटिक सीनस scenes और पोरनोग्राफिक कंटेंट को बच्चों के एनिमेटेड शोज़, विज्ञापनों, फिल्मों और गानों में भी दिखाया जाता है जो कि बच्चों,किशोरों और व्यस्कों की मानसिकता को शत प्रतिशत प्रभावित करता है।

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बॉलीवुड में अश्लील और अभद्र पहनावे का प्रदर्शन बड़े ही आमतौर से किया जाता है। जैसे सबकुछ चलता है । समाज को अश्लीलता के गर्त में मेल और फिमेल दोनों अभिनेताओं ने गिराया है। समाज का चरित्र पतन करने में बालीवुड और होलीवुड दोनों की भागीदारी बराबर की है। जिसका हरजाना हमारी बहन बेटियां अपने बलात्कार से भर रही हैं। संस्कार: आध्यात्मिक ज्ञान की कमी की वजह से लोगों का चारित्रिक पतन हो रहा है। अच्छे संस्कारों की कमी के चलते समाज में रहने वाले लोग आसानी से कुमार्ग पर चले जा रहे हैं।

देश दुनिया में होने वाले बलात्कार के आंकड़ों पर एक नज़र

राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार 2019 में राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य पद्रेश और हरियाणा में सबसे ज्यादा सामूहिक बलात्कार के अपराध हुये। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो NCRB के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2020 में बलात्कार के 4,05,861 मामले सामने आए, NCRB के मुताबिक, इनमे से 7.9% यानी 32,063 बलात्कार के केस दर्ज किए गए, इनमें हर दिन औसतन 87 मामले बलात्कार के होते थे। लगभग 94 प्रतिशत मामलों में आरोपी पीड़ितों के परिचित- परिवार के सदस्य, दोस्त, सह जीवन साथी, कर्मचारी या अन्य थे।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि भारत में प्रतिदिन लगभग 50 बलात्कार के मामले थानों में पंजीकृत होते हैं। इस प्रकार भारतभर में प्रत्येक घंटे दो महिलाएं बलात्कारियों के हाथों अपनी अस्मत गंवा देती हैं, लेकिन आंकड़ों की कहानी पूरी सच्चाई बयां नहीं करती। बहुत सारे मामले ऐसे हैं, जिनकी रिपोर्ट ही नहीं हो पाती।

विश्व स्वास्थ संगठन के एक अध्ययन के अनुसार, ‘भारत में प्रत्येक 54वें मिनट में एक औरत के साथ बलात्कार होता है।’ वहीं महिलाओं के विकास के लिए केंद (सेंटर फॉर डेवलॅपमेंट ऑफ वीमेन) अनुसार, ‘भारत में प्रतिदिन 42 महिलाएं बलात्कार का शिकार बनती हैं। इसका अर्थ है कि प्रत्येक 35वें मिनट में एक औरत के साथ बलात्कार होता है।’

विश्वभर में औरतों के साथ हो रहे बलात्कार के आंकड़े

यौन हिंसा किसी एक देश की महिलाओं की समस्या नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया की महिलाएं इस समस्या से जूझ रही हैं। पिछले कुछ सालो में अमेरिका, कनाडा, स्वीडन और ब्रिटेन जैसे सबसे विकसित देशों में रेप की सबसे ज्‍यादा घटनाएं हुई। दुनिया भर में करीब 36 फीसदी महिलाएं शारीरिक यौन हिंसा की शिकार बनी हैं। अमेरिका में 12 से 16 साल की 83 फीसदी लड़कियों का किसी ना किसी रूप में यौन उत्पीड़न किया गया है। इंग्लैंड में हर 5 में एक महिला किसी न किसी रूप में यौन हिंसा का शिकार हुई हैं। दक्षिण अफ्रीका रेप की घटनाओं के मामले में दुनिया में सबसे ऊपर है। यहां हर दिन औसतन 1400 रेप की घटनाएं होती हैं। इनमें करीब 20 फीसदी घटनाओं में पुरुष भी शिकार बनते हैं। दक्षिण अफ्रीका में हर साल 5,00,000 रेप की घटनाएं होती हैं। दक्षिण अफ्रीका की 40 फीसदी से ज्‍यादा महिलाएं अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार रेप की शिकार होती हैं। वहीं कनाडा जैसे देशों में तो 80 फीसदी दिव्‍यांग भी यौन हिंसा का शिकार बनते है।

पुलिस अधिकारियों और न्यायालय की प्रतिक्रिया

अधिकारियों की मानें तो इनमें से अधिकांश मामले बेहद तकनीकी होते हैं। अक्सर ऐसे अपराध दोस्तों या रिश्तेदारों द्वारा किए जाते हैं, जो पीड़िता को झूठे वादे कर बहलाते हैं, फिर गलत काम करते हैं। कई बार ऐसे अपराध अज्ञात लोग करते हैं और पुलिस की पहुंच से आसानी से बच निकलते हैं। सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि बलात्कार से पीड़ित महिला बलात्कार के बाद स्वयं अपनी नजरों में ही गिर जाती है, और जीवनभर उसे उस अपराध की सजा भुगतनी पड़ती है, जिसे उसने नहीं किया। (एजेंसियां)

भारत में बलात्कार के कानूनों की समीक्षा

यौन हिंसा के कानूनों की समीक्षा करने के लिए बनाई गई वर्मा कमेटी ने भी साफ किया कि, “बलात्कार हुआ है या नहीं, ये एक कानूनी पड़ताल है, मेडिकल आकलन नहीं”. निर्भया सामूहिक बलात्कार और हत्या के सनसनीखेज मामले से उपजे जनाक्रोष के बाद संसद ने भारतीय दंड संहिता में बलात्कार से संबंधित कानूनी प्रावधानों में व्यापक संशोधन कर इनमें अधिक कठोर सजा के प्रावधान किये। लेकिन इसके बावजूद महिलाओं के प्रति होने वाले इन जघन्य अपराधों में कमीं नहीं आई बल्कि यह बिना रूके बढ़ते ही जा रहे हैं। देश में अप्रैल 2013 से लागू नये प्रावधानों के तहत सामूहिक बलात्कार जैसे अमानुषिक और घृणित अपराध के लिये न्यूनतम 20 साल और अधिकतम उम्र कैद की सजा का प्रावधान किया गया। सामूहिक बलात्कार और हत्या के अपराध में दोषियों के लिये मौत की सजा तक का प्रावधान है।

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लेकिन हाल के वर्षो में सामूहिक बलात्कार क बढ़ते अपराधों को देखते हुये यह महसूस किया जा रहा है कि कानून में इसके लिये मौत की सजा का प्रावधान किया जाना उचित होगा। इसकी एक वजह यह है कि सामूहिक बलात्कार की शिकार महिला की अगर जान बच गयी तो उसे जीवन भर शारीरिक वेदना के साथ ही मानसिक अवसाद से भी रूबरू होना पड़ता है।

कानून की धारा के तहत बलात्कार एक दंडनीय अपराध है

IPC की धारा 375 में बलात्कार को परिभाषित किया गया तथा इसे एक दंडनीय अपराध की संज्ञा दी गई है। IPC की धारा 376 के तहत बलात्कार जैसे अपराध के लिये न्यूनतम सात वर्ष तथा अधिकतम आजीवन कारावास की सज़ा का प्रावधान किया गया है। IPC के तहत बलात्कार की परिभाषा में किसी पुरुष द्वारा किसी महिला की इच्छा या सहमति के विरुद्ध बनाया गया शारीरिक संबंध, जब हत्या या चोट पहुँचाने का भय दिखाकर दबाव में संभोग के लिये किसी महिला की सहमति हासिल की गई हो, 18 वर्ष से कम उम्र की किसी महिला के साथ उसकी सहमति या बिना सहमति के किए गए संभोग को शामिल किया जाता है। आइए अब आपको देश दुनिया से बलात्कार जैसे जघन्य और घिनौने अपराध को सदा के लिए समाप्त करने के बारे में बताते हैं।

Credit: SA News Channel

तत्वज्ञान में हर अपराध ,विकारों और रोगों को खत्म करने का उपाय

आध्यात्मिक ज्ञान की जानकारी प्राप्त करने से ही मानव चरित्रवान व विकार रहित बन सकता है। चरित्रवान व्यक्ति से ही समाज का उत्थान संभव है। पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी द्वारा बताए गए संविधान अनुसार सभी जीवों को चाहिए की सभी स्त्रियों को उनकी उम्र के हिसाब से अपनी मां, बहन, या बेटी समान समझें और देखें। इसी विषय में पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी कहते हैं,

पर नारी को देखिए, बहन बेटी के भाव, कहे कबीर काम नाश का, यही सहज उपाय।।

पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी के वर्तमान अवतार जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी अपने सत्संगों के माध्यम से हमें परमात्मा का संविधान समझाते हुए बताते हैं कि पराई स्त्री को बुरी नज़र से देखना एक जघन्य अपराध है।

इसी विषय में गरीबदास जी महाराज जी भी अपनी अमृतवाणी में बताते हैं,

सुरापान मद्य मांसाहारी, गमन करै भोगैं पर नारी। सत्तर जन्म कटत हैं शीशं, साक्षी साहिब है जगदीशं।।

पर द्वारा स्त्री का खोलै, सत्तर जन्म अंधा हो डोलै। मदिरा पीवै कड़वा पानी, सत्तर जन्म श्वान के जानी।।

अतः इस वीडियो को देखने वाले सभी भाई बहनों को चाहिए की सभी बहन, बेटी और माताओं की शारीरिक सुरक्षा और समाज के सर्वांगीण विकास हेतु जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी की शरण में जाकर अपने को विकार रहित बनाएं क्योंकि केवल ऐसे ही बनेगा विश्व बलात्कार और अपराध मुक्त ।

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