Surya Grahan 2020: आज है साल का अंतिम सूर्य ग्रहण

आज हम आपको Surya Grahan 2020 की विस्तृत जानकारी देंगे, जैसे कब है सूर्य ग्रहण?, कैसे घटता है सूर्य ग्रहण?, सूर्य ग्रहण का समय क्या है? आदि आदि…

Surya Grahan 2020 का आखिरी सूर्य ग्रहण

सोमवार 14 दिसंबर को सोमवती अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण लग रहा है। भारतीय समयानुसार, यह सूर्य ग्रहण शाम 7 बजकर 3 मिनट से प्रारंभ होकर 15 दिसंबर की रात 12 बजकर 23 मिनट पर समाप्त होने वाला है। भारत में सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा।

Surya Grahan 2020 hindi
Surya Grahan 2020 Hindi

Surya Grahan 2020: मुख्य बिन्दु

  • आज है वर्ष का आखिरी सूर्य ग्रहण
  • वर्ष 2020 का आखिरी सूर्य ग्रहण (Surya Grahan 2020) आज 14 दिसंबर को हो रहा है।
  • भारतीय समयानुसार सूर्य ग्रहण शाम 7 बजकर 3 मिनट से 15 दिसंबर की रात 12 बजकर 23 मिनट तक रहेगा
  • सूर्य ग्रहण प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका, अटलांटिक और अंटार्कटिका में देखने को मिलेगा
  • सूर्य छिपने के कारण भारत में सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा

कब है सूर्य ग्रहण?

वर्ष 2020 का आखिरी सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) आज 14 दिसंबर को हो रहा है। भारतवर्ष में सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण ज्योतिष से जुड़ा होने के कारण दोनों को विशेष महत्व माना जाता है। आज घटित होने वाले साल 2020 के अंतिम सूर्यग्रहण को भारत के लोग नहीं देख पाएंगे क्योंकि यह सूर्य ग्रहण भारत में सूर्यास्त होने के बाद प्रारंभ होगा।

Surya Grahan 2020 का समय क्या है?

साल 2020 का आखिरी सूर्य ग्रहण (Surya Grahan 2020) 14 दिसंबर को 19:03:55 बजे से प्रारंभ होकर 15 दिसंबर को 00:23:03 बजे तक रहेगा।

सूर्य ग्रहण कहाँ देख पाएंगे?

  • सूर्य ग्रहण प्रशांत महासागर
  • हिंद महासागर
  • दक्षिण अफ्रीका
  • दक्षिण अमेरिका
  • अटलांटिक और अंटार्कटिका में देखने को मिलेगा।

कैसे घटता है सूर्य ग्रहण?

सूर्य ग्रहण एक अनोखी घटना है जो चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के एक विशेष स्थिति में आने से घटित होता है। यह एक खगोलीय घटना है जिसमें सूर्य ग्रहण तब लगता है जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाता है और पूरी तरह से सूर्य को ढककर पृथ्वी पर प्रकाश को आने से रोक लेता है।

Surya Grahan 2020 पर ज्योतिषीय विचार?

ज्योतिष शास्त्र चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण को महत्वपूर्ण मानते हैं। इन शास्त्रों के अनुसार सूर्य ग्रहण घर के मुखिया को प्रभावित कर सकता है। भारतवर्ष में लोग ग्रहण के समय पूजा भी करते हैं। ग्रहण के दौरान कुछ कामों को करना निषेध भी मानते हैं जैसे भोजन करना, सोना इत्यादि जबकि सूर्य ग्रहण मात्र एक खगोलीय घटना है।

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क्या वास्तव में जीव की बुद्धि का हुआ है ग्रहण?

काल ब्रह्म और माया ने जीवात्माओं के विरूद्ध साजिश रची और सभी जीवों को अपने बंधन में कैद कर करके रखा हुआ है। यह हमारी बुद्धि पर उनके द्वारा वास्तविक ग्रहण था कि हम अपने विवेक से तय नहीं कर सके कि हमें अपने परमपिता परम ब्रह्म कबीर साहेब को छोड़कर काल के साथ नहीं आना है। काल को हम गलती से अपना परमेश्वर मानकर बैठे है। आज भी हम उनकी पूजा करते हैं जबकि काल ने हमारे कर्मानुसार फल का षड्यन्त्र रचा हुआ है। जबकि वास्तविक पिता कभी अपने पुत्रों को धोखा नहीं दे सकते। एक और पक्ष है कि हमारे असली परम पिता सर्वोच्च परमेश्वर हमेशा हमारी भलाई के बारे में चिंतित रहते हैं ।

कैसे मिलते है परम पिता परमात्मा?

कभी-कभी वे पृथ्वी पर या तो जिंदा बाबा या हरे बाबा (अल-खिद्र) के रूप में उतरते हैं या कभी कमल के फूल पर एक बच्चे के रूप में (कवीरदेव, अल्लाहू कबीर)। वे शाश्वत सत्य के ज्ञान और मोक्ष के लिए भक्ति के मार्ग को बताते हैं। सूर्यग्रहण के दिन हमें आत्म बंधन का एहसास करना चाहिए और इस बंधन से मुक्ति का मार्ग ढूँढना चाहिए।

Credit: Sant Rampal JI Maharaj

मोक्ष के लिए कैसे तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज की शरण में जाए?

एक बार हम समझ लें कि पूर्ण मोक्ष प्राप्त करने के लिए हमें पूर्ण परमात्मा कबीर साहब की गुरु शिष्य वंशावली में प्रबुद्ध संत रामपाल जी महाराज की शरण में जाना चाहिए। सतगुरु जी की सेवा करके और सरलता के साथ प्रश्न पूछकर हमें भक्ति का सही तरीका उनसे लेना चाहिए। अभ्यास करने पर हम निश्चित रूप से सतलोक के लिए प्रस्थान करेंगे । उस समय तक हम जीवन को खुशी से जीने के लिए सभी सांसारिक सुख की प्राप्ति करेंगे। तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज द्वारा लिखित पुस्तक जीने की राह को पढ़ें और सतलोक आश्रम यूट्यूब चैनल पर सत्संग सुनकर सत ज्ञान प्राप्त करें।

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