Sri Lanka Crisis News: क्या है श्री लंका में गहराया आर्थिक संकट?

Sri Lanka Crisis News क्या है श्री लंका में गहराया आर्थिक संकट

Sri Lanka Crisis News: नमस्कार दर्शकों! खबरों की खबर का सच कार्यक्रम में आप सभी का स्वागत है। आज के कार्यक्रम में हम हमारे पड़ोसी देश श्रीलंका पर आए आर्थिक संकट और वहां फैली भुखमरी पर चर्चा करेंगे और कार्यक्रम के अंत में किसी भी देश की आर्थिक कंगाली ,बदहाली और वहां से हो रहे लोगों के पलायन को सदा के लिए रोकने का समाधान भी जानेंगे।

दोस्तों! श्रीलंका, जिसे पहले सीलोन के नाम से जाना जाता था और आधिकारिक तौर पर डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट रिपब्लिक ऑफ श्रीलंका, दक्षिण एशिया में एक द्वीप देश है। यह हिंद महासागर में, बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम में और अरब सागर के दक्षिण-पूर्व में स्थित हैै।

वर्तमान समय में चीनी कर्ज के जाल में फंसकर द्विपीय देश श्रीलंका में हालत हर दिन के साथ बदतर होते जा रहे हैं। यहां का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग खत्म हो चुका है तो वहीं महंगाई इतिहास के सभी रिकॉर्ड तोड़ती जा रही है। डॉलर के मुकाबले श्रीलंकाई मुद्रा बुरी तरह से टूट चुकी है। कोविड-महामारी की मार से उबर पाने से पहले ही सोने की लंका दिवालिया होने की कगार पर पहुंच चुकी है। इस समय 292.50 श्रीलंकाई रुपया मतलब 1 डॉलर हो गया है । 70% से ज़्यादा विदेशी मुद्रा भंडार खाली हो गया है ।
17.5% महंगाई दर के साथ यह एशिया का सबसे महंगाई वाला देश बन गया है और आइए आगे जानते हैं क्या हैं इस समय देश के भीतर हालात?

श्रीलंका सरकार ने हाल ही में वहां “आर्थिक आपातकाल” की स्थिति घोषित की है। यह देश कई महीनों से भयानक खाद्य संकट से जूझ रहा है। श्रीलंका के पास ईंधन, खाद्य पदार्थों, दवाओं, रसोई गैस, दूध के पाउडर आदि जैसी और अन्य दैनिक आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति जारी रखने के लिए भी धन नहीं है। श्रीलंका में विदेशी मुद्रा की कमी के कारण ईंधन और रसोई गैस जैसी आवश्यक चीजों की गहन कमी हो गई है। बिजली कटौती दिन में 13 घंटे तक की जा रही है। सेंट्रल बैंक ऑफ श्रीलंका के अनुसार, जनवरी में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 2.36 अरब डॉलर रह गया था। करीब 2.2 करोड़ आबादी वाले इस देश में पेट्रोल-डीजल समेत अन्य ईंधन की भारी किल्ल्त हो रही है। जबकि, महंगाई बेहिसाब बढ़ रही है। इससे श्री लंकावासियों के सामने खाने का विकराल संकट पैदा हो गया है।

Sri Lanka Crisis News: छात्रों की परीक्षाएं की गई रद्द

श्रीलंका के स्कूलों में छात्रों की परीक्षाएं अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई है क्योंकि अधिकारियों के पास परीक्षा लेने के लिए पर्याप्त कागज और स्याही नहीं है।
कारों, सैनिटरी आइटम, कुछ इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के आयात पर सीधे प्रतिबंध लगा दिया गया है। श्री लंका में चावल, चीनी और मिल्क पाउडर तक के दाम कई गुणा बढ़ रहे हैं।

लोग कर रहे हैं पलायन

वर्ल्ड बैंक का अनुमान है कि महामारी की शुरुआत से पांच लाख लोग गरीबी रेखा से नीचे आ गए हैं। रोजगार न होने के कारण मजबूरी में लोगों को देश भी छोड़ना पड़ रहा है। खाने की तंगी और बेरोजगारी श्रीलंका के लोगों को भारत आने के लिए मजबूर कर रही है। श्रीलंका के आर्थिक संकट का असर दक्षिणी भारत के तटीय हिस्सों, विशेष रूप से तमिलनाडु में महसूस किया जा रहा है, जिसमें द्वीपीय राष्ट्र के उत्तरी भाग से तमिल शरणार्थी दक्षिणी राज्य की ओर आ रहे हैं।

Sri Lanka Crisis News: मंहगाई के साथ गृहयुद्ध के बादल छा रहे हैं

देश को आर्थिक मंदी के दौर में धकेलने के कसूरवार माने जाने वाले राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के इस्तीफे की मांग को लेकर बृहस्पतिवार को उनके आवास के सामने सैकड़ों की संख्या में जमा हुए प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और पानी की बौछार की। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि सरकार के कुप्रबंधन के कारण विदेशी मुद्रा संकट और गंभीर हो गया है। प्रदर्शनकारियों ने राजपक्षे सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। घटते विदेशी मुद्रा भंडार, बेतहाशा बढ़ती क़ीमतों और भोजन सामग्री की कमी के कारण लोगों का जीवन बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश के अंदर महंगाई के कारण फैल रही अराजकता को रोकना है, अन्यथा आर्थिक संकट के कारण श्रीलंका में गृहयुद्ध की आशंका बनी हुई है।

क्यों बना श्री लंका आर्थिक मंदी का शिकार?

कोरोना महामारी, विभिन्न परियोजनाओं के लिए विदेशों से उधार लेने की हड़बड़ी (विशेष कर चीन से) और राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के रातों-रात कृषि क्षेत्र में “शत प्रतिशत जैविक खेती” शुरू करने का फैसला, श्री लंका की वर्तमान स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। गोटाबाया ने देश के कृषिविदों और वैज्ञानिकों से परामर्श किए बिना, देश की कृषि में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया। विशेषज्ञों का कहना है कि वैचारिक दृष्टि से ‘जैविक खेती’ की शुरुआत की घोषणा करना एक बात है और इस पर अमल करना कठिन । इसके लिए वैज्ञानिक तरीकों से विभिन्न स्तर पर लागू करने की आवश्यकता होती है। नतीजतन, श्रीलंका के कृषि क्षेत्र को अभूतपूर्व फसल विफलता का सामना करना पड़ा और देश को खाद्यान्न की कमी से जूझना पड़ा। अब हालात ये है कि एक साल में खाद्यान्न उत्पादन घटकर एक चौथाई रह गया है।

दूसरी ओर, श्रीलंका में कोरोनावायरस महामारी ने श्रीलंका के महत्वपूर्ण विदेशी मुद्रा अर्जन क्षेत्र, पर्यटन क्षेत्र को लगभग नष्ट कर दिया। इलायची और दालचीनी, श्रीलंका की निर्यात आय के दो अन्य प्रमुख स्रोत भी महामारियों से बुरी तरह प्रभावित हुए । इससे श्रीलंका की विदेशी आय घटी है। इसके साथ ही 2009 से श्रीलंका विदेशी ऋण लेकर विभिन्न अनियोजित परियोजनाओं को शुरू करने की अंतिम कीमत अब चुका रहा है।

Sri Lanka Crisis News: महंगाई ने लोगों की कमर तोड़ दी है

आर्थिक मंदी को लेकर सरकार और अर्थशास्त्री चिंतित हैं। इस स्थिति से उबरने के लिए श्रीलंका ने चीन, भारत और खाड़ी के देशों से भी मदद मांगी है।

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हाल ही में भारत ने श्रीलंका को 50 करोड़ डॉलर का कर्ज दिया था। वहीं जल्द ही वह चीन से एक 2.5 अरब डॉलर का कर्ज लेने की तैयारी में है। इससे पहले भी सिर्फ चीन का ही श्रीलंका पर लगभग 5 अरब डॉलर का कर्ज है। श्रीलंका आयात पर बहुत ज्यादा निर्भर है यह भी यहां आई मंदी का विशेष कारण है।

Sri Lanka Crisis News: श्री लंका पर है भारी क़र्ज़

श्रीलंका के वित्त मंत्री बासिल राजपक्षे ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि उनके देश पर जो क़र्ज़ है वो मुख्य तौर पर तीन देशों का है – चीन, भारत औरत जापान।
उनके देश को चीन का 5 खरब अमेरिकी डालर का क़र्ज़ पहले से ही चुकाना था और उस पर श्रीलंका को एक अरब अमेरिकी डालर का अतिरिक्त क़र्ज़ पिछले साल ही लेना पड़ा है ताकि मौजूदा वित्तीय संकट से निपटा जा सके। पत्रकारों के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा: “इस साल हमें लगभग 7 खरब अमेरिकी डालर का क़र्ज़ चुकाना है। ये सिर्फ़ चीन का नहीं बल्कि भारत और जापान का भी है।”

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देश में डॉलर की कमी ने सभी क्षेत्रों को प्रभावित किया है। देश में फरवरी में महंगाई 17.5 प्रतिशत के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई जो कि पूरे एशिया में सबसे ज्यादा है। श्रीलंका में संकट कितना गहरा है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले श्रीलंकाई रुपया सिर्फ मार्च महीने में भी अब तक 45 फीसदी टूट चुका है।

श्री लंका की आयात पर निर्भरता अधिक

श्रीलंका में अधिकतर समान बाहर के देशों से आयात किया जाता है। लेकिन देश में विदेशी मुद्रा की कमी के चलते देश के पास आवश्यक वस्तुओं को आयात करने के लिए पैसे नहीं हैं। श्रीलंका अपने आयात पर बहुत अधिक निर्भर है और आवश्यक वस्तुओं के अलावा वह पेट्रोलियम, भोजन, कागज, चीनी, दाल, दवाएं और परिवहन उपकरण भी आयात करता है। आयात इतना आवश्यक है कि सरकार को लाखों स्कूली छात्रों के लिए परीक्षा रद्द करनी पड़ी क्योंकि उसके पास कागज की छपाई खत्म हो गई थी।

Sri Lanka Crisis News: पेट्रोलियम जनरल एम्प्लाइज यूनियन के अध्यक्ष अशोक रानवाला के अनुसार, श्रीलंका में स्थिति इतनी गंभीर है कि सरकार को अपनी एकमात्र ईंधन रिफाइनरी में परिचालन स्थगित करना पड़ा क्योंकि यह कच्चे तेल के भंडार से बाहर हो गया था। इसके अलावा श्रीलंका में दूसरे सबसे बड़े गैस आपूर्तिकर्ता, लॉफ्स गैस कंपनी द्वारा जारी एक बयान के अनुसार कंपनी ने रविवार को 12.5 किलोग्राम के सिलेंडर के लिए कीमतों में 1,359 रुपये की बढ़ोतरी की है। केरोसिन तेल की आपूर्ति कम होने से नाराज लोगों ने राजधानी कोलंबो में सोमवार को एक व्यस्त सड़क को जाम कर दिया। एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी का कहना है कि जैसे-जैसे लाइनें लंबी होती जा रही हैं, वैसे-वैसे लोगों के बीच गुस्सा बढ़ता जा रहा है।

धन का आउटफ्लो इनफ्लो से अधिक है जिसने श्रीलंका में फॉरेन करेंसी की कमी को जन्म दिया है। इसका एक कारण देश में टूरिज्म इंडस्ट्री का पतन भी है, जो इस देश के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में लगभग 10 प्रतिशत का योगदान देता है। 2019 में कोलंबो में हुए सीरियल बम धमाकों के बाद टूरिज्म इंडस्ट्री बेहद नीचे जा रहा था लेकिन कोविड 19 की स्थिति ने इसकी रीढ़ की हड्डी ही तोड़ दी। यहां तक कि चीन और यूरोपीय संघ के देशों जैसे इसके प्रमुख निर्यात स्थानों में भी कोविड 19 के कारण व्यापार में समस्या आई जिसके कारण भी श्रीलंका की विदेशी मुद्रा आय में कमी आई है। इसके अलावा श्रीलंका पर करीब 32 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज है।

Sri Lanka Crisis News: इस तरह श्रीलंका की सरकार के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ उसे विदेशी कर्ज का पेमेंट करना है तो दूसरी तरफ अपने लोगों को मुश्किल से उबारना है। हालात यहां तक खराब हो चुके हैं कि इस देश के इस साल दिवालिया होने की आशंका है। एक पूर्व रिपोर्ट में कहा गया है कि देश को अगले कुछ महीनों में घरेलू और विदेशी ऋणों में अनुमानित 7.3 अरब डॉलर चुकाने की जरूरत है, जबकि उसके पास देश चलाने के लिए भी पैसे नही बचे हैं। विश्व बैंक की ओर से बीते साल अनुमान जताया गया था कि कोरोना महामारी के शुरू होने के बाद से देश में 500,000 लोग गरीबी के जाल में फंस गए हैं। उसके बाद आर्थिक संकट की इस दोहरी मार से लाखों लोगों के गरीबी में फसने की आशंका जताई जा रही है।

आखिर किस प्रकार किसी भी देश और उसकी जनता को आर्थिक दिवालियापन, भूखमरी , बेरोजगारी और गृहयुद्ध के संकट से बचाया जा सकता है?

दोस्तों! किसी भी व्यक्ति या देश पर संकट तभी आता है जब वह परमात्मा और उसके ज्ञान से कोसों दूर होता है। संतों का कहना और हमारा मानना है कि किसी भी प्रकार के संकट का निवारण आध्यात्मिक ज्ञान और ईश्वर की शक्ति से ही संभव हो सकता है। ज़रूरत है परमात्मा को पहचानने , जानने ,समझने और ढ़ूंढने की।
आध्यात्मिक तत्वज्ञान सभी विज्ञानों का विज्ञान कहा गया है जो विश्व के सभी ज्ञानों में सर्वश्रेष्ठ और निर्णायक ज्ञान माना गया है। आदि काल से ही संतों व भक्तों ने तत्वदर्शी संत यानी की सतगुरु की तलाश की है जिसके पास अद्वितीय आध्यात्मिक ज्ञान हो, और जिसकी शरण में जाकर किसी भी प्रकार की समस्या को हल किया जा सके।

पवित्र श्रीमद भगवद्गीता के अध्याय 4 श्लोक 34 में तत्वदर्शी संत की तलाश करने को कहा गया है। इसके अलावा पवित्र वेद और कुरान शरीफ में भी तत्वदर्शी संत को ढूंढ़ कर सतभक्ति करने का वर्णन मिलता है। उस बाखबर/ तत्वदर्शी संत के पास सबसे अधिक इल्म यानि सच्चा ज्ञान होता है। उस संत के समान ज्ञानी पूरी पृथ्वी पर कोई भी नहीं होता। उसके पास ज्ञान होने के साथ साथ ईश्वरीय शक्ति और समाधान भी होता है।

आज से करीब 600 वर्ष पहले पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी स्वयं एक तत्वदर्शी संत की भूमिका निभाकर गए थे जिनके अद्वितीय तत्वज्ञान का लोहा आज भी विश्व मानता है। वर्तमान समय में कबीर साहेब जी एक बार पुनः धरती पर जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के रूप में आए हुए हैं। संत रामपाल जी महाराज जी अपने अद्वितीय सत्संग प्रवचनों व पुस्तकों के माध्यम से देश दुनिया के लोगों तक आध्यात्मिक तत्वज्ञान पहुंचा रहे हैं जिसे प्राप्त करने के बाद साधक की हर समस्या का हल स्वतः ही निकल जाता है। संत रामपाल जी महाराज जी के बताए मार्ग पर चलने वाले सभी मनुष्य अपने जीवन को सफल कर जाते हैं और मृत्यु के उपरांत मोक्ष को प्राप्त हो जाते हैं।

Credit: SA News Channel

यदि देश दुनिया की तमाम सरकारें सभी संत रामपाल जी महाराज जी के बताए सत मार्ग पर चलना शुरू कर दें तो विश्व से महंगाई, आर्थिक तंगी, भुखमरी , बेरोजगारी ,युद्ध और बीमारियों आदि जैसी सभी बड़ी से बड़ी समस्याओं का निवारण हो सकता है। वर्तमान समय में संत रामपाल जी महाराज पूरे विश्व में केवल एक मात्र सच्चे संत हैं जो शास्त्र अनुसार प्रमाणित सत्य भक्ति साधना बता रहे हैं, जिसे करने से साधक को ईश्वरी शक्तियों की पूर्णतः सहायता मिलती है और उनके हर एक काम सरने लग जाते है। इस विडियो को देखने वाले विश्व के सभी भाइयों बहनों से प्रार्थना है की संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा दिए गए अद्भुत व अद्वितीय तत्वज्ञान को समझें और उनसे अतिशीघ्र नामदीक्षा लेकर अपने जीवन को सफल बनाएं।

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