Twin Towers Noida [Hindi] | कैसे गिराया जाएगा नोएडा का ट्विन टावर,क्या है सुरक्षा के इंतेज़ाम? जानें सब कुछ

Twin Towers Noida [Hindi] Demolition, Location, Cost, Height

Twin Towers Noida Demolition [Hindi]: नोएडा में बनी सुपरटेक ट्विन टावर इमारत को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आज गिराया जाएगा. इस इमारत के गिरने के बाद क्या नजारा होगा और इससे लोगों की हेल्थ पर कितना असर पड़ेगा आइए बताते हैं.

आसपास के इलाके में उठेगा धूल का गुबार

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आपको बता दें कि 32 मंजिला इमारत को गिरने में 9 सेकंड का समय लगेगा. इसे गिराने के लिए 3700 किलो विस्फोटक अलग-अलग फ्लोर पर लगाया गया है. विस्फोट होने के 9 सेकंड के बाद धूल का गुबार फैल चुका होगा. ये धूल का गुबार 3 किलोमीटर के दायरे में फैल जाएगा. इसके बाध धीरे-धीरे धूल नीचे की तरफ आएगी. लेकिन बताया जा रहा है कि आसमान में छाई धुंध को छंटने में कम से कम 3 घंटे का वक्त लग जाएगा.

Twin Towers Noida [Hindi] | इन बातों का रखें खास ख्याल

ट्विन टावर के गिरने के बाद आसपास के लोग मास्क जरूर लगाएं. धूल की वजह से सांस और अस्थमा के मरीजों को विशेष परेशानी हो सकती है. हार्ट के मरीजों को भी सतर्क रहने की जरूरत है. आंखों के बचाव के लिए चश्मा पहनना सही रहेगा. बार-बार पानी पीतें रहें, ताकि शरीर के भीतर धूल न चिपके. कोशिश करें कि 3 दिनों तक इस एरिया में न जाएं. बता दें कि इस इमारत के ढहने के बाद 35,000 क्यूबिक मीटर मलबा निकलेगा, जिसे साफ करने में कम से कम तीन महीनों का वक्त लगेंगे.

Twin Towers Noida [Hindi] | आसपास की सोसाइटी को कराया गया खाली

सुपरटेक के एमरोल्ड सोसाइटी से अब तक 40 परसेंट लोग अपना मकान खाली कर चुके हैं. पास की ही बनी दो सोसाइटी, एक पाश्र्वनाथ दूसरी सिल्वर सिटी में लोगों के रहने का इंतजाम किया गया है. साथ ही उनके खाने-पीने का भी इंतजाम किया गया है. एमरोल्ड कोर्ट के निवासियों से मिली जानकारी के मुताबिक पाश्र्वनाथ और सिल्वर सिटी सोसाइटी में बने क्लब हाउस और गेस्ट हाउस में 200 – 200 लोगों के रहने और खाने-पीने का इंतजाम सोसायटी के लोगों ने किया है.

तीन महीने में हट पाएगा ट्विन टावर का मलवा

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2021 में ट्विन टावर को गिराने का आदेश दिया था। ट्विन टावर को रविवार को गिराया जाना है और इसके मद्देनजर नजदीकी दो सोसाइटी एमराल्ड कोर्ट और एटीएस विलेज के करीब पांच हजार निवासियों को रविवार सुबह सात बजे अपने-अपने घरों को खाली करने का आदेश दिया गया है। निवासियों को करीब 2700 वाहनों और पालतू जानवरों को भी अपने साथ ले जाना होगा।

Twin Towers Noida [Hindi] | ट्विन टावर के करीब 500 मीटर के दायरे में किसी भी व्यक्ति या जानवर को जाने की अनुमति नहीं है। दोनों टावर को गिराने के लिए 3700 किलोग्राम विस्फोटक का इस्तेमाल किया जाएगा। एक अनुमान के मुताबिक ट्विन टावर को गिराने से 55 से 85 हजार टन मलबा निकलेगा जिसे हटाने में कम से कम तीन महीने का समय लगेगा। 

Twin Towers Noida [Hindi] | नोएडा ट्विन टॉवर से जुड़ी 10 बड़ी बातें

  1. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अवैध सुपरटेक ट्विन टावर को 28 अगस्त, रविवार को गिरा दिया जाएगा. 40 मंजिला इमारत को रविवार की दोपहर 2.30 बजे विस्फोट कर गिराया जाएगा.
  2. ट्विन टावरों को गिराने के लिए 3500 किलोग्राम से ज्यादा विस्फोटक का इस्तेमाल किया जाएगा. रविवार को बड़ी तादाद में पुलिसकर्मी शहर की ओर ट्विन टावर के आसपास एक किलोमीटर का घेरा बनाकर लॉ एंड ऑर्डर कि सुरक्षा करेंगे.
  3. आम लोगों को ट्विन टावर के आसपास बनी सड़कों पर एंट्री भी नहीं दी जाएगी. इतना ही नहीं शहर में जगह-जगह डाइवर्जन किया गया है और 5 सड़कों को पूरी तरह बंद भी किया गया है.
  4. ट्विन टावर के ब्लास्ट वाले दिन स्वास्थ्य महकमा भी मौके पर मौजूद रहेगा. शहर के बड़े-बड़े अस्पतालों में सेफ हाउस बनाए गए हैं. जेपी अस्पताल, यथार्थ अस्पताल और जिला अस्पताल में यह सेफहाउस तैयार किए गए हैं.
  5. एंबुलेंस व्यवस्था की जिम्मेदारी को डॉ जयास लाल को दी गई है, और जेपी अस्पताल की जिम्मेदारी नोडल अधिकारी डॉ चंदा को दी गई है, डॉ भारत भूषण  फेलिक्स अस्पताल में रहेंगे और यथार्थ अस्पताल की जिम्मेदारी नोडल अधिकारी डॉ रीता संभालेंगी.
  6. ट्विन टावर के विस्फोट से पहले यानी 28 अगस्त को  एमराल्ड कोर्ट में बनी दोनों सोसाइटी के लोगों को सुबह 7:00 बजे अपना घरों को खाली करना होगा. सोसाइटी के हजारों लोग सुबह-सुबह सोसाइटी से बाहर चले जाएंगे और शाम तक जब विस्फोट की पूरी प्रक्रिया खत्म हो जाएगी, उसके बाद वापस लौटेंगे. इस दौरान जिन लोगों की मेडिकल कंडीशन ठीक नही है या जो उपचार करवा रहे है उनको फेलिक्स अस्पताल में रखा जाएगा.
  7. ट्विन टावर गिराए जाने के दौरान आसपास की सोसाइटी में रहने वाले लोगों को अपनी छतों और बालकनी पर जाने कि इजाजत नहीं है. वहीं 31 अगस्त तक ट्विन टावर के आसपास के एरिया को नो फ्लाई जोन घोषित किया गया है और कोई भी अगर इसका उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा.
  8. आसपास की सोसायटी से लगभग 3000 गाड़ियां बाहर निकाली जाएगी और 250 मीटर तथा कुछ जगह पर इससे भी ज्यादा दूरी का आइसोलेशन जोन रहेगा. ब्लास्ट वाले दिन यहां पर एक इंसीडेंट कमांडेंट होंगे जो कि डीसीपी (DCP) लेवल के अधिकारी हैं.
  9. 250 मीटर और कहीं- कहीं इससे भी ज्यादा दूरी का एक्सक्लूजन जोन बनाया है. इसके अंदर सिर्फ 6 लोग रहेंगे. वो भी ट्विन टावर से 100 मीटर की दूरी पर रहेंगे. एक पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी, 3 ब्लास्टर्स और 2 प्रोजेक्ट मैनेजर्स होंगे. इन 6 लोगों के अलावा कोई भी इंसान या जानवर इस एक्सक्लूजन जोन में नहीं रहेगा.
  10. जिस दिशा में यह बिल्डिंग गिरानी है उसी हिसाब से विस्फोटक लगाएं गए हैं. जब सियान के 60% बारूद फट चुके होंगे तब एपेक्स का पहला बारूद फटेगा. सियान टावर पहले गिरेगा उसके कुछ सेकेंड बाद एपेक्स टावर गिरता दिखेगा. ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि वाइब्रेशन को कम किया जा सके.करीब 17 मिली सेकंड से लेकर 200 मिली सेकंड के अंतर पर ब्लास्ट होंगे. सभी बारूद को फटने में 9 सेकंड लगेंगे और बिल्डिंग नीचे गिरने में चार सेकंड लगेंगे. कुल मिलाकर 12 से 13 सेकंड में यह बिल्डिंग पूरी नीचे गिर जाएगी.

Twin Towers Noida [Hindi] | सुपरटेक की कहानी

सुपरटेक लिमिटेड एक गैर-सरकारी कंपनी है, जिसे 07 दिसंबर, 1995 को निगमित किया गया था। यह एक सार्वजनिक गैर-सूचीबद्ध कंपनी है और इसे ‘शेयरों द्वारा सीमित कंपनी’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है। सुपरटेक के फाउंडर आरके अरोड़ा ने 34 कंपनियां खड़ी की हैं जिनमें सिविल एविएशन, कंसलटेंसी, ब्रोकिंग, प्रिंटिंग, फिल्म्स, हाउसिंग फाइनेंस, कंस्ट्रक्शन तक की अलग अलग कंपनियां शामिल हैं।

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1999 में उनकी पत्नी संगीता अरोड़ा ने सुपरटेक बिल्डर्स एंड प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी शुरू की। दिल्ली एनसीआर सहित देश के 12 शहरों में सुबर टेक ने कई रियल एस्टेट प्रोजक्ट लॉन्च किए। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने मार्च, 2022 में सुपरटेक कंपनी को दिवालिया घोषित कर दिया था जिस पर अभी 400 करोड़ से अधिक का कर्जा है।

ढहाने का पैसा भी देगी कंपनी

Twin Towers Noida [Hindi] | ढहाने की कुल लागत में से, सुपरटेक लगभग 5 करोड़ रुपये का भुगतान कर रही है और शेष लगभग 15 करोड़ रुपये की राशि मलबे को बेचकर प्राप्त की जाएगी, जो कि 4,000 टन स्टील सहित लगभग 55,000 टन होगी। इसके अलावा, इमारतों को गिराने वाली कंपनी एडिफिस इंजीनियरिंग ने आसपास के क्षेत्र में किसी भी क्षति के लिए 100 करोड़ रुपये का बीमा कवर भी हासिल किया है।

Twin Towers Noida [Hindi] | 1.13 करोड़ थी 3 BHK की कीमत

सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट में एक 3बीएचके अपार्टमेंट की लागत लगभग 1.13 करोड़ रुपये थी। दोनों इमारतों में करीब 915 फ्लैट थे, जिससे कंपनी को करीब 1,200 करोड़ रुपये की कमाई होती। कुल 915 फ्लैटों में से लगभग 633 की बुकिंग हो चुकी थी और कंपनी ने घर खरीदारों से लगभग 180 करोड़ रुपये एकत्र किए थे। अब सुपरटेक को घर खरीदारों का पैसा 12 फीसदी ब्याज के साथ वापस करने को कहा गया है।

Twin Towers Noida [Hindi] | 3700 किलो विस्फोटक का होगा इस्तेमाल

सेक्टर-93-ए में बने 103 मीटर ऊंचे एपेक्स और 97 मीटर ऊंचे सियान टावर को ध्वस्त करने के लिए 3700 किलो विस्फोटक अलग-अलग फ्लोर पर लगाया गया है. सेफ्टी के लिहाज से एमराल्ड कोर्ट और आसपास की सोसायटी के फ्लैट खाली कराए जाएंगे. इसके अलावा करीब तीन हजार वाहन और 200 पालतू पशुओं को भी बाहर निकाल लिया जाएगा.

400 पुलिसकर्मी, PAC और NDRF के जवान रहेंगे तैनात

डीसीपी (सेंट्रल) राजेश एस ने बताया कि करीब 400 पुलिसकर्मियों के साथ पीएसी और एनडीआरएफ के जवान भी तैनात किए जाएंगे. मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ सुनील शर्मा ने बताया कि छह एंबुलेंस मौके पर रहेंगी और जिला अस्पताल के साथ फैलिक्स और यथार्थ अस्पताल में भी बिस्तर आरक्षित किए गए हैं. नोएडा प्राधिकरण की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रितु माहेश्वरी ने बताया कि करीब 60 हजार टन मलबा दोनों टावर से निकलेगा. इसमें से करीब 35 हजार टन मलबे का निस्तारण कराया जाएगा. ध्वस्तीकरण के बाद उठने वाली धूल को साफ करने के लिए कर्मचारी, स्वीपिंग मशीन, एंटी स्माग गन और पानी छिड़कने की मशीन के साथ वहां मौजूद रहेंगे.

तीन डेडलाइन असफल होने के बाद अब ध्वस्त होंगे टावर

  • 30 नवंबर 2021 सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त 2021 को तीन महीने के अंदर दोनों टावर ध्वस्त करने का आदेश दिया, लेकिन इस तारीख तक सुपरटेक बिल्डर टावर ध्वस्त करने के लिए एजेंसी तक का चयन नहीं कर सका। कुछ और दिक्कतों का हवाला देते हुए मोहलत मांगी।
  • 22 मई 2022 फिर 22 मई 2022 की तिथि तय हुई। सुपरटेक मामलों में नियुक्त आईआरपी ने कहा कि 10 अप्रैल को हुए टेस्ट ब्लास्ट के बाद डिजाइन में मामूली बदलाव करना होगा। इसलिए समय चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने 28 अगस्त से पहले टावर ध्वस्त करने का आदेश दिया।
  • 21 अगस्त 2022 नोएडा प्राधिकरण ने बैठक कर 21 अगस्त की तारीख तय की। सुप्रीम कोर्ट को बताया कि विस्फोटक दो अगस्त से लगने शुरू हो जाएंगे। इस बीच सुपरटेक बिल्डर ने सीबीआरआई को फीस देने से मना कर दिया। ऐसे में सीबीआरआई ने मामले में कोई राय नहीं दी। नोएडा पुलिस और सीबीआरआई ने विस्फोटक लगाने के लिए देर से एनओसी दी।
  • 28 अगस्त 2022 सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में 28 अगस्त की तिथि तय की गई। हालांकि, तकनीकी या मौसम संबंधी कारणों का हवाला देते हुए नोएडा प्राधिकरण ने चार सितंबर तक का अतिरिक्त समय लिया।

रविवार के लिए किसकी-क्या तैयारी

  • यातायात- नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे ट्विन टावर ध्वस्तीकरण के कारण रविवार दोपहर 215 बजे से 45 मिनट तक बंद रहेगा। इसके अलावा इस इलाके में एटीएस तिराहे से गेझा फल सब्जी मंडी तिराहे तक का मार्ग, एल्डिको चौराहे से सेक्टर-108 की ओर का रास्ता सर्विस रोड, श्रमिक कुंज चौराहे से सेक्टर-92 रतिराम चौक तक का मार्ग, श्रमिक कुंज चौराहे से सेक्टर-132 की ओर फरीदाबद फ्लाईओवर और सेक्टर-128 से श्रमिक कुंज चौराहे-फरीदाबाद फ्लाईओवर तक का मार्ग बंद रहेगा।
  • पुलिस- ट्विन टावर के ध्वस्तीकरण के दिन 400 पुलिसकर्मियों को तैनात किया जाएगा। इसके अलावा यातायात व्यवस्था बनाने के लिए 150 से 200 ट्रैफिक पुलिसकर्मी लगाए जाएंगे। दमकल की चार गाड़ियां और एक दर्जन से अधिक दमकलकर्मी सेक्टर-93ए में मौजूद रहेंगे।
  • अस्पताल- स्वास्थ्य विभाग ने चार अस्पतालों में सेफ हाउस बनाए हैं। जरूरत पड़ने पर इनमें मरीजों का इलाज हो सकेगा। इसके लिए जिला अस्पताल, फेलिक्स अस्पताल, जेपी अस्पताल और यथार्थ अस्पताल का चयन किया गया है। 28 अगस्त को छह एंबुलेंस, डॉक्टर और जीवनरक्षक दवाएं मौके पर उपलब्ध रहेंगी।
  • विमानों के उड़ने पर पाबंदी- उड्डयन मंत्रालय ने टावर ध्वस्तीकरण के चलते दोपहर दो से शाम चार बजे तक सेक्टर-93 के आसपास विमानों के उड़ने पर रोक को मंजूरी दे दी है। वहीं, पुलिस ने भी ट्विन टावर के आसपास के क्षेत्र में धारा-144 लागू कर दी है। यहां पर 26 से 31 अगस्त तक कोई भी ड्रोन नहीं उड़ा सकेगा।
  • गैस लाइन का बचाव- जहां पर दोनों टावर गिराए जाने हैं, वहां पास से ही गेल की गैस पाइप लाइन है। इंजीनियरों ने दावा किया कि गैस पाइप लाइन पर टावर के मलबे से कोई असर नहीं पड़ने दिया जाएगा। पाइप लाइन जमीन में तीन मीटर अंदर है। फिर भी इसके ऊपर स्टील की दो मीटर की प्लेट लगाई गई है। अगर कोई मलबा जाता है तो ये प्लेट रोक लेंगी।
  • धूल से बचाव के इंतजाम- ध्वस्त होते ही 300 मीटर ऊंचाई तक धूल का गुबार उठेगा। दमकल की गाड़ियां धूल को दबाने के लिए पानी का छिड़काव करेंगी। प्राधिकरण के 50 कर्मचारियों की टीम एमरॉल्ड कोर्ट और एटीएस विलेज सोसाइटी की सफाई के लिए उतरेगी। एंटी स्मॉग गन, 50 टैंकर और 10 मैकेनिकल स्वीपिंग मशीन भी सफाई करेंगी। लोगों के आने से पहले पीएम-2.5 और पीएम -10 स्तर की जांच होगी। इसके बाद ही लोगों को सोसाइटी में प्रवेश दिया जाएगा।

कंपनी को कितना होगा नुकसान

इमारतों को गिराने में लगने वाली 20 करोड़ रुपये की लागत में से सुपरटेक लगभग 5 करोड़ रुपये का भुगतान करेगी. जबकि शेष 15 करोड़ की राशि मलबे को बेचकर प्राप्त की जाएगी. जिसमें 4,000 टन स्टील और लगभग 55,000 टन आयरन निकलने की संभावना है. इसके अलावा इमारतों को गिराने के लिए जिम्मेदार कंपनी एडिफिस इंजीनियरिंग ने आसपास के क्षेत्र में किसी भी हानि के लिए 100 करोड़ रुपये का बीमा कवर भी लिया है.

Supertech-Noida Twin Tower का ये था विवाद

2004 में नोएडा प्रशासन ने सेक्टर 93A में एक हाउसिंग सोसाइटी बनाने के लिए सुपरटेक को प्लॉट आवंटित किया। 2005 के स्वीकृत प्लान में 10 मंजिल के 14 टॉवर्स बनाए जाने की अनुमति थी। 2006 में सुपरटेक ने प्लान में बदलाव किया। अब तक सुपरटेक ने 11 मंजिल के 15 टॉवर बना लिए। 2009 में प्लान में फिर बदलाव हुआ। 24 मंजिल के 2 टॉवर का प्लान बना। 2012 में 24 मंजिल को बढ़ाकर 40 मंजिल कर लिया गया। रोक लगने तक 633 फ्लैट बुक हो चुके थे। 2012 में इमेराल्ड हाउसिंग सोसाइटी के लोगों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचे। आरोप था कि गार्डन एरिया में दो टॉवर बना दिए गए है। 2014 में हाईकोर्ट ने दोनों टॉवर को गिराने का आदेश जारी किया। फ्लैट बुकिंग वालों को 14 प्रतिशत ब्याज के साथ रकम वापस करने के लिए कहा। 2021 में कोर्ट टॉवर गिराने की टाइम लाइन 3 महीना तय की। 2022 में नोएडा अथॉरिटी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मई तक इन टॉवर को गिरा दिया जाए।

दोपहर 2:15 बजे से डायवर्ट रहेगा नोएडा, ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे पर ट्रैफिक 

1- नोएडा से ग्रेटर नोएडा/यमुना एक्सप्रेस-वे की ओर जाने वाले यातायात को महामाया फ्लाईओवर से सेक्टर-37 की ओर डायवर्ट रहेगा। यह ट्रैफिक सिटी सेंटर, सेक्टर 71 से होकर गंतव्य की ओर जाएगा।
2- नोएडा से ग्रेटर नोएडा/यमुना एक्सप्रेस-वे की ओर जाने वाले यातायात को फिल्मसिटी फ्लाई ओवर से एलीवेटेड रोड की ओर डायवर्ट रहेगा। यह यातायात एलीवेटेड रोड होकर सेक्टर 60, सेक्टर 71 होकर गंतव्य की ओर जाएगा।
3- नोएडा से ग्रेटर नोएडा/यमुना एक्सप्रेस-वे की ओर जाने वाले यातायात को नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे व सर्विस रोड को फरीदाबाद फ्लाई ओवर से पहले सेक्टर 82 कट के सामने पूर्ण बन्द किया गया है। यह यातायात गेझा तिराहा, फेस-2 होकर गंतव्य की ओर जाएगा।
4- ग्रेटर नोएडा से नोएडा/दिल्ली की ओर जाने वाले यातायात को परीचौक से सूरजपुर की ओर डायवर्ट रहेगा। ट्रैफिक सूरजपुर, यामाहा, फेस-2 या बिसरख, किसान चौक होकर गन्तव्य की ओर जाएगा।
5- यमुना एक्सप्रेस-वे/ग्रेटर नोएडा से नोएडा/दिल्ली की ओर जाने वाले यातायात को यमुना एक्सप्रेस-वे के ऊपर जीरो पॉइंट से परीचौक की ओर डायवर्ट रहेगा
6- यमुना एक्सप्रेस-वे/ग्रेटर नोएडा से नोएडा/दिल्ली की ओर जाने वाले यातायात को नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे व सर्विस रोड सेक्टर 132 के सामने पूर्ण बन्द किया जाएगा। ट्रैफिक सेक्टर-132 के अन्दर से होकर पुस्ता रोड से गंतव्य की ओर जाएगा

Twin Towers Noida [Hindi] | 32 मंजिल की इमारत खड़ी कैसे हो गई?

कहानी 23 नंवबर 2004 से शुरू होती है। जब नोएडा अथॉरिटी ने सेक्टर-93ए स्थित प्लॉट नंबर-4 को एमराल्ड कोर्ट के लिए आवंटित किया। आवंटन के साथ ग्राउंड फ्लोर समेत 9 मंजिल तक मकान बनाने की अनुमति मिली। दो साल बाद 29 दिसंबर 2006 को अनुमति में संसोधन कर दिया गया। नोएडा अथॉरिटी ने संसोधन करके सुपरटेक को नौ की जगह 11 मंजिल तक फ्लैट बनाने की अनुमति दे दी। इसके बाद अथॉरिटी ने टावर बनने की संख्या में भी इजाफा कर दिया। पहले 14 टावर बनने थे, जिन्हें बढ़ाकर पहले 15 फिर इन्हें 16 कर दिया गया। 2009 में इसमें फिर से इजाफा किया गया। 26 नवंबर 2009 को नोएडा अथॉरिटी ने फिर से 17 टावर बनाने का नक्शा पास कर दिया। 

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दो मार्च 2012 को टावर 16 और 17 के लिए एफआर में फिर बदलाव किया। इस संशोधन के बाद इन दोनों टावर को 40 मंजिल तक करने की अनुमति मिल गई। इसकी ऊंचाई 121 मीटर तय की गई। दोनों टावर के बीच की दूरी महज नौ मीटर रखी गई। जबकि, नियम के मुताबिक दो टावरों के बीच की ये दूरी कम से कम 16 मीटर होनी चाहिए। 

आखिर कैसे कोर्ट पहुंचा मामला?

फ्लैट बायर्स ने 2009 में आरडब्ल्यू बनाया। इसी आरडब्ल्यू ने सुपरटेक के खिलाफ कानूनी लड़ाई की शुरुआत की। ट्विन टावर के अवैध निर्माण को लेकर आरडब्ल्यू ने पहले नोएडा अथॉरिटी मे गुहार लगाई। अथॉरिटी में कोई सुनवाई नहीं होने पर आरडब्ल्यू इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा। 

2014 में हाईकोर्ट ने ट्विन टावर तोड़ने का आदेश जारी किया। शुरुआती जांच में नोएडा अथॉरिटी के करीब 15 अधिकारी और कर्मचारी दोषी माने गए। इसके बाद एक हाई लेवल जांच कमेटी ने मामले की पूरी जांच की। इसकी जांच रिपोर्ट के बाद अथॉरिटी के 24 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।  

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