उत्सर्जन को रोकने के लिए किए गए वैश्विक प्रयासों का असर अब दिखने लगा है। अंटार्कटिका के ऊपर ओज़ोन परत का छेद धीरे-धीरे भर रहा है। एमआईटी के नेतृत्व में हुए एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में पुष्टि हुई है कि यह परत लगातार सुधार की दिशा में है। लेकिन इसी बीच, पृथ्वी की सतह के पास यानी ज़मीनी स्तर पर ओज़ोन गैस का प्रदूषण नई गंभीर समस्या बनता जा रहा है। वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि यह “अदृश्य गैस” न केवल हमारी सांसों में ज़हर घोल रही है, बल्कि आने वाले समय में खाद्यान्न उत्पादन को भी संकट में डाल सकती है। जलवायु परिवर्तन से बढ़ती गर्मी और शहरी प्रदूषण के कारण देश के कई बड़े शहरों में ज़मीनी ओज़ोन की मात्रा तेज़ी से बढ़ रही है। वाहनों, उद्योगों और अन्य स्रोतों से निकलने वाले प्रदूषक तत्व इसे एक नए सार्वजनिक स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा खतरे में बदल रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो ज़मीनी ओज़ोन प्रदूषण इंसानों की सेहत के साथ-साथ गेहूं, धान और मक्के जैसी प्रमुख फसलों की पैदावार को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।

ओज़ोन स्तर बढ़ने से जलवायु में परिवर्तन से संबंधित मुख्य बिंदु :

  • नाइट्रोजन ऑक्साइड और वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (VOCs) तेज़ धूप में प्रतिक्रिया करके सतही ओज़ोन बनाते हैं।
  • एक बार बनने के बाद ओज़ोन हवा में लंबे समय तक मौजूद रहता है, जिससे सांस संबंधी समस्याएं बढ़ती हैं।
  • गर्म मौसम रासायनिक प्रतिक्रियाओं की गति बढ़ाता है, जिससे ओज़ोन स्तर और ऊँचा होता है।
  • वाहन, उद्योग और अन्य दहन प्रक्रियाएं नाइट्रोजन ऑक्साइड व VOCs के बड़े स्रोत हैं।
  • वाहनों और उद्योगों के उत्सर्जन पर रोक और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना आवश्यक है।

सूर्य की तेज़ रोशनी में रासायनिक प्रतिक्रिया से बढ़ रहा ओज़ोन प्रदूषण

मौसम विज्ञानियों के अनुसार, नाइट्रोजन ऑक्साइड के प्रदूषक तेज़ धूप की मौजूदगी में वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (VOC) के कणों के साथ प्रतिक्रिया करके ओज़ोन प्रदूषण का कारण बनाते हैं। एक बार बनने के बाद यह हवा में काफी देर तक मौजूद रहता है। इसकी रोकथाम के लिए वाहनों, उद्योगों और अन्य दहन स्रोतों से निकलने वाले गैसीय प्रदूषण को नियंत्रित करने की सलाह दी जाती है।

गर्मियों में बढ़ा ज़मीनी ओज़ोन खतरा: सीएसई की रिपोर्ट में चिंताजनक खुलासा

हाल ही में सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) द्वारा भारत के सभी प्रमुख महानगरों और बड़े शहरों पर किए गए अध्ययन में खुलासा हुआ है कि 2025 की गर्मियों के दौरान कई शहरों में ज़मीनी स्तर पर हवा में ओज़ोन का स्तर आठ घंटे के मानक से कहीं अधिक दर्ज किया गया।

यह रिपोर्ट सीएसई की अर्बन लैब द्वारा अपने वायु गुणवत्ता ट्रैकर के माध्यम से तैयार की गई है। अध्ययन में सामने आया कि प्राथमिक प्रदूषकों के विपरीत, ओज़ोन किसी भी स्रोत से सीधे उत्सर्जित नहीं होता। यह नाइट्रोजन ऑक्साइड, वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (VOCs) और कार्बन मोनोऑक्साइड के जटिल रासायनिक प्रतिक्रियाओं से बनता है।

वाहनों, बिजली संयंत्रों, कारखानों और अन्य दहन स्रोतों से निकलने वाले ये प्रदूषक तत्व सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में रासायनिक क्रिया करते हैं, जिससे ज़मीनी स्तर पर ओज़ोन का निर्माण होता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह ज़मीनी ओज़ोन न केवल शहरों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि लंबी दूरी तक फैलकर क्षेत्रीय प्रदूषण में भी बदल सकता है। यह कृषि उत्पादकता को कम कर खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

ज़मीनी ओज़ोन से गंभीर स्वास्थ्य संकट का खतरा: सीएसई की चेतावनी

सीएसई की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉयचौधरी ने चेतावनी दी है कि यदि ज़मीन के करीब ओज़ोन प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकता है।

उन्होंने कहा, “ओज़ोन एक अत्यधिक प्रतिक्रियाशील गैस है और हवा में लंबे समय तक इसका स्तर ऊँचा रहने से यह आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक हो सकता है।” रॉयचौधरी के अनुसार, न केवल उत्तर भारत के शहर, बल्कि वे राज्य भी खतरे में हैं, जहाँ गर्मियों में उच्च तापमान और तीव्र सौर विकिरण की स्थिति बनती है। इन परिस्थितियों के कारण वहां भी ओज़ोन प्रदूषण तेज़ी से बढ़ रहा है।

ओज़ोन प्रदूषण बढ़ने के कारण: 

  • जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ता तापमान इस रासायनिक प्रक्रिया को तेज करता है।
  • महानगरों में वाहनों और औद्योगिक उत्सर्जन से निकलने वाले प्रदूषक इस समस्या को और बढ़ाते हैं।

ओज़ोन स्तर बढ़ने से स्वास्थ्य पर गहरा असर  

  • ओज़ोन स्तर बढ़ने से दमा (Asthma), सांस की तकलीफ़ और फेफड़ों की बीमारियां बढ़ रही हैं।
  • बुजुर्ग, बच्चे और पहले से बीमार लोग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।

ओज़ोन प्रदूषण को रोकने के उपाय 

  • वाहनों और उद्योगों से निकलने वाले गैसीय प्रदूषण को कम करना महत्वपूर्ण है। 
  • साइकिल चलाने और सार्वजनिक परिवहन जैसे टिकाऊ विकल्पों को अपनाना। 
  • वायु गुणवत्ता सेंसर लगाकर वास्तविक समय में ओजोन के स्तर पर नज़र रखना। 

जलवायु परिवर्तन से बढ़ती ओजोन प्रदूषण से संबंधित मुख्य FAQs

Q1. ओज़ोन प्रदूषण कैसे बनता है?

A1. नाइट्रोजन ऑक्साइड और VOCs सूर्य की तेज़ रोशनी में रासायनिक प्रतिक्रिया करके सतही ओज़ोन बनाते हैं।

Q2. बढ़ता ओज़ोन स्तर स्वास्थ्य पर कैसे असर डालता है?

A2. यह सांस संबंधी बीमारियां, अस्थमा, फेफड़ों की सूजन और आंखों में जलन पैदा कर सकता है।

Q3. ओज़ोन प्रदूषण का प्रमुख कारण क्या है?

A3. वाहनों, फैक्ट्रियों और जीवाश्म ईंधन के दहन से निकलने वाले नाइट्रोजन ऑक्साइड और VOCs।

Q4. इससे बचाव के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं?

A4. सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा, इलेक्ट्रिक वाहन अपनाना, उद्योगों में उत्सर्जन नियंत्रण तकनीक और हरियाली बढ़ाना।

Q 5. ओज़ोन प्रदूषण किन मौसम स्थितियों में अधिक होता है?

A5. गर्म, धूप वाले और कम हवा वाले दिनों में रासायनिक प्रतिक्रियाएं तेज़ होने से ओज़ोन स्तर सबसे ज़्यादा होता है।