Happy Ambedkar Jayanti 2021: आंबेडकर जयंती पर जानिए उनके अनमोल विचार

Ambedkar Jayanti 2021: जब-जब बात भारत देश के संविधान की होती है, तब-तब जुबां पर डॉक्टर भीमराव आंबेडकर का नाम आना भी लाजमी है। 14 अप्रैल 1891 में मराठी परिवार में जन्मे भीमराव के पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल और मां का नाम भीमाबाई था। काफी विषम परिस्थितियों में पढ़ाई करने वाले भीमराव को बचपन से ही कई तरह के भेदभाव झेलने पड़े थे। दलित समाज के उत्थान और उन्हें जागरुक करने में डॉक्टर भीमराव ने जो योगदान दिया, उसे आज भी पूरी दुनिया याद करती है। हर साल 14 अप्रैल को डॉक्टर भीमराव आंबेडकर जयंती मनाई जाती है, तो चलिए आपको उनके बारे में कुछ खास बातें बताते हैं।

Ambedkar Jayanti 2021 Hindi Quotes, Speech, History
Ambedkar Jayanti 2021 Hindi Quotes, Speech, History, Images

डॉक्टर भीमराव आंबेडकर का चयन सन् 1913 में अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ने के लिए हुआ था। जहां से उन्होंने राजनीति विज्ञान में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की थी। यही नहीं, इसके दो साल बाद यानी सन् 1916 में उन्हें एक शोध के लिए पीएचडी से सम्मानित किया गया।

Ambedkar Jayanti [Hindi]: अंबेडकर के विचार आज भी प्रासंगिक

अंबेडकर के विचार प्रगतिशील थे जो आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने तब थे। तर्क उनका प्रधान क्षेत्र था एवं उन्होंने किसी भी मान्यता को बिना तर्क के स्वीकारने से मना किया। उन्होंने जो संघर्ष किया वह आज भी चल रहा है। उन्होंने दलितों में शिक्षित और संगठित होने की अलख जगाई।

Ambedkar Jayanti: अंबेडकर ने बौद्ध धर्म को दिया महत्व

अंबेडकर समानता के पक्षधर थे और उन्होंने बौद्ध धर्म को महत्व दिया। बौद्ध धर्म में समानता अवश्य है लेकिन यह सही साधना नहीं है। केवल तपस्या करने से मोक्ष की प्राप्ति नहीं हो सकती और न ही समाज में शांति लायी जा सकती है। भले ही ढेरों धर्म हैं लेकिन मोक्ष का मार्ग एक ही है और वह मार्ग प्रत्येक मानव जाति के लिए खुला है। मोक्ष बिना गुरु के सम्भव नहीं और यह ज्ञान केवल तत्वदर्शी संत ही बता सकते हैं।

डॉक्टर भीमराव आंबेडकर को भारत का संविधान निर्माता भी कहा जाता है। ये बात सभी जानते हैं कि हमारे देश के संविधान के निर्माण में डॉक्टर भीमराव आंबेडकर का अहम योगदान रहा है। 29 अगस्त 1947 को उन्हें संविधान मसौदा समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।

लोगों को किया जाता है जागरूक 

देश के साथ साथ विदेशों में भी उनकी जन्म जयंती को उत्सव के रूप में मनाया जाता है. इसी दिन बाबासाहेब के कामों के बारे में लोगों को बताया जाता है. इतना ही नहीं, जगह-जगह कार्यक्रमों का आयोजन कर समाज में वयाप्त बुराइयों को खत्म करने की भी अपील की जाती है. जगह जगह नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाता है. इसके अलावा, वाद विवाद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है.

Ambedkar Jayanti Quotes in Hindi

नींद अपनी खोकर जगाया हमको, आंसू अपने गिराकर हंसाया हमको,

कभी मत भूलना उस महान इंसान को, जमाना कहता हैं ‘बाबासाहेब अंबेडकर’ जिनको। जय भीम।।

Happy Ambedkar Jayanti 2021

कर गुजर गए वो भीम थे, दुनिया को जगाने वाले भीम थे।

हमने तो सिर्फ इतिहास पढ़ा यारों, इतिहास को बनाने वाले मेरे भीम थे।।

Happy Ambedkar Jayanti 2021

आज का दिन है बड़ा महान,

बनकर सूरज चमका इक इंसान,

कर गये सबके भले का ऐसा काम,

बना गये हमारे देश का संविधान

नजरों से नजारा देखा

कभी पहले कोई ऐसा नजारा नहीं देखा

हमारे भीम जैसा सितारा नहीं देखा

  • “मनुष्य नश्वर है, उसी तरह विचार भी नश्वर हैं एक विचार को प्रचार-प्रसार की जरूरत होती है, जैसे कि एक पौधे को पानी की, नहीं तो दोनों मुरझाकर मर जाते हैं”.
  • “एक महान आदमी एक प्रतिष्ठित आदमी से इस तरह से अलग होता है कि वह समाज का नौकर बनने को तैयार रहता है”.
  • “समानता एक कल्पना हो सकती है, लेकिन फिर भी इसे एक गवर्निंग सिद्धांत रूप में स्वीकार करना होगा”.
  • “बुद्धि का विकास मानव के अस्तित्व का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए”.
  • “मानता एक कल्पना हो सकती है, लेकिन फिर भी इसे एक गवर्निंग सिद्धांत रूप में स्वीकार करना होगा”.

संत रामपाल जी महाराज ने खत्म की छुआछूत

संविधान बना। अधिकारों की लड़ाइयाँ लड़ी गईं। रैलियाँ निकाली गईं। कानून सामने लाये गए और दलितों को झकझोर कर उनके अधिकारों के प्रति जगाया गया। सरकारें आगे आईं। लेकिन क्या छुआछूत खत्म हो सकी? क्या सामाजिक भेदभाव का नामोनिशान मिट सका? क्या आज भी चमार पट्टी के लोग बाबू पट्टी में बेखटके घूम सकते हैं? हम निश्चित तौर पर उत्तर नहीं दे सकते। वास्तव में ये सारी चीजें जो नहीं हो पाईं  वह सन्त रामपाल जी महाराज जी के तत्वज्ञान ने किया है। सन्त रामपाल जी महाराज के तत्वज्ञान के आधार पर “जीव हमारी जाति है”।

हमारी केवल एक जाति है जीव की। सभी धर्म जातियाँ केवल इंसानों द्वारा बनाई हैं ना कि परमेश्वर द्वारा। यही बात आज से लगभग 600 वर्ष पहले कबीर साहेब ने कही थी और समाज में एकता की लहर लाई थी। सामाजिक भेदभाव को खत्म अब केवल सन्त रामपाल जी महाराज के तत्वज्ञान के आधार पर किया जा सकता है जहाँ सभी अनुयायी केवल जीवात्मा के रूप में रहते हैं। सन्त रामपाल जी से नामदीक्षा प्राप्त करते ही जाति जा टैग हट जाता है और व्यक्ति केवल दास हो जाता है।

जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा।

हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, धर्म नहीं कोई न्यारा।।

अंबेडकर जयंती पर भाषण (Speech on Ambedkar jayanti 2021 in Hindi)

माननीय प्रधानाचार्य, उपाध्यक्ष, शिक्षकगण और मेरे प्रिय मित्रों – आप सभी को मेरा नमस्कार!

आज मैं आप सभी का इस भाषण समारोह में स्वागत करता हूं। मुझे आप सभी के सामने इस भाषण को संबोधित करने में बेहद प्रसन्न्ता महसुस हो रही है। जैसा कि आप सभी जानते हैं कि हम अम्बेडकर जयंती की पूर्व संध्या पर बाबा साहब अम्बेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए यहां एकत्रित हुए हैं। उनका पूरा नाम भीमराव रामजी अम्बेडकर था और 14 अप्रैल 1891 को भारत के महो में इनका जन्म हुआ था, जोकि वर्तमान में मध्य प्रदेश राज्य का एक शहर हैं। यह प्रत्येक भारतीय के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है। उनके पिता रामजी मालोजी सकपाल थे और मां भीमबाई थीं। उन्हें लोग प्यार से ‘बाबासाहेब’ के नाम से बुलाते हैं।

जब वे पांच साल के थे, तो उन्होंने अपनी मां को खो दिया था। अपनी शिक्षा पुरी करने के लिए वो मुंबई चले गये, वहां से उन्होंने अपना बैचलर ऑफ आर्ट्स (बीए) की शिक्षा पूरी की और फिर अपने आगे की पढ़ाई के लिए वो अमेरिका चले गए। उसके बाद उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय में दाखिला लिया और इंग्लैंड से अपनी मास्टर्स और पीएचडी की डिग्री प्राप्त की और वर्ष 1923 में भारत लौट आए।

भारत में, उन्होंने बॉम्बे के उच्च न्यायालयों में अपनी वकालत शुरू की। उन्होंने सामाजिक कार्य करने के साथ-साथ लोगों को शिक्षा का महत्व भी समझाया। उन्होंने लोगों को अपने अधिकारों के प्रति लड़ने के लिए और जाति व्यवस्था को समाप्त करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने “जाति के विनाश” पर भी एक पुस्तक लिखी, जिसमें उन्होंने जाति, वर्ग, जाति और लिंग के आधार पर भेदभाव के गंभीर प्रभावो के विषय में चर्चा की। सामाजिक कार्य में उनकी सक्रिय भागीदारी के कारण लोगों ने उन्हें ‘बाबासाहेब’ के नाम से संबोधित करना शुरू कर दिया।

Read in English: Know the Real Meaning of Life on Ambedkar Jayanti 2021 

उन्होंने भारत के संविधान को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई इसीलिए उन्हें भारतीय संविधान का रचयिता भी कहां जाता हैं। उस समय भारतीय संविधान में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा आरक्षण प्रणाली थी, जिसका मुख्य उद्देश्य समाज के कमजोर वर्ग और उनकी जीवनशैली में सुधार के साथ-साथ उन्हें आगे उत्थान की ओर ले जाना था।

डॉ भीमराव अम्बेडकर के सामाजिक कार्य और लोगों के उत्थान के प्रति, उनके इस योगदान के लिए उन्हें भारत में बहुत सम्मान के साथ याद किया जाता है। वास्तव में, 14 अप्रैल अम्बेडकर जयंती को न केवल हमारे देश, बल्कि दुनिया के अन्य हिस्सों में भी एक वार्षिक त्यौहार के रूप में मनाया जाता हैं। प्रत्येक वर्ष इस दिन पूरे भारत में सार्वजनिक अवकाश होता हैं।

Ambedkar Jayanti 2020: Essay, Biography, Quotes, Facts, Information, Education

इस दिन, उनके अनुयायियों द्वारा नागपुर में दीक्षाभूमि, साथ ही मुंबई में चैत्य भूमि में जुलूस निकाला जाता हैं। उनके जन्म दिवस पर विशेष व्यक्तियो जैसे कि राष्ट्रपति, प्रधान मंत्री के साथ-साथ प्रमुख राजनीतिक दलों के द्वारा उन्हे श्रद्धांजलि अर्पित की जाती हैं। उनके सम्मान में इस दिन पूरे देश भर में, खासतौर से दलित वर्गों द्वारा इस दिन को पुरे हर्षो-उल्लास के साथ मनाया जाता है। इसके साथ ही हमारे देश में उनके मूर्तियों पर माल्यार्पण और उनके अनुकरणीय व्यक्तित्व को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए बड़ी संख्या में इकट्ठे होते हैं और झांकी निकालते है। तो चलिए हम सभी इस महत्वपूर्ण दिवस को उत्साह के साथ मनाते हैं और हमारे देश के समग्र विकास के लिए किए गए सभी कार्यों को याद करते हैं।

Credit: BBC Hindi

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