Bangladesh Financial Crisis [Hindi] | श्रीलंका जैसे आर्थिक संकट से जूझ रहा है पड़ोसी देश बांग्लादेश

Bangladesh Financial Crisis [Hindi] श्रीलंका जैसे आर्थिक संकट से जूझ रहा है पड़ोसी देश बांग्लादेश

Bangladesh Financial Crisis [Hindi] | नमस्कार दर्शकों! SA News चैनल के स्पेशल कार्यक्रम “खबरों की खबर का सच” में आप सब का स्वागत है। आज हम हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश पर छाए आर्थिक संकट के बारे में चर्चा करेंगे और साथ ही जानेंगे की श्रीलंका के साथ बांग्लादेश पर आए आर्थिक संकट के पीछे क्या कारण हैं? तो चलिए शुरुआत करते हैं आज की हमारी स्पेशल पड़ताल की।

दोस्तों! पिछले कार्यक्रम में आपने देखा की कुछ महीनों से श्रीलंका भयंकर आर्थिक संकट से गुज़र रहा है और साथ ही वहां आवश्यक वस्तुओं की भारी कमी, हिंसा , आगजनी और सरकार की कड़ी आलोचना हो रही है। श्रीलंका आर्थिक संकट की इस मारामारी और बदहाली के बीच पेट्रोल, दवाओं और विदेशी मुद्रा भंडार से भी धीरे धीरे खाली होता जा रहा है।

Bangladesh Financial Crisis [Hindi] | विदेशी कर्ज के बोझ तले दब रहा है बांग्लादेश

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दोस्तों! हमारे दूसरे पड़ोसी देश बांग्लादेश के आर्थिक हालात भी कुछ कुछ श्रीलंका जैसे होते दिखाई दे रहे हैं। बांग्लादेश की आर्थिक स्थिति भी समय के साथ बद से बदतर होती चली जा रही है। श्रीलंका की ही तरह वैश्विक बाजार की स्थिति का नकारात्मक असर बांग्लादेश पर पड़ा है। श्रीलंका की भांति बांग्लादेश ने भी विदेशों से भारी मात्रा में कर्ज लिया। कर्ज के बोझ तले बांग्लादेश की आर्थिक नौका धीरे धीरे अब डूब रही है।

बड़े बड़े इकोनॉमिस्टों को यह आशंका है कि कहीं बांग्लादेश की स्थिति भी श्रीलंका जैसी न हो जाए

अंतरराष्ट्रीय बाजार में जरूरी वस्तुओं, कच्चे माल और ईंधन, सामान ढुलाई आदि की कीमतों में भारी बढ़ोतरी से बांग्लादेश पर बुरा प्रभाव पड़ा है। श्रीलंका के बाद अब बांग्लादेश का भी दिवालिया निकलने की कगार पर है। रिपोर्ट्स के अनुसार देश के पास अब केवल 5 महीने का विदेशी भंडार शेष बचा है। देश के बढ़ते आयात खर्च के चलते इसके विदेशी भंडार में काफी गिरावट आई है। आठ महीनों में बांग्लादेश का विदेशी मुद्रा भंडार 48 बिलियन डॉलर से घट कर 42 बिलियन डॉलर का रह गया है।

Bangladesh Financial Crisis [Hindi] | आयात खर्च बढ़ा और निर्यात आय घटी है

  • बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आयात पर होने वाला खर्च बढ़ा है पर उसके मुकाबले निर्यात से होने वाली आय नहीं बढ़ी है। इसके चलते व्यापार घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है।
  • साल 2021-22 के जुलाई से मार्च के बीच बांग्लादेश में 22 अरब डॉलर के औद्योगिक कच्चे माल का आयात किया गया है। जो बीते साल की तुलना में 54 फीसदी ज्यादा है।
  • कच्चे तेल के दामों में उछाल के चलते इंपोर्ट बिल 87 फीसदी बढ़ा है।
    ●वहीं उपभोक्ता उत्पादों के आयात पर 41 फीसदी इंपोर्ट बिल बढ़ा है। इन आंकड़ों से जाहिर है कि इंपोर्ट पर खर्च बढ़ता जा रहा ह
  • बांग्लादेश के लिए यह एक चिंता की बात है कि उसके आयात खर्च में काफी वृद्धि हुई है जबकि निर्यात से होने वाली आय बेहद कम हुई है
  • जुलाई से मार्च की अवधि में बांग्लादेश के आयात खर्च में 44 फीसद की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
  • आपको बता दें की श्रीलंका संकट भी विदेशी कर्ज और आयात खर्च बढ़ने की वजह से ही शुरू हुआ था। आज श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग खत्म हो चुका है और देश में महंगाई बेतहाशा बढ़ गई है। वहीं दूसरी और बांग्लादेश का विदेशी मुद्रा भंडार भी तेजी से खाली होता जा रहा है।

Bangladesh Financial Crisis [Hindi] | पांच महीने तक चल सकता है खर्च

बांग्लादेश में जितनी विदेशी मुद्रा बची हुई है उससे सिर्फ 5 महीने ही काम चलाया जा सकता है। अगर वैश्विक बाजार में कीमतें और बढ़ती हैं तो बांग्लादेश का आयात खर्च और बढ़ेगा और विदेशी मुद्रा भंडार पांच महीने से पहले भी खत्म होने की उम्मीद है। अगर वैश्विक बाजार की बात करें तो इस वक्त पूरी दुनिया में तेल की कीमतों में वृद्धि और रूस-यूक्रेन युद्ध का असर दिख रहा है। अमेरिका में भी इस वजह से खास तौर पर आर्थिक मंदी की आशंका जाहिर की गई है और सरकारों से तुरंत सही कदम उठाने की अपील की गई है।

बांग्लादेश सरकार ने आयात और यात्राओं पर लगाई रोक

आर्थिक संकट को देखते हुए बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद ने कहा कि सरकार ने विदेशी मुद्रा बचाने और अपना खर्च घटाने के लिए कई कदम उठाए हैं।

  • बांग्लादेश में हालात इस कदर खराब होते जा रहे हैं कि सरकार ने इससे निपटने के लिए सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के विदेशी यात्राओं पर रोक लगा दी है।
    बांग्लादेश सरकार द्वारा ऐसे प्रोजेक्ट्स पर भी रोक लगा दी गई है, जिनके लिए अधिक मात्रा में विदेशों से चीजों को आयात करने की जरूरत है।
  • सरकार ने लग्ज़री और गैर-जरूरी सामानों के आयात के साथ वाशिंग मशीन, स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल, एयर कंडीशनर और रेफ्रिजेरेटर के आयात पर रोक लगा दी है।

वित्त मंत्री एएचएम मुस्तफा कमाल ने कहा कि जब समय कठिन होता है, तो हमें कठिन फैसले लेने होते हैं। यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हमें नहीं मालूम है कि युद्ध कब समाप्त होगा। वैश्विक हालात को देखते हुए हमें यह फैसले लेने पड़े हैं। हालांकि, अर्थशास्रियों का कहना है कि अगर सरकर ने तेजी से और समय पर कदम उठाए होते, तो हालात इस कदर नहीं बिगड़े होते।
बांग्लादेश में कुछ विशेषज्ञों ने भी विदेशी मुद्रा भंडार में कमी को रूस-यूक्रेन युद्ध बताया है। कहा जा रहा है कि इसकी वजह से जरूरी चीजों की कीमतों में भी इजाफा हुआ है। देश के लोग महंगाई से परेशान हैं। सब्जियां, गेहूं, अन्य अनाज और ईंधन के दाम पिछले तीन महीनों में तेजी से बढ़े हैं।

भारत के रूपये की तरह बांग्लादेश के टका की वैल्यू निरंतर गिरती जा रही है

बांग्लादेश में जनवरी के बाद से ही हालात खराब होने लगे थे। विदेशों से बांग्लादेशी नागरिकों द्वारा भेजे जाने वाले पैसे में भी कमी आई है। ये कमी पिछले साल जुलाई से शुरू हुई थी। देश में फरवरी में हालात ज्यादा खराब हो गए, जब बांग्लादेश में आयात के लिए बस छह महीने का पैसा बचा हुआ था। इसके बाद से ही ये संकट गहराता जा रहा है। यहां गौर करने वाली बात ये है कि बांग्लादेश के टका की वैल्यू निरंतर गिरती ही जा रही है। फिलहाल बांग्लादेश के पास 42 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है परंतु आईएमएफ बांग्लादेश पर विदेशी मुद्रा का सही तरीके से गणना करने का दवाब बना रहा है।

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Bangladesh Financial Crisis [Hindi] | अगर बांगलादेश आईएमएफ की बात मानता है तो बांग्लादेश के विदेशी मुद्रा भंडार में 7 से 8 अरब डॉलर की कमी आ सकती है, जिससे संकट और बढ़ सकता है। व्यापार घाटा बढ़ने से बांग्लादेश के रिजर्व बैंक को 5 अरब डॉलर से ज्यादा अपने विदेशी मुद्रा भंडार से खर्च करना पड़ रहा है। वहीं दूसरी और डॉलर के मुकाबले स्थानीय करेंसी कमजोर होता जा रहा है। केंद्रीय बैंक ने टका और डॉलर का एक्सचेंज रेट 86.7 टका तय किया है लेकिन बैंक आयातकों से 95 टका वसूल कर रहे हैं जिसके चलते आयातित वस्तुओं की कीमतें बढ़ी हैं और जिससे महंगाई भी काफी बढ़ी है।

बढ़ती महंगाई और आर्थिक मंदी देश- विदेश और पड़ोसी देशों में बढ़ती ही जा रही है आखिर किस प्रकार इस संकट से उबरें क्या है समाधान?

दोस्तों! संतों ने परमात्मा को धन का भंडार बताया है। धनी परमात्मा के पास किसी भी चीज का अभाव नहीं। मांगने वाले को बस प्रार्थना करनी आनी चाहिए। जिस पर परमात्मा की रज़ा हो जाए वह चारों ओर से मालामाल हो जाता है। जिस राजा पर परमात्मा प्रसन्न होता है उसके राज्य में किसी भी वस्तु का अभाव नहीं होता। उसके क्षेत्र में समय से वर्षा होती है, जिससे अन्न की कभी कमी नहीं होती और किसान भी खुश रहते हैं। उस देश में सर्व पदार्थ पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होते हैं जिससे उस राजा को अन्य राजाओं के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ता।

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उस राज्य में असाध्य रोग और बीमारियां घर नहीं करती जिससे सभी देशवासी एक स्वस्थ जीवन जीते हैं। एक परमेश्वर की सत्य साधना करने वाला वह राजा सत्य और न्याय के बल पर राज्य करता है जिससे राजा भी सुखी और प्रजा भी सुखी रहती है।

लेकिन परमेश्वर की सत्य साधना क्या है और कैसे करें जिससे धरती स्वर्ग समान बन जाए और हम भी धनी हो जाएं? आइए जानते है..

Bangladesh Financial Crisis [Hindi] | इतिहास गवाह है। संतों व ऋषि मुनियों ने बताया है की परमात्मा को केवल शास्त्र अनुकूल भक्ति साधना करके ही प्रसन्न किया जा सकता है। यही बात हमारे पवित्र सद्ग्रंथ भी बताते हैं। परमात्मा को प्रसन्न करने के लिए सबसे पहले सदगुरु बनाना अति आवश्यक है। गुरु भी पूरा हो जिसके पास सत्य भक्ति विधि हो और वह पूर्ण रूप से नामदीक्षा देने का अधिकारी हो।

ऐसा सतगुरु पूरी पृथ्वी पर एक समय में केवल एक ही होता है। वह संत पूर्ण परमात्मा का कृपापात्र अवतार होता है जिसके पास परमेश्वर की संपूर्ण शक्ति व आशीर्वाद होता है। वर्तमान समय में पूरे विश्व में ऐसे संत केवल एक ही हैं। वह संत कोई और नहीं बल्कि जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी ही हैं। संत रामपाल जी महाराज परमेश्वर कबीर साहेब जी के वर्तमान अवतार हैं जो पूरे विश्व को सत्य भक्ति साधना बता रहे हैं। संत रामपाल जी महाराज जी के अद्वितीय तत्वज्ञान से हरेक समस्या का समाधान बड़ी ही आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।

वर्तमान परिस्थितियों को मद्देनजर रखते हुए देश दुनिया के सभी उच्च पदासीनों को चाहिए की वे संत रामपाल जी महाराज जी से नामदीक्षा लेकर उनके बताए अनुसार सतभक्ति करें जिसे करने से उनके राज्य और देश से सभी प्रकार के संकट दूर हो जाएंगे। ऐसा करने से वह देश स्वर्ग के समान हो जायेगा। चारों और खुशहाली होगी, उस देश में किसी भी प्रकार के कलह नहीं रहेंगे। वह देश सोने की चिड़िया बन जायेगा।

बांग्लादेश, श्रीलंका, रूस, युक्रेन, चीन, पाकिस्तान और अन्य सभी देशों के तमाम मंत्रियों, अधिकारियों, और आम नागरिकों से नम्र निवेदन है, कृपया संत रामपाल जी महाराज जी का सत्संग सुनें और शास्त्र अनुसार पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी की भक्ति कर अपनी सभी आर्थिक, भौतिक और भूगौलिक समस्याओं का समाधान पाएं।

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