Social Research: भूतकाल, वर्तमान और भविष्य की राजनीति की जानकारी

नमस्कार दस्तों, खबरों की खबर कार्यक्रम में आप सब का एक बार फिर से स्वागत है। इस बार हम पुरातन काल से देश दुनिया में चलती आ रही “राजनीति” यानी की “पॉलिटिक्स” के बारे में चर्चा करेंगे। भारत देश प्राचीन समय से ही सोने की चिड़िया रहा है। यही कारण है की देश विदेश के शाशको और राजा महाराजाओ को सदा से ही भारत में दिलचस्पी रही है। भारत में लगभग 500 सालों तक मुगलों का शासन रहा वहीं लगभग 200 सालों तक अंग्रेजो ने राज किया। राजनीति कि शुरूआत रामायण काल से भी अति प्राचीन है। पहले के जमाने में राजा अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर जनता का शोषण किया करते थे, बेकसूर लोगों को गलत सजाए सुनाकर घोर पाप के भागी बनते थे।

कुछेक ईमानदार राजा भी राजनीति के वश होकर विश्व विजेता बनने की दौड़ में युद्ध में लाखों बच्चों को अनाथ व लाखों स्त्रियों को विधवा बना देते थे। महाभारत में इसका सर्वाधिक विवरण देखने को मिलता है । चाहे वह चक्रव्यूह रचना हो या चौसर खेल में पाण्डवों को हराने कि राजनीति हो। या फिर मामा शकुनि के छल, युक्ति, या कपट हो, इन सब उदाहरणो ने राजनीति के प्रति हमारी धारणाओं को नकारात्मक बना दिया है। यही कारण है की आम तौर पर लोग राजनीति के विषय में नकारात्मक विचार रखते हैं। महात्मा गांधी ने एक बार टिप्पणी कर बताया था कि राजनीति ने हमें सांप की कुंडली की तरह जकड़ रखा है।

आखिर क्या है यह राजनीति? जिसने पूरे विश्व को एक सांप की कुंडली की तरह जकड़ रखा है?

राजनीति दो शब्दों का एक समूह है राज+नीति। राज मतलब शासन और नीति मतलब उचित समय और उचित स्थान पर उचित कार्य करने कि कला अर्थात् नीति से शासन करना ही राजनीति कहलाती है। इस राजनीति में कई सारे घटक होते है। जिस कारण ये राजनीति निर्माण होती है। जैसे की देश का सरकार, उस सरकार में बने हुए सभी राजनेता और उनका राजनीतिक दल। एक देश को चलाने के लिए एक संघटित सरकार की आवश्यकता होती है। जिसके लिए उस सरकार के उद्देश्य के अनुसार काम करने के लिए एक संघटन की आवश्यकता होती है। इसी संघटन में एक सरकार बनाने के लिए राजनीति चलती है। और इसी राजनीति के लिए एक भाई अपने ही भाई को, एक पिता अपनी ही संतान को और एक परिवार अपने ही परिवार को मारने काटने को मजबूर हो जाता है।

वर्तमान समय के अधिकतर राजनेता राजनीति का उपयोग खुद की जरूरतों को पूरा करने यानी स्वार्थ के लिए करते है। परिणाम स्वरूप हमारे देश के विकास पर रोक लग जाती है और भ्रष्टाचार बढ़ता जाता है। साथ ही देश में बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार, गरीबी आदि कई संकट पैदा हो उठते है। इन्ही भ्रष्ट नेताओ के कुमार्ग पर चलने के कारण देश की आम जनता का शोषण होता है। हम अक्सर अकबारों में पढ़ते है की आज इस नेता पर इतने करोड़ के घोटाले ला आरोप लगा है। कहीं किसी भ्रष्ट नेता का पर्दाफाश हो गया, तो कहीं किसी नेता ने अपने पद का गलत इस्तेमाल कर किसी का शोषण किया। इन्ही भ्रष्ट नेताओ की वजह से आज देश का अर्थतंत्र बिगड़ा गया है।

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आज देश में कई सारे नेता अशिक्षित है। इसलिए उनको एक नेता के कर्तव्यों का अधिक ज्ञान नहीं होता। लेकिन उन लोगों के पास पर्याप्त शक्ति और बहुत सारा धन होता है। उसी धन और शक्ति को यह राज नेता राजनीति में प्रयोग करके चुनाव लड़ते है और वो चुनाव वोट खरीदकर जीत भी जाते है। इस तरह कोई भी अशिक्षित व्यक्ति सत्ता में आता जाता है और सरकार के राजनीति का अपने स्वार्थ के लिए गलत इस्तेमाल करता है। आज देश को पढ़े-लिखे मंत्रियों की बहुत ज्यादा जरूरत है। जो देश की प्रगति कर सकते हैं। यह पढ़ाई केवल स्कूल कॉलेजों तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि भारतीय संस्कृति, नीति और आध्यात्मिकता के आधार से भी होनी चाहिए।

हम सब जानते हैं कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है। आज भारत की लगभग 65% आबादी युवा हैं। युवा वर्ग वह वर्ग होता है जिसमें 14 वर्ष से लेकर 40 वर्ष तक के लोग शामिल होते हैं। यह एक ऐसा वर्ग है जो शारीरिक एवं मानसिक रूप से सबसे ज्यादा ताकतवर है। जो देश और अपने परिवार के विकास के लिए हर संभव प्रयत्न करते हैं। हलकी इसमें कोई दोराह नही है कि आज भारत ने अन्य देशों की तुलना में अच्छी खासी प्रगति की है। इसमें सबसे बड़ा योगदान शिक्षा का है।

आइए अब यह जानने की कोशिश करते है की एक अच्छे राजनेता के क्या कर्तव्य होते है?

  • समाज सेवा: राजनेताओं का परम कर्तव्य व मूल उद्देश्य समाज सेवा ही होता है। समाज के लोगों का शोषण करने की बजाय उनकी सेवा कर उनका साथ देना ही राजनेताओं का धर्म है।
  • जन कल्याण: जन कल्याण ही एक राजनेता का राजधर्म माना गया है। राजनीति में लोग सत्ता में आने के लिए तो बहोत प्रयास करते है लेकिन वह जनहित में कार्य करना भूल जाते हैं।
  • समाज में समान स्थान: समाज में राजनेताओं का स्थान एक आम नागरिक से ऊंचा नहीं। भारत का संविधान देश के हर एक नागरिक को समान नजर से देखता है। यहां कोई ऊंच नही और कोई नीच नही। अपने आप को एक पद पर पाकर ऊंच समझना यह राजनेताओं के गुण नहीं होने चाहिए।
  • नियमो का निष्ठा से पालन: भारत का संविधान हर एक नागरिक को एक जैसे ही नियम मर्यादा में बांधता है। आमतौर पर राजनेता ही इन नियमों का उलंघन करते है। अपने पद का गलत इस्तेमाल कर अपने आप को संविधान से भी बड़ा समझ लेते है। उनको चाहिए की एक आम नागरिक की तरह क़ानून के प्रत्येक नियमो का निष्ठा से पालन करें।
  • न्याय का राज: अक्सर देखा गया है की सत्ता और पैसे की लालच में इंसान अंधा हो जाता है। राजनेता अपने स्वार्थ व पद के लालच में सैकडो लोगों के साथ अन्याय करते है। परिणाम स्वरूप देश की जनता का न्यायालयों, मीडिया और सरकार से भरोसा ही उठ जाता है। कारण यह है की जनता को आज इन तीनों में से कोई भी न्याय दिलाने में सक्षम नहीं। अपितु एक सच्चे राजनेता को चाहिए की वह एक न्याय का राज्य स्थापित करे।

भारत की राजनीति में आज वृद्ध लोगों का ही बोलबाला है और चंद गिने-चुने युवा ही राजनीति में है। इसका एक कारण यह है कि भारत में राजनीति का माहौल दिन-ब-दिन बिगड़ रहा है और सच्चे राजनीतिक लोगों की जगह सत्तालोलुप और धन के लालची लोगो ने ले ली है। राजनीति में देश प्रेम की भावना की जगह परिवारवाद, जातिवाद और संप्रदाय ने ले ली है। आए दिन जिस तरह से नेताओं के भ्रष्टाचार के किस्से बाहर आ रहे है देश के युवा वर्ग में राजनीति के प्रति उदासीनता बढ़ती जा रही है। अब भारत की राजनीति में सुभाषचन्द्र बोस, शहीद भगतसिंह, चंद्रशेखर आजाद, लोकमान्य तिलक जैसे युवा नेता नही दिखायी देते, आज भारत की राजनीति में बूढ़े रजनेताओ का बोबाला है। यही वजह है कि भारत के युवा अब इस देश को अपना न समझकर दूसरे देशो में अपना आशियाना खोज रहे हैं। वे यहां की राजनीतिक सत्ता और भ्रष्टाचार से दूर होना चाहते हैं। इसलिए वे कोई भी ठोस कदम उठाने से पहले कई-कई बार सोचते हैं। यहां तक कि भारत में वोट डालने वाले युवा को अपने चुने हुए उम्मीदवार पर भी भरोसा नहीं होता है।

विचार कीजियेगा दोस्तो, क्या इस राजनीति की चक्की में रोज रोज पीस कर हम तंग नहीं आ चुके? क्या यह आजादी संपूर्ण है? जब तक राजनेता अपने पद का गलत इस्तेमाल कर भ्रष्टाचार करते रहेंगे हमारी आजादी कभी संपूर्ण नहीं हो सकती। केवल सच्चे आध्यात्मिक ज्ञान से ही मानव अपने जीवन में तथा जीवन उपरांत आजाद यानी मोक्ष को प्राप्त हो सकता है। आज पूरे विश्व में केवल जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के पास पूर्ण आध्यात्मिक ज्ञान है। वर्तमान समय के राजनेताओं को चाहिए की संत रामपाल जी महाराज जी की विचारधारा पर चले व देश दुनिया की उन्नति में अपना सहयोग देकर अपना व अपने परिवार जनों का कल्याण कवाए। धन्यवाद।

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