कहीं भारत की स्थिति श्री लंका जैसी न हो जाए

महंगाई की मार कहीं भारत की स्थिति श्री लंका जैसी न हो जाए

महंगाई की मार: नमस्कार दर्शकों! खबरों की खबर का सच स्पेशल कार्यक्रम में आप सभी का एक बार फिर से स्वागत है। आज के का्र्यक्रम में हम देश दुनिया में बेकाबू होती महंगाई के बारे में चर्चा करेंगे और साथ ही इससे देश दुनिया के लोगों पर होने वाले प्रभाव के बारे में भी जानेंगे।

दोस्तों! देश दुनिया में पिछले दो सालों से बहुत कुछ घटित हुआ है। पूरा विश्व इस समय गहरी उठापटक से गुज़र रहा है। भारत भी अन्य देशों की तरह निरंतर समस्याओं से जूझ रहा है। हाल ही के सालों में भारत में कभी नोट बंदी, तो कभी कोरोना महामारी, कभी किसान आंदोलन, तो कभी भारत सीमा में चीनी सैना की घुसपैठ, कभी CAA पर विवाद, तो कभी कश्मीर में उठती अंशाति। इन सभी और अनेकों कठिनाइयों का भारत और भारत की जनता ने बीते कुछ समय में एक के बाद एक सामना किया है।

वर्तमान समय में भारत के सामने “महंगाई” सबसे बड़ी चुनौती के रूप में उबर रही है। दिन प्रतिदिन बेकाबू हो रही महंगाई आज देश की आम जनता के लिए एक चिंता का विषय बनी हुई है। सब्जी की दुकान से लेकर पेट्रोल पंप तक हर कोई महंगाई पर चर्चा कर रहा है। हाल ही के दिनों में अधिकतर सभी चीजों के दामों बढ़ोतरी हुई है।

बढ़ती महंगाई के कारण रसोई के सामान एवं रोजमर्रा की अन्य सभी जरूरी वस्तुओं के साथ-साथ पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतों ने आम आदमी की जिंदगी को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। आज समाज का लगभग हर वर्ग अपने बजट में संतुलन साधने में बेहाल है। एक तरफ सब्जियों के भाव बड़ गए हैं तो दूसरी तरफ पिछले एक महीने में पेट्रोल और डीजल की कीमत में 10 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ चुके है। इसके अलावा, पिछले कुछ दिनों में रसोई गैस सहित अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में भी भारी वृद्धि देखी गई है, जिससे लोगों की परेशानी और अधिक बढ़ गई है। पिछले एक महीने में सीएनजी की कीमत में हुई 10 रुपये प्रति किलो की वृद्धि के कारण ऑटो और कैब चालकों ने 18 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की धमकी दी है। देश में कई जगह ‘सीएनजी अब 95 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक दर पर मिल रही है। ऑटो और कैब चालकों का कहना है की “हम सरकार से सीएनजी पर 35 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से सब्सिडी देने की मांग करते हैं ताकि हम जिंदा रह सकें। अगर हमारी मांगें पूरी नहीं की गईं तो हम 18 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।”

सब्जियों के बढे़ दाम से लोग हैं परेशान

रिटेल मार्केट में तोरई का भाव 100 रुपये प्रति किलोग्राम, भिंडी की कीमत 100 रुपये प्रति किलोग्राम और करेले का दाम 100 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुका है। नींबू के दाम आसमान छू रहे हैं। इसकी कीमत 300-400 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुकी है। यहां तक की जीरा, धनिया और मिर्ची तक के रेट में 40 से 60 फीसदी तक का उछाल देखने को मिला है। वहीं, Beans का भाव 120 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। फूल गोभी 80 रुपये प्रति किलोग्राम पर बिक रही है हालांकि, आलू और प्याज की कीमत अभी कंट्रोल में है, जिससे आम लोग थोड़े रिलीफ में हैं।

Also Read: Sri Lanka Crisis News [Hindi]: क्या है श्री लंका में गहराया आर्थिक संकट?

आम लोगों की परेशानियां सब्जियों की बढ़ती कीमतों में तेजी तक सीमित नहीं है। दूध की कीमत ने भी आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पिछले महीने से Amul और Mother Dairy के दूध 2 रुपए प्रति लीटर तक महंगे हो चुके है। पिछले कुछ दिनों में स्टील की कीमतों में 2,500 से 3,000 रुपये प्रति टन का उछाल देखने को मिला है। इससे मैन्यूफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन की लागत बढ़ी है। वहीं, स्टील के महंगे होने से साइकिल की कीमतों में 30 से 35 फीसदी तक की बढ़त देखने को मिली है। रूस स्टील के बड़े उत्पादकों में से एक है और रूस-यूक्रेन युद्ध का सप्लाई पर बहुत असर देखने को मिला है।

महंगाई की मार: क्या मंहगाई बढ़ाने का सारा दोष सरकार का है?

आवश्यक वस्तुएं एवं पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि के विरोध में कई लोग प्रदर्शन और धरना कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान सरकार विरोधी नारे भी लगाए गए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि ‘पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस, खाद्य तेल सहित अन्य आवश्यक वस्तुओं और सामग्रियों के मूल्य में बेतहाशा वृद्धि हुई है। इसके लिए केंद्र और प्रदेश की सरकार जिम्मेदार है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में कमी आई है। इसके बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत कम नहीं हो रही है। पड़ोसी देश नेपाल, बांग्लादेश आदि को भारत के माध्यम से तेल मुहैया कराया जाता है। उसके बावजूद भी भारत की स्थिति उन देशों के मुकाबले बहुत ही बदतर है। उन्होंने कहा कि अगर बे–लगाम हुई केंद्र सरकार पर जनता द्वारा जल्द ही लगाम नहीं लगाया गया तो देश की स्थिति श्रीलंका जैसी हो जाएगी। “

देश में बढ़ रही मंहगाई और अशांति से निपटने के लिए देश की जनता व सरकार को क्या करना चाहिए?

अनादि काल से ही मानव परम शांति, सुख व अमृत्व की खोज में लगा हुआ है। वह अपने सामर्थ्य के अनुसार प्रयत्न करता आ रहा है लेकिन उसकी यह चाहत कभी पूर्ण नहीं हो पा रही है। ऐसा इसलिए है कि उसे इस चाहत को प्राप्त करने के मार्ग का पूर्ण ज्ञान नहीं है। सभी प्राणी चाहते हैं कि कोई कार्य न करना पड़े, खाने को स्वादिष्ट भोजन मिले, पहनने को सुन्दर वस्त्र मिलें, रहने को आलीशान भवन हों, घूमने के लिए सुन्दर पार्क हों, मनोरंजन करने के लिए मधुर संगीत हों, नांचे-गांए, खेलें-कूदें, मौज-मस्ती मनाएं और कभी बीमार न हों, कभी बूढ़े न हों और कभी मृत्यु न होवे परंतु जिस संसार में हम रह रहे हैं यहां न तो ऐसा कहीं पर नजर आता है और न ही ऐसा संभव है। धन और संपत्ति जोड़ने की आड़ में लोग रिश्वत, मिलावट, जमाखोरी आदि चीजों का लागत से अधिक मूल्य लेकर अधिक धन संग्रह करने का प्रयत्न करते हैं ।

दोस्तों! वर्तमान समय में देश दुनिया में व्याप्त सभी प्रकार की सामाजिक बुराइयां जैसे चोरी, जारी, दुराचार, रिश्वत, डकैती, मिलावट, नशा, भ्रष्टाचार, दहेज प्रथा, आदि को जड़मूल से समाप्त करने के लिए वर्तमान समय में जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज दिन रात प्रयत्न कर रहे हैं। संत जी के सानिध्य में उनके लाखों अनुयाई समाज सुधार के इस अनमोल कार्य में अपना अहम योगदान दे रहे है।

संत रामपाल जी महाराज अपने अमृत सत्संगों में बताते हैं की किसी भी चीज़ का मूल्य उसकी कुल लागत के अनुसार तय करना चाहिए। किसी भी वस्तु का नाजायज़ मूल्य लेने से उस व्यापारी या विक्रेता को अत्यधिक हानी होती है। माया की इस अंधी दौड़ में और रातों रात करोड़पति बनने के चक्कर में आज कल लोग 10 गुना तक या उससे भी अधिक मार्जिन रखकर प्रॉफिट की वसूली कर रहे हैं। संत जी बताते हैं की आध्यात्मिक ज्ञान हीन प्राणी ही ऐसी गलती कर सकता है। ऐसे लोग नहीं जानते की ऐसे प्राप्त किए धन का भुगतान किस तरह के कष्ट व यातनाएं भूगतने के पश्चात देना ही पड़ता है। तत्वज्ञान से परिचित प्राणी परमात्मा से डरकर सभी कार्य करता है।

■ Also Read: Sri Lanka Emergency Crisis: श्रीलंका में क्यों लगाना पड़ा आपातकाल?

ऐसे व्यक्ति अधिक धन संग्रह की इच्छा नहीं रखते और परमात्मा जो देते हैं उसी में राज़ी रहते हैं। ऐसे ही अनेकों अमृत सत्संगों का समावेश संत रामपाल जी महाराज द्वारा लिखित अनमोल पुस्तक “जीने की राह” में है। यदि विश्व के सभी प्राणी इस अनमोल पुस्तक को पढ़कर उसमें लिखी हर एक बात पर अमल करें तो देश दुनिया से महंगाई स्वतः ही समाप्त हो जायेगी क्योंकि लालच ही मंहगाई का मूल कारण है। इस कार्यक्रम को देखने वाले सभी दर्शकों से निवेदन है कि ‘जीने की राह’ पुस्तक मुफ्त में प्राप्त करने के लिए कृप्या #7496 8018 25 पर अपना नाम, पता और मोबाइल नंबर लिखकर भेंजें।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

five × 2 =