कोरोना के घातक वेरिएंट NeoCov का खतरा भारत में फिलहाल नहीं, जानिए बड़ी वजह

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Corona NeoCov variant [Hindi] क्या NeoCoV के बारे में चिंता करनी चाहिए

Corona NeoCov variant: वुहान के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के नए वेरिएंट नियोकोव को लेकर चेतावनी जारी की है. इसके संक्रमण की मृत्युदर सबसे ज्यादा है. चीनी रिसर्चर्स ने दक्षिण अफ्रीका (South Africa) के चमगादड़ों (Bat) में कोरोना वायरस (Coronavirus) के एक नए वेरिएंट नियोकोव (NeoCov) का पता लगाया है. उन्होंने दावा किया है कि इसमें म्यूटेशन (Mutation) की क्षमता अधिक है. इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) ने कहा है कि इसकी क्षमता को और स्पष्टता की जरूरत है. वहीं आईडीएफ चेयरमैन ने दावा किया कि भारत को नियोकोव से कोई खतरा नहीं है.

Corona NeoCov variant [Hindi] क्या NeoCoV के बारे में चिंता करनी चाहिए

क्यों घातक है नियोकोव (NeoCov New Corona Variant) ?

चीन की वुहान यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के अनुसार, नियोकोव सार्स-सीओवी-2 की तरह ही मानव कोशिकाओं में प्रवेश कर सकता है. ये वायरस मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम कोरोना वायरस (MERS-Cov) का निकटतम है.

जानलेवा वेरिएंट (Corona NeoCov variant) को लेकर जारी हुई चेतावनी

चीन का वुहान शहर, जहां सबसे पहले कोरोना वायरस 2019 के आखिरी महीनों में पाया गया था, अब वहीं के वैज्ञानिकों ने कोविड वायरस के एक और मगर सबसे ज्यादा खतरनाक और जानलेवा वेरिएंट को लेकर चेतावनी जारी की है. वुहान के वैज्ञानिकों ने कहा है कि ये एक नया वेरिएंट है, जिसके संक्रमण की मृत्यु दर सबसे ज्यादा है.

सार्स-सीओवी-2 जैसा है नियोकोव

जान लें कि ये वायरस कई साल पहले मिडिल ईस्ट के देशों में खोजा गया था और ये सार्स-सीओवी-2 के ही जैसा है, जो मनुष्यों में कोरोना वायरस का कारण बनता है. जबकि नियोकोव को दक्षिण अफ्रीका में चमगादड़ों में खोजा गया था. हालांकि इस नए वेरिएंट के कोरोना वायरस को अभी तक सिर्फ जानवरों में ही फैलता हुआ देखा गया है.

नियोकोव (Corona NeoCov variant) से खतरा नहीं होने का दावा

इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर शशांक जोशी ने ट्वीट किया, ‘नियोकोव रहस्य का पर्दाफाश: 1. नियोकोव एक पुराना वायरस है जो MERS Cov से करीबी रूप से संबद्ध है. ये DPP4 रिसेप्टर्स के जरिए कोशिकाओं में प्रवेश करता है. 2. इस वायरस में नया क्या है: NeoCov चमगादड़ के एसीई2 रिसेप्टर्स का इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन ये तभी मुमकिन है, जब उसमें कोई नया म्यूटेशन हो. इसके अलावा बाकी सब प्रचार है.’

म्यूटेशंस और वैरिएंट्स क्या हैं?

Corona NeoCov variant: म्यूटेशंस यानी वायरस की मूल जीनोमिक संरचना में होने वाले बदलाव। यह बदलाव ही वायरस को नया स्वरूप देते हैं, जिसे वैरिएंट कहते हैं।

Corona NeoCov variant: एंटीबॉडी को दे सकता है चकमा

रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर यह वायस इंसानों में फैलता है तो वैक्सीन या पहले हुए संक्रमण से बनी एंटीबॉडी को चकमा दे सकता है. नियोकोव मर्स और सार्स कोव-2 से मिलकर बना है. ऐसे में यह  मौजूदा कोरोना वायरस से भी तेजी से फैल सकता है. चूंकि मर्स कोव से मृत्युदर काफी अधिक होती है. ऐसे में नियोकोव काफी घातक हो सकता है.

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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने नहीं दिया है कोई बयान

नए वैरिएंट के बारे में आई रिपोर्ट पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ओर से अभी तक कोई बयान जारी नहीं किया गया है. जब भी कोई नया वैरिएंट और म्यूटेशन आता है.WHO उसके बारे में जानकारी देता है.

क्या है Corona NeoCov variant वायरस की सच्चाई?

ऐसा नहीं है कि नियोकोव वायरस दुनिया में मौजूद नहीं है। कुछ समय पहले ही दक्षिण अफ्रीका में चमगादड़ों में इस वायरस को पाया गया था। बताया जाता है कि यह नियोकोव की बनावट काफी हद तक उस कोरोनावायरस जैसी है, जिसने 2012 में दक्षिण एशिया में फैलने वाले संक्रमण ‘मिडिल-ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम’ (MERS) को जन्म दिया था। 

क्या NeoCoV के बारे में चिंता करनी चाहिए?

नहीं, आपको फिलहाल इस नियोकोव (NeoCoV) वायरस को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है। इस एमईआरएस (MERS) से जुड़े वायरस के जूनोटिक प्रभाव से गुजरने और जानवरों से मनुष्यों में संचारित होने की रिपोर्ट के बारे में कोई साक्ष्य नहीं है। इसका आखिरी प्रकोप साल 2015 में दर्ज किया गया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 2019 में कहा था कि विश्व स्तर पर एमईआरएस (MERS) के मामलों में कमी आई है।

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डब्ल्यूएचओ ने कहा है, “2016 के बाद से एमईआरएस-सीओवी के 1465 मामले सामने आए हैं और तेजी से वैश्विक प्रयासों के कारण 300 से 500 मौतों को टाला जा सकता है।” वायरस का अंतिम प्रकोप 2015 में कोरिया गणराज्य में 186 मामलों और 38 मौतों के साथ दर्ज किया गया था और इसका अनुमानित आर्थिक प्रभाव US$12 बिलियन था। विश्व स्वास्थ्य संगठनने कहा है कि इसकी क्षमता के और स्पष्टता के लिए फिलहाल रिसर्च की जरूरत है।

Read in English: NeoCov Variant: Wuhan Scientists Warn Of New Covid Virus NeoCov

वैज्ञानिक कर रहे हैं NeoCoV वायरस पर शोध

अब तक इस वायरस से इंसानों के संक्रमित होने का कोई मामला सामने नहीं आया है. वैज्ञानिक इसे लेकर और शोध करने में लगे हुए हैं. इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस नए वायरस म्यूटेशन की रिपोर्ट को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. लेकिन इस रिपोर्ट के आते ही दुनिया भर में तनाव का माहौल बन गया है. ओमिक्रॉन को लेकर भी विश्व स्वास्थ्य संगठन ने नवंबर में चेतावनी जारी की थी और महज 2 महीने के अंदर इसने पूरी दुनिया को अपने घेरे में ले लिया था.

NeoCov MERS बुखार के  समान

रूसी एजेंसी TASS के अनुसार, चीन में वैज्ञानिकों ने पाया कि दक्षिण अफ्रीका में चमगादड़ों में पाए जाने वाले कोरोनावायरस का NeoCov संस्करण MERS बुखार के एक रिश्तेदार की तरह है जिसके लक्षण और प्रभाव SARS CoV-2 के समान हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीनी शोधकर्ताओं ने पाया है कि नियोकोव वायरस में मृत्यु दर बहुत अधिक है – ‘हर तीन संक्रमित व्यक्तियों में से एक की मौत होगी’।

सिर्फ़ एक म्यूटेशन बनाएगा ख़तरनाक

अध्ययन के मुताबिक नियोकोव कोविड-19 वायरस की तरह ही मानवीय कोशिकाओं से जुड़ सकता है. ”नियोकोव में सिर्फ़ एक और म्यूटेशन के बाद वो इंसानों के लिए ख़तरनाक बन सकता है.” हालांकि, इस अध्ययन की अभी समीक्षा की जानी है.

  • शोधकर्ताओं के मुताबिक़, ये वायरस मिडिल ईस्ट रेसपाइरेट्री सिंड्रोम (एमईआरएस-मर्स) से मेल खाता है. ये वायरल बीमारी सबसे पहले सऊदी अरब में पाई गई थी.
  • मर्स-कोव वायरस की मृत्यु दर बहुत अधिक है. इसमें हर तीन संक्रमित व्यक्ति में से एक की मौत हो जाती है. मौजूदा सार्स-कोव-2 वायरस संक्रामक अधिक है.
  • मर्स-कोव वायरस लक्षणों के मामले में सार्स-कोव-2 के जैसा ही है. इसमें भी बुखार, खांसी और सांस लेने में परेशानी होती है. ये बीमारी साल 2012 में सबसे पहले सऊदी अरब में पाई गई थी. 2012 से 2015 के बीच मध्य-पूर्वी देशों में इसका प्रकोप रहा था.
  • मर्स-कोव के अधिकतर मामलों में ये इंसान से इंसान में फैला था. इसके चलते कई लोगों की जान भी चली गई थी.

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