Single use Plastic Ban | सिंगल यूज़ प्लास्टिक 1 जुलाई से होगा बैन

Single use Plastic Ban [Hindi] क्या सिंगल यूज़ प्लास्टिक 1 जुलाई से होगा बैन

Single use Plastic Ban [Hindi] नमस्कार दर्शकों ! स्वागत है आपका हमारे खास कार्यक्रम खबरों की खबर का सच में। आज के कार्यक्रम में हम देश दुनिया में single use प्लास्टिक से विशेषरूप से पर्यावरण को होने वाले नुकसान के बारे में चर्चा करेंगे और साथ ही देश में 1 जुलाई 2022 से एकल उपयोग प्लास्टिक में आने वाली वस्तुओं पर पूरी तरह प्रतिबंध लगने वाला है इसके बारे में भी जानेंगे।

आज हमारे पास सब कुछ है यानी सारी सुख-सुविधाएं उपलब्ध हैं। हम एक ऐसी दुनिया में जी रहे हैं जिसमें सुविधाएं बहुतायत में हैं लेकिन इसके साथ यह प्रकृति और पर्यावरण के बैलेंस को दिन प्रतिदिन खोखला बना रही है। मनुष्यों ने अपने जीवन को सरल और सुविधाजनक बनाने के लिए अच्छे आधुनिक और बेहतरीन उपकरण तो बना लिए लेकिन कुछ ऐसी चीजें भी बना दीं जो हमारे विनाश का कारण बन सकती है। आपको बता दें की प्लास्टिक मानव द्वारा निर्मित एक ऐसी खोज है जिसने अरबों लोगों की जिंदगी को बदल दिया है। लेकिन यही आविष्कार भविष्य की कई पीढ़ियों को बर्बाद भी कर सकता है।

Single use Plastic Ban [Hindi] | क्या आप जानते हैं कि सिंगल यूज प्लास्टिक क्या है?

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सिंगल यूज प्लास्टिक एक ऐसा प्लास्टिक है जिसका उपयोग हम केवल एक बार करते हैं। एक बार इस्तेमाल कर फेंक दी जाने वाली प्लास्टिक ही सिंगल यूज प्लास्टिक कहलाता है। इसे डिस्पोजेबल प्लास्टिक भी कहते हैं।

हमारी निर्भरता प्लास्टिक पर बढ़ने से प्रदूषण बढ़ा है और स्वास्थ्य घटा है

दोस्तों! हम प्लास्टिक पर इस कदर निर्भर है कि पानी पीने की बोतल से लेकर लंच बॉक्स तक में प्लास्टिक का ही इस्तेमाल करते हैं। हम प्लास्टिक का इस्तेमाल तो कर रहे हैं लेकिन उसके दुष्प्रभावों से अंजान हैं। प्लास्टिक कई तरह से मानव शरीर के लिए नुकसानदायक है। प्लास्टिक के निर्माण में उपयोग किए जाने वाले रसायन मानव शरीर के लिए हानिकारक हैं और मनुष्य द्वारा प्लास्टिक यूज़ के बाद यह कूड़े का ढ़ेर बन जल,थल और हवा में रहने वाले सभी जीव ,जंतुओं पक्षियों और जलचर के लिए हानिकारक है।

प्लास्टिक के इस्तेमाल से सीसा, कैडमियम और पारा जैसे रसायन सीधे मानव शरीर के संपर्क में आते हैं। ये जहरीले पदार्थ कैंसर, जन्मजात विकलांगता, कमजोर इम्यून सिस्टम और बच्चों के विकास को प्रभावित कर सकते हैं। एक नए शोध में मानव रक्त और फेफड़ों में भी माइक्रोप्लास्टिक के कण पाए गए हैं। शोध में सामने आया कि यह कण शरीर में रह सकते हैं और अन्य अंगों तक खून के माध्यम से पहुंच सकते हैं।

कुछ ऐसे पहलुओं पर चर्चा करते है जो प्लास्टिक से पर्यावरण को होने वाले नुकसानों से रूबरू करवाएंगे

प्लास्टिक प्रदूषण हमारे पर्यावरण को काफी तेजी से नुकसान पहुंचा रहा है। प्लास्टिक पदार्थो से उत्पन्न कचरे का निस्तारण काफी कठिन होता है और पृथ्वी पर प्रदूषण में भी इसका काफी अहम योगदान है, जिससे यह एक वैश्विक चिंता का विषय बन गया है। प्लास्टिक बैग, बर्तनों और फर्नीचर के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से प्लास्टिक के कचरे में काफी वृद्धि हो रही है, जिससे प्लास्टिक प्रदूषण जैसी भीषण समस्या उत्पन्न हो गयी है।

अरबों पाउंड प्लास्टिक खासकर समुद्रों में पड़ा हुआ है। 50 प्रतिशत प्लास्टिक की वस्तुएं हम सिर्फ एक बार काम में लेकर फेंक देते हैं। प्लास्टिक के उत्पादन में पूरे विश्व के कुल तेल का 8 प्रतिशत तेल खर्च हो जाता है। प्लास्टिक को पूरी तरह से खत्म होने में 500 से 1,000 साल तक लगते हैं। प्लास्टिक के एक बेग में इसके वजन से 2,000 गुना तक सामान उठाने की क्षमता होती है। हम जो कचरा फैंकते हैं उसमें प्लास्टिक का एक बड़ा हिस्सा होता है।

माउंट एवरेस्ट से लेकर आर्कटिक महासागर में प्लास्टिक प्रदूषण पाया गया है जो चिंता का विषय भी है

दोस्तों! पर्यावरण में भारी मात्रा में प्लास्टिक कचरा (Plastic Waste) फेंका जाता है। माइक्रोप्लास्टिक (Microplastic) अब माउंट एवरेस्ट से लेकर महासागरों तक पूरे ग्रह को दूषित कर रहा है। दुनिया के सबसे बर्फीले इलाकों में से एक आर्कटिक महासागर में प्लास्टिक प्रदूषण ने वैज्ञानिकों की चिंता को बढ़ा दिया है। उनका कहना है कि आर्कटिक में प्लास्टिक प्रदूषण अब पृथ्वी के बाकी हिस्से जितना खराब हो चुका है। आर्कटिक की कठोर जलवायु और मानव जीवन के लिए प्रतिकूल तापमान ने लंबे समय से इस इलाके के विकास और संसाधनों के दोहन में एक प्राकृतिक बाधा के रूप में काम किया है। इसके बावजूद जलवायु संकट तेजी से इसे बदल रहा है।

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आर्कटिक महासागर के किनारे छह देश स्थित हैं, इनमें रूस, कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका, डेनमार्क, नॉर्वे और आइसलैंड शामिल हैं। ऐसे में अब तक वीरान पड़ा यह इलाका अब तेजी से आबाद हो रहा है। एक नए अध्ययन से पता चलता है कि लहरों, हवाओं और नदियों के जरिए आर्कटिक महासागर के उत्तर में पहुंचे कपड़े, पर्सनल केयर प्रॉडक्ट्स, पैकेजिंग और अन्य रोजमर्रा की सामग्री का मलबा इसकी आबोहवा को नष्ट कर रहा है। बड़ी मात्रा में माइक्रोप्लास्टिक अब पानी में, समुद्र के तल पर, दूरदराज के समुद्र तटों पर, नदियों में और यहां तक कि बर्फ में भी पाया जा सकता है।

Single use Plastic Ban [Hindi] | आखिर में प्लास्टिक कचरा जाता कहां हैं?

सभी देशों में प्लास्टिक का इस्तेमाल इतना बढ़ चुका है कि वर्तमान में प्लास्टिक के रूप में निकलने वाला कचरा विश्व पर्यावरण विद्वानों के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों बन चुका है। विकसित देश अक्सर भारत जैसे विकासशील या अन्य विभिन्न अविकसित देशों में इस तरह का कचरा भेज देते हैं। अथवा ऐसे कचरे को जमीन में भी दबा दिया जाता है। जमीन में दबा यह कचरा पानी के स्त्रोतों को प्रदूषित कर हमारे जीवन के लिए बड़े खतरे के रूप में सामने आता है। प्लास्टिक की चीजें, जितनी भी आप सोच सकते हैं, अक्सर ही पानी के स्त्रोतों में बहुत ज्यादा मात्रा में पड़ी मिलती हैं।

Single use Plastic Ban [Hindi] | प्लास्टिक नॉन-बॉयोडिग्रेडेबल होता है। नॉन-बॉयोडिग्रेडेबल ऐसे पदार्थ होते हैं जो बैक्टीरिया के द्वारा ऐसी अवस्था में नहीं पहुंच पाते जिससे पर्यावरण को कोई नुकसान न हो। कचरे की रिसायकलिंग बेहद जरूरी है क्योंकि प्लास्टिक की एक छोटी सी पोलिथिन को भी पूरी तरह से छोटे पार्टिकल्स में तब्दील होने में हजारों सालों का समय लगता है और इतने ही साल लगते हैं प्लास्टिक की एक छोटी सी पोलिथिन को गायब होने में।

Single use Plastic Ban [Hindi] | प्लास्टिक कचरे से होने वाले भारी नुकसान

जब प्लास्टिक को कचरे के तौर पर फेंका जाता है यह अन्य चीजों की तरह खुदबखुद खत्म नहीं होता। जैसा कि हम जानते हैं इसे खत्म होने में हजारों साल लगते हैं यह पानी के स्त्रोतों में मिलकर पानी प्रदुषित करता है। प्लास्टिक बैग्स बहुत से जहरीले केमिकल्स से मिलकर बनते हैं। जिनसे स्वास्थ्य और पर्यावरण को बहुत हानि पहुंचती है। प्लास्टिक बैग्स बनाने में जायलेन, इथिलेन ऑक्साइड और बेंजेन जैसे केमिकल्स का इस्तेमाल होता है। इन केमिकल्स से बहुत सी बीमारियां और विभिन्न प्रकार के डिसॉडर्स हो जाते हैं। प्लास्टिक में मौजूद केमिकल पर्यावरण के लिए भी बेहद हानिकारक होते हैं जिससे इंसान, जानवरों, पौधों और सभी जीवित चीजों को नुकसान पहुंचाते हैं।

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प्लास्टिक को जलाने और फेंकने पर जहरीले केमिकल्स का उत्सर्जन होता है। कुछ विकसित देशों में प्लास्टिक के रूप में निकला कचरा फेंकने के लिए खास केन रखे जाते हैं। इन केन में नॉन-बॉयोडिग्रेडेबल कचरा ही डाला जाता है। असलियत में छोटे से छोटा प्लास्टिक भले ही वह चॉकलेट का कवर ही क्यों न हो बहुत सावधानी से फेंका जाना चाहिए। क्योंकि प्लास्टिक को फेंकना और जलाना दोनों ही समान रूप से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। प्लास्टिक जलाने पर भारी मात्रा में केमिकल उत्सर्जन होता है जो सांस लेने पर शरीर में प्रवेश कर श्वसन प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इसे जमीन में फेंका जाए या गाड़ दिया जाए या पानी में फेंक दिया जाए, इसके हानिकारक प्रभाव कम नहीं होते।

Single use Plastic Ban [Hindi] | भारत सरकार प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने की दिशा में क्या क्या कार्य कर रही है?

हम सभी जानते हैं कि हमारा पर्यावरण खतरे में है। Single use प्लास्टिक वस्तुओं की वजह से होने वाला प्रदूषण विश्व के सभी देशों के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है। भारत एकल उपयोग वाले प्लास्टिक के कचरे से होने वाले प्रदूषण को कम करने की दिशा में कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है।

Single use Plastic Ban [Hindi] | सरकार एकल उपयोग वाले प्लास्टिक का उन्मूलन करने और प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के कारगर कार्यान्वयन के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए भी कदम उठा रही है।
फिलहाल देश में 50 माइक्रॉन से कम के पॉलीथीन बैग पर बैन है।

15 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के लोगों से अपील की थी कि वे देश को सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त बनाएं और इस दिशा में सरकार के अभियान में पूरे मन से हिस्सा लें। उन्होंने देश के तकनीकी विशेषज्ञों से जोर देकर कहा था कि वे प्लास्टिक के दोबारा उपयोग और रिसाइक्लिंग के बेहतर उपाय निकालें। प्रधानमंत्री ने दुकानदारों से भी अुनरोध किया था कि वे पॉलीथीन में सामान न बेचें और साथ ही लोगों से कहा था कि वे इसे लेकर और जागरुक बनें।


वर्ष 2019 में आयोजित चौथे संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा में, वैश्विक समुदाय के सामने एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक उत्पादों के प्रदूषण से जुड़े बेहद महत्वपूर्ण मुद्दे पर ध्यान केन्द्रित करने की तत्काल जरूरत को स्वीकार करते हुए भारत ने इस प्रदूषण से निपटने से संबंधित एक प्रस्ताव पेश किया था। यूएनईए-4 में इस प्रस्ताव को स्वीकार किया जाना एक महत्वपूर्ण कदम था।

केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने सिंगल यूज़ प्लास्टिक की क्या पहचान बताई है?

Single use Plastic Ban [Hindi] | बीस सिंगल यूज प्लास्टिक उत्पादों की पहचान केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के निर्देश पर रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग द्वारा गठित विशेषज्ञों की एक समिति ने की है। इस समिति में नीति- निर्माताओं के अलावा प्लास्टिक और उससे संबंधित क्षेत्र में काम करने वाले वैज्ञानिक, शिक्षाविद और शोधार्थी शामिल हैं। समिति ने किसी प्लास्टिक को ‘सिंगल यूज प्लास्टिक’ मानने के दो पैमाने बनाए हैं – पहला कि उसकी उपयोगिता क्या है और दूसरा, उसका पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ता है।

1 जुलाई, 2022 से कौन कौन से बीस तरह के प्लास्टिक पूरी तरह से बैन होंगे?

  • 1 जुलाई, 2022 से पॉलीस्टीरीन और विस्तारित पॉलीस्टीरीन समेत निम्नलिखित एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक वस्तुओं के निर्माण, आयात, भंडारण, वितरण, बिक्री और उपयोग को प्रतिबंधित किया जाएगा।
  • प्लास्टिक की छड़ियों से लैस ईयर बड्स, गुब्बारों के लिए प्लास्टिक की छड़ियां, प्लास्टिक के झंडे, कैंडी की छड़ियां, आइसक्रीम की छड़ियां, सजावट के लिए पॉलीस्टीरीन [थर्मोकोल];
    प्लेट, कप, गिलास, कांटे, चम्मच, चाकू, स्ट्रॉ, ट्रे जैसी कटलरी, मिठाई के डिब्बों के चारों ओर लपेटी जाने या पैकिंग करने वाली फिल्म, निमंत्रण कार्ड और सिगरेट के पैकेट, 100 माइक्रोन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक या पीवीसी बैनर, स्टिरर।
  • हल्के वजन वाले प्लास्टिक कैरी बैग की वजह से फैलने वाले कचरे को रोकने के लिए 30 सितंबर, 2021 से प्लास्टिक कैरी बैग की मोटाई 50 माइक्रोन से बढ़ाकर 75 माइक्रोन और 31 दिसंबर, 2022 से 120 माइक्रोन कर दी गई है। मोटाई में इस वृद्धि के कारण प्लास्टिक कैरी का दोबारा उपयोग भी संभव होगा।
  • केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सीपीसीबी ने इसके उत्पादन, भंडारण, वितरण और इस्तेमाल से जुड़े सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है। इसमें 30 जून से पहले इन पर पाबंदी की तैयारी पूरी करने को कहा गया है। एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक को पर्यावरण के लिए बेहद हानिकारक माना जाता है।

अब आपको बताते हैं कि प्लास्टिक की खोज किसने और कब की थी?

पहला मानव निर्मित प्लास्टिक अलेक्जेंडर पार्क्स द्वारा बनाया गया था, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से लंदन में 1862 की महान अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी में इसका प्रदर्शन किया था। दुनिया का पहला पूरी तरह से सिंथेटिक प्लास्टिक का आविष्कार 1907 में लियो बेकलैंड द्वारा किया गया था।

अब यह जानना भी बेहद ज़रूरी है कि आखिर किस प्रकार देश दुनिया को पर्यावरण में हो रहे भयावह बदलावों से बचाया जा सकता है?

दोस्तों! ईश्वर की बनाई पृथ्वी को केवल और केवल ईश्वर ही सुरक्षित रख सकते हैं। विश्व के कई सुप्रसिद्ध भविष्यव्यक्तताओं ने वर्तमान समय के बारे में महान भविष्यवाणियां की थीं और भविष्य में मानव समाज पर आने वाली आपत्तियों के बारे में चेताया है। कुछेक भविष्यवक्ताओं में नास्ट्रेदमस, प्रोफेसर हरार, किरो, बोरिस्का ,फ्लोरैंस आदि शामिल हैं जिन्होंने अपनी भविष्यवाणी में कहा है की एक महान आध्यात्मिक संत विश्वभर में ऐसी क्रांति ला देगा जिससे कलयुग में पुनः सतयुग जैसा माहौल हो जायेगा। पृथ्वी स्वर्ग समान हो जायेगी।

दोस्तों ! इसी महान परिवर्तन का शंखनाद स्वयं परमेश्वर कबीर साहेब जी ने अपने वर्तमान अवतार जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के रूप में सन 1997 में किया था। वर्तमान समय में संत रामपाल जी महाराज जी के अद्वितीय आध्यात्मिक तत्वज्ञान से दिन प्रतिदिन पृथ्वी स्वर्ग समान होती जा रही है। भविष्य में पृथ्वी पर चारों और हरियाली होगी, हर जगह फलदार वृक्ष लगाए जायेंगे जिससे ऑक्सीजन की वृद्धि होगी ,पशुधन बढ़ेगा और प्रदूषण नियंत्रण में आ जायेगा। फैक्ट्रियां धुआं रहित हो जायेंगी और प्लास्टिक आदि जहरीले पदार्थों का प्रयोग बंद कर दिया जायेगा। लोग मिट्टी के बर्तन इस्तेमाल करने लगेंगे। हर ओर बसंत होगी। लोग स्वस्थ और खुशहाल होंगे। भक्ति किया करेंगे।

इस विडियो को देखने वाले सभी मनुष्यों से प्रार्थना है कि एक ज़िम्मेदार नागरिक की तरह पर्यावरण को सुरक्षित और साफ रखने में सहयोग दें और सृष्टि की रचना और रचयिता को जानने के लिए संत रामपाल जी महाराज जी के सत्संग सतलोक आश्रम यूट्यूब चैनल पर देखें और सुनें क्योंकि आप भी तो जानना चाहते हैं कि पृथ्वी पर सतयुग जैसा माहौल कब आएगा।

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