Close al kabeer Meat India: मांसाहारी होना परमात्मा के संविधान को तोड़ने जैसा है

Close al kabeer Meat India: नमस्कार दर्शकों! खबरों की खबर का सच कार्यक्रम में आप सभी का एक बार फिर से स्वागत है। आज हम भारत जैसे सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक देश में मांसाहार के बढ़ते सेवन से जुड़े पहलू पर चर्चा करेंगे और साथ ही भारत में फल-फूल रहे मांस उत्पादन के कारोबार पर भी एक नज़र डालेंगे।

कहते हैं भगवान ने धरती से लेकर आसमान तक जो कुछ भी है वह सब अपनी शब्द शक्ति से बनाया। भगवान ने मिट्टी से नहीं बल्कि अपने जज़्बातों से इस संसार को बनाया। इसमें पर्वत, नदी, नाले , तालाब, वृक्ष, बाग-बगीचों,समुद्रों,झरनों, गर्मी और शीतलता देने के लिए सूरज, चंद्रमा , तारे और ब्रह्मांड में घूमते ग्रह आदि भी बनाए। इसके अलावा पृथ्वी पर‌ रैंगने, चलने, तैरने , और उड़ने वाले जानवर बनाए। कीड़ी, कुंजर, शेर, सांप , मगरमच्छ, तितली, पंछी, हाथी और मानव आदि जीव भी बनाए। और साथ ही सभी जानवरों और मनुष्यों के आहार के लिए पृथ्वी को अनाज , फल,फूल, पौधों, पेड़ों से भर दिया।

मांसाहारी होना परमात्मा के संविधान को तोड़ने जैसा है
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जानवरों के लिए घांस- फूंस , पेड़- पौधे तो शरीर धारी मानवों के लिए फ़ल, सब्जियां कंदमूल आदि को बनाया। भगवान ने जब सृष्टि को बनाया तो अपने सभी बच्चों के लिए सारी व्यवस्था को दुरुस्त कर सबको जीवन व्यतीत करने के लिए पर्याप्त मात्रा में भोजन सामग्री प्रदान की। परमेश्वर ने मनुष्य और जानवरों का शरीर प्रकृति के अनुकूल ऐसे तैयार किया है कि हमारा पाचन तंत्र फल सब्जियों को आसानी से पचा सकता है। जबकि जब मनुष्य किसी जानवर की हत्या करके अपना पेट भरता है तो अपने पेट को उसकी कब्रगाह बना देता है। लेकिन हैरानी और दुख की बात यह है की जंगली जानवरों की भांति इंसान अपना मुख्य आचरण मानवता को खोकर एक जानवर से भी बदतर जीव बन चुका है।

जी हां दोस्तों! हम उन लोगों की बात कर रहे हैं जो बड़े ही मज़े से उंगलियां चाट-चाट कर मांसाहारी व्यंजनों का स्वाद लेते हैं। फिर वही मनुष्य खुद पर कष्ट आने पर भगवान से अपने लिए मेहर की भीख मांगते है। भगवान ने मनुष्यों को सबसे अधिक बुद्धि इसलिए दी है की वे अन्य मासूम जीवों पर‌ दया बरतें। उनकी देखरेख करें, उनसे प्रेम करें और उन पर काबू रखें , जानवरों की हत्या मांसाहार, उनकी चमड़ी और अन्य पदार्थों की प्राप्ति के लिए कदापि न करें। चींटी से लेकर हाथी तक सब उस एक ही भगवान ने बनाए हैं । हम सभी उसी एक परमेश्वर के ही बच्चे हैं।

विचार कीजिए दोस्तों, जब इंसान भगवान के बनाए दूसरे बच्चे को मौत के घाट उतारकर अपना भोजन बनाता है तब उस भगवान को कितना दुख पहुंचता होगा। लेकिन राक्षस स्वभाव को धारण कर चुका मनुष्य इस बात को नहीं समझना चाहते कि ईश्वर ने जानवरों को मनुष्य का आहार बिल्कुल भी नहीं बनाया है। उल्टा वाद विवाद कर अपने राक्षस स्वभाव का प्रदर्शन करते हैं। वे कहते हैं जानवर फूड चैन का हिस्सा हैं। भगवान ने इन्हें खाने के लिए ही बनाया है। बल्कि मनुष्य को जीव हत्या करके खाने का आदेश परमात्मा का नहीं है और न ही जानवरों को खाना किसी फूड चैन का अहम हिस्सा है।वहीं कुछ लोग कहते हैं यदि विश्व में सभी लोग शाकाहारी हो गए तो दुर्भिक्ष ( अकाल) पड़ जायेगा, सब के पास खाने के लिए पर्याप्त अन्न भी नहीं होगा।

शायद ऐसी दोयम सोच रखने वाले लोग यह भूल जाते हैं की जब मां के गर्भ से बच्चा बाहर आता है तो उसके मुंह में दांत नहीं होते तब मां के दूध से उसका पालन पोषण होता है। मां के गर्भ में मां की नाभि से बालक की नाभि जोड़कर बच्चे का पेट भरता है। यह सब व्यवस्था परमात्मा की कि हुई है। हम भूल जाते हैं की वह सर्वशक्तिमान भगवान सब कुछ करने में सक्षम हैं। हम मानव, परमात्मा के बनाए हुए हैं अपनी बुद्धि के वश होकर हम परमात्मा के विधान को तोड़कर पाप के भागी बन रहे हैं। हम मनुष्य बेशक जानवर से अधिक शक्तिशाली हैं पर हमें परमात्मा के आदेश के अनुसार जीना चाहिए।

Close al kabeer Meat India: इस बात को साबित करने के लिए कुछ प्रमाणों व आंकड़ों पर नज़र डालते हैं

पवित्र कुरान शरीफ की आयत 52 से 59 में और बाइबल जेनेसिस 1:28 और 1:29 में प्रमाण है कि भगवान ने 6 दिन में सृष्टि रची और सातवें दिन तख्त पर जा विराजे। इस दरमियान धरती और आकाश के बीच जो कुछ भी है उस सबकी रचना भगवान ने की, भगवान ने सभी मनुष्यों तथा जानवरों को बताया की मैंने तुम्हारे लिए शाकाहारी भोजन की पूर्ण व्यवस्था की है।

कुछ लोग यह बताते हैं की मांस खाने का आदेश अल्लाह, गॉड या भगवान का है। जबकि जिस भगवान ने हमें बनाया है उसने कभी यह आदेश नहीं दिए। यह आदेश किसी अन्य फरिश्ते का है। यहां तक कि कुरान शरीफ और बाइबल से पहले आई तीन आसमानी किताबें जबूर, इंजील, और तौरात में भी कहीं मांस खाने का ज़िक्र नहीं किया गया है। इसके अलावा सिख, जैन, बौद्ध, हिंदू आदि धर्म के सद्ग्रंथों में भी मांसाहार निषेध बताया गया है।

अब जहां तक बात विश्व के सभी लोगों के लिए पर्याप्त शाकाहारी भोजन की है तो आपको बता दें की हर साल अकेले भारत और चीन में ही इतने अनाज का उत्पादन होता है की पूरे विश्व को 6 महीने तक भोजन करवाया जा सके। किसान कड़ी मेहनत से अनाज उगाता है, लेकिन फिर भी हर साल भारत में “2.1 करोड़ टन” गेहूँ खराब हो जाता है। संयुक्त राष्ट्र की फूड एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक हर साल दुनियाभर में करीब 1300 करोड़ कविंटल खाना किसी न किसी कारण बर्बाद हो जाता है। जबकि यूनाइटेड नेशंस के फूड एंड एग्रीकल्चर आर्गेनाइजेशन के मुताबिक पूरे विश्व में तकरीबन 5 बिलियन हेक्टर की ज़मीन खेती करने योग्य है जिसमें से केवल 1.4 बिलियन हेक्टर ज़मीन में ही खेती की जाती है। विचार कीजिए दोस्तों, कुल खेती लायक जमीन में से महज 30% जमीन में खेती करने पर भी पूरे विश्व की आबादी को भरपूर शाकाहारी भोजन खिलाया जा सकता है तो पूरे 100% ज़मीन में खेती करने पर कितने लोगों को शाकाहारी भोजन करवाया जा सकता है? यह तथ्य यह साबित करता है की भगवान ने हमें शाकाहारी रहने के लिए पर्याप्त मात्रा में साधन प्रदान किए हैं।

Close al kabeer Meat India: देश दुनिया में होने वाले मांस भक्षण के आंकड़ों पर एक नजर डालते हैं

आपको बता दें की वैश्विक स्तर पर मांसाहार की खपत में बीते पचास सालों में तेजी से इज़ाफा हुआ है। इसके साथ ही साल 1960 के मुक़ाबले मांस का उत्पादन पांच गुना बढ़ा है। साल 1960 में मांस का उत्पादन 70 मिलियन टन था जो कि 2017 तक 330 मिलियन टन तक पहुंच गया है। 1960 की शुरुआत में वैश्विक जनसंख्या लगभग तीन अरब थी जबकि इस समय दुनिया की आबादी 7.6 अरब है। दुनिया में मांस की खपत पर नज़र डालें तो समृद्धि और मांस की खपत का सीधा संबंध नज़र आता है। इस बारे में सबसे हालिया आंकड़ा साल 2013 का है। इसके मुताबिक़ अमरीका और ऑस्ट्रेलिया ने वार्षिक मांस की खपत के लिहाज़ से सबसे ऊंचा पायदान हासिल किया था। वहीं, न्यूजीलैंड और अर्जेंटीना ने प्रतिव्यक्ति 100 किलोग्राम मांस की खपत के हिसाब से सबसे ऊंचा स्थान हासिल किया था। दरअसल, पश्चिमी देशों में, ख़ासकर पश्चिमी यूरोप के ज़्यादातर देशों में प्रति व्यक्ति वार्षिक मांस की खपत 80 से 90 किलोग्राम है। दूसरी और चीन जैसे देश में लोग हर एक जानवर का मांस आहार करते हैं। हालांकि भारत में प्रति व्यक्ति मांस की खपत 4 किलोग्राम है जो कि दुनिया भर में सबसे कम है।

Close al kabeer Meat India: एक सर्वे के मुताबिक भारत में लगभग 70% लोग मांसाहारी हैं। 2014 में किए गए एक सर्वे के मुताबिक तेलंगाना, असम, ओडिसा, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु जैसे राज्य में 97 से 98 प्रतिशत जनसंख्या मांसाहारी है। वहीं सर्वे में राजस्थान में सबसे अधिक 74% जनसंख्या शाकाहारी पाई गई। इसके अलावा गुजरात, हरियाणा, पंजाब, और मध्यप्रदेश में भी 50 से 70 प्रतिशत जनसंख्या शाकाहारी पाई गई।

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भारत देश जिसकी पहचान विश्व भर के अन्य देशों में आध्यात्मिक देश के रूप में होती है, के लिए यह एक बेहद शर्म की बात है। क्योंकि सिख, जैन, बौद्ध, मुस्लिम , हिंदू, पारसी, और ईसाई धर्म के सदग्रंथ हम मनुष्यों को मांस खाने की अनुमति नहीं देते। भारत और दुनिया के अन्य देशों में बहुत सी मांस फैक्ट्रीज चल रहीं हैं।
यदि हम भारत की बात करें तो भैंस, भेड़, बकरी, सूअर और कुक्कुट आदि का प्रयोग मांस उत्पादन के लिए किया जाता है, ऐसे ऐसे करीबन 3600 स्लॉटर हाउस के साथ-साथ आधुनिक बूचड़खाने देश में मौजूद है। भैंस के मांस के उत्पादन के मुख्य क्षेत्र उत्तर प्रदेश, आन्ध प्रदेश, महाराष्ट्र और पंजाब हैं। वर्ष 2019-20 के दौरान देश ने विश्व को 22,668.48 (बाइस हज़ार, छ: सौ अड़सठ दशमलव अड़तालीस) करोड़ रुपए कीमत के 11,52,547.32 ( ग्यारह लाख, बावन हज़ार, पांच सौ सैंतालीस दशमलव बत्तीस ) मीट्रिक टन भैंस के मांस उत्पाद का निर्यात किया है।

एशिया की सबसे आधुनिक मानी जाने वाली एक भारतीय फूड प्रोसेसिंग कंपनी जिसका नाम “अल कबीर मीट फैक्ट्री” है, यह पूरे एशिया में सबसे ज़्यादा मांस उत्पादन करती है। इस कंपनी द्वारा सऊदी अरब, कुवैत, मलेशिया, अफ्रीका, फिलीपिंस, मॉरीशस, वियतनाम, यूएई आदि देशों में लगभग 4500 ( पैंतालीस सौ) टन का मांस निर्यात किया जाता है। यह कंपनी तेलंगाना राज्य के हैदराबाद शहर से लगभग 45 किलोमीटर दूर स्थित है।

क्या आप जानते हैं कबीर जी ही वह संत हैं जो स्वयं परमात्मा हैं और जिन्होंने संपूर्ण सृष्टि और हमें बनाया है।

“अल कबीर मीट फैक्ट्री” जिससे विभिन्न प्रकार के भैंस और अन्य जीवों के मांस का कारोबार किया जाता है। क्या एक संत / पंथ या किसी भगवान के नाम पर जीव हत्या का कारोबार करना उचित है?

अल कबीर तेलंगाना के मेडक ज़िले के रूद्रम गांव में स्थित है। तक़रीबन 400 एकड़ में फैले इस बूचड़खाने के मालिक सतीश सब्बरवाल हैं। यह बूचड़खाना अल कबीर एक्स्पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड चलाता है। मुंबई के नरीमन प्वॉइंट स्थित मुख्यालय से अलकबीर द्वारा मध्य-पूर्व के कई देशों को बीफ़ निर्यात किया जाता है।

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जब हमने “अल कबीर” शब्द का अर्थ गुगल किया तो मालूम हुआ की यह अल्लाह का नाम है। कुरान शरीफ और कई अन्य किताबों में अल्लाहू कबीर शब्द का भी ज़िक्र किया जाता है। कुरान मजीद की सूरत अल फुरकान आयत 52 से 59 में लिखा है की उस अल्लाहू अकबर जिसने 6 दिन में श्रृष्टि रची और सातवें दिन तख्त पर जा विराजे उस अल्लाह का नाम कबीर है। अल्लाह कबीर 600 साल पहले काशी में सह शरीर प्रकट हुए थे। वे स्वयं मांस भक्षण के घोर विरोधी थे। हिन्दू, मुस्लिम सिख और ईसाई सबको एक स्वच्छ समाज बनाने का ज्ञान देते थे। कबीर जी ने अपने दोहों के माध्यम से भी मांस भक्षण जैसे विभिन्न कुकर्मों के बारे में लोगों को चेताया है।

कबीर, जोरी करि जबह करै, मुखसों कहै हलाल।
साहब लेखा मांगसी, तब होसी कौन हवाल।।

कहता हूं कहि जात हूं, कहा जू मान हमार ।
जाका गला तुम काटि हो, सो फिर काटि तुम्हार ।।

कबीर, मांस मांस सब एक है, मुरगी हिरनी गाय।
जो कोई यह खात है, ते नर नरकहिं जाय।।

कबीर, तिलभर मछली खायके, कोटि गऊ दै दान।
काशी करौत ले मरै, तौ भी नरक निदान।।

कबीर, मुसलमान मारै करद सों, हिंदू मारे तरवार।
कह कबीर दोनूं मिलि, जावैं यमके द्वार।।

कबीर, मांस आहारी आत्मा, प्रत्यक्ष राक्षस जान।।
इसमें संशय है नहीं, चाहे हिंदू खाए या मुसलमान।।

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अब आप ही बताइए ऐसा संत जिसने समाज सुधार के लिए अपना सर्वस्व जीवन दे दिया उसके नाम पर उसी के बनाए जीवों की मारकाट करना उचित है क्या? यह फैक्ट्री कबीर साहेब जी के वर्तमान अवतार जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के करोड़ों अनुयायियों की आस्था व श्रद्धा को ठेस पहुंचाने का काम कर रही है। सर्व कबीरपंथी संत रामपाल जी महाराज जी के अनुयायी SA News के माध्यम से इस “अल कबीर मीट फैक्ट्री” जिसके मालिक “सतीश सब्बरवाल” हैं, उनसे इस फैक्ट्री को बंद करने के लिए प्रार्थना करते हैं। साथ ही SA News तेलंगाना सरकार और केंद्र सरकार से अनुरोध करती है की भारत की गरिमा बनाए रखने और परमात्मा के बनाए प्रत्येक जीव की जान बख्शने के लिए इस कत्लखाने और देश में बेरोकटोक चल रहे अन्य सभी बूचड़खानों को तुरंत प्रभाव से बंद किया जाए क्योंकि यह एक महान संत के अपमान के साथ साथ, परमात्मा के संविधान के भी विरूद्ध है।

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