Mahsa Amini Death [Hindi] | हिजाब विवाद में झुलसा ईरान, महसा अमिनी की मौत पर विरोध प्रदर्शन में 92 लोगों की मौत

Mahsa Amini Death [Hindi] हिजाब विवाद में झुलसा ईरान 92 की मौत

Mahsa Amini Death [Hindi] | नमस्कार दोस्तों जैसा कि आप सभी को पता हैं ईरान की तथाकथित नैतिकता पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद एक युवती की मौत हुई। मौत के बाद हुए विरोध प्रदर्शन ने ईरान को हिला कर रख दिया है। ईरान में कई हलकों में हिजाब पहनने का विरोध किया जा रहा है। इन नियमों में कोई भी ढील देना ईरान के प्रशासन के वश की बात नहीं क्योंकि वहाँ औरतों का पहनावा धर्म के मूल्यों से जुड़ा है। आईए जानते है ये खबर विस्तार से।

महासा अमिनी की मौत से ईरान की नैतिकता पुलिस के प्रति गुस्सा फूटा, भड़क गए विरोध प्रदर्शन। बताते है 22 वर्षीय महासा अमीनी पश्चिम उत्तर प्रांत कुर्दिस्तान से अपने परिवार के साथ तेहरान आई थी। 13 सितंबर को पुलिस ने “अशिष्ट कपड़ों” के लिए महासा को हिरासत में ले लिया। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि ईरान की नैतिकता पुलिस ने हिरासत के दौरान महिला के साथ इतने शारीरिक अत्याचार किए कि उसकी मौत हो गई। दूसरी ओर अधिकारियों ने दावा किया है कि महिला को “मार्गदर्शन केंद्र” में दिल का दौरा पड़ा। “मार्गदर्शन केंद्र” ईरान में एक प्रकार का शिक्षा केंद्र होता हैं जिसमें महिलाओं को कपड़े पहनने संबंधी ईरान के नियमों का कैसे पालन करें, यह सिखाया जाता है।

16 सितंबर को महासा अमीनी की मृत्यु के बाद देश भर में लोग सड़कों पर उतर आए। नाराज भीड़ ने मौत के जिम्मेदार दोषी अधिकारियों को सजा देकर अमिनी को न्याय देने की मांग की। कुछ आंदोलनकारी महिलाओं ने अपने बाल काट लिए और हिजाब जला दिए। सुरक्षा बलों से टकराव के बाद अब तक कई प्रदर्शनकारी मारे जा चुके हैं। ये विरोध प्रदर्शन लंबे समय से उनके अंदर दहकती आग की ओर इशारा कर रही है।

Mahsa Amini Death [Hindi] | ईरान में कैसा पहनावा ‘स्वीकार्य’ है?

आपको याद होगा साल 1979 में ईरान में इस्लामी क्रांति हुई थी। इसके तुरंत बाद, महिलाओं को कैसे कपड़े पहनने चाहिए, इस पर ईरान ने विशेष नियम लागू किए। हिजाब से सिर ढकना अनिवार्य कर दिया गया। उन्हें ढीले-ढाले कपड़े पहनने को कहा गया जिसमें उनकी छाती उजागर न हो। सरकार में कार्यरत या राष्ट्रीय पहचान पत्र के लिए फोटो खिंचवाने के लिए आई महिलाओं के लिए विशेष हेडड्रेस पहनना जरूरी है जिससे बाल पूरी तरह ढकें, हालांकि गर्दन आंशिक रूप से दिख सकती है। सरकारी टेलीविजन पर महिलाएं सिर पर स्कार्फ की दो परत पहनती हैं। मस्जिदों में चादर ओढ़ती है। कुछ महिलायें अन्य इस्लामी पोशाकों को पहनती हैं। पुरुषों को लंबे बाल, हेयर स्टाइल, शर्ट्स, जींस और टी-शर्ट जैसे पश्चिमी परिवेश से बचना होता है।

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पिछले 10 वर्षों में ईरानी समाज की सोच में रहन सहन और कपड़ों को लेकर भारी बदलाव आया है। विशेषकर युवाओं का आधुनिक कपड़ों के प्रति झुकाव बढ़ रहा है। ईरान की ‘नैतिकता पुलिस’ अभियान चलाकर महिलाओं को निशाना बनाती रही है।

Mahsa Amini Death [Hindi] | नैतिकता पुलिस क्या है?

नैतिकता पुलिस को गश्त-ए-इरशाद के रूप में जाना जाता है, जिसका अर्थ है इस्लामी मार्गदर्शन गश्त। नैतिकता पुलिस हरी धारियों के साथ सफेद वैन का उपयोग करती है। अक्सर उन स्थानों पर तैनात होती है जहां युवा लोग इकट्ठा होते हैं। नैतिकता पुलिस में पुरुष और महिलाएं दोनों हैं। अधिकांशतः अधिकारी मौखिक चेतावनी देकर छोड़ देते हैं। कभी-कभी कुछ महिलाओं को हिरासत में लेकर मार्गदर्शन केंद्र में लाया जाता है। यहाँ उन्हें घंटों तक उचित ड्रेस कोड पर “फिर से शिक्षित” किया जाता है। अपराध की पुनरावृत्ति नहीं करने का लिखित वायदा करने के बाद उन्हें उनके परिवार के सदस्यों को सौंपा जाता है।

इस बार का विरोध प्रदर्शन अधिक टकराव पूर्ण है

Mahsa Amini Death [Hindi] | अनिवार्य नियमों का विरोध करने वाली कई महिला कार्यकर्ताओं को भी गिरफ्तार किया गया है और जेल की सजा दी गई है। बताया जा रहा है कम से कम 41 लोग मारे गए हैं। सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। देश के 31 प्रांतों में से अधिकांश में विरोध प्रदर्शन होने की सूचना है। 2019 में ईंधन की कीमतों पर प्रदर्शनों के बाद से यह ईरान का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन माना जा रहा है। उस समय देश के इतिहास में सबसे बड़े खूनी टकराव में 1,500 लोग मारे गए थे।

ईरान के राष्ट्रपति ने ‘निर्णायक कार्रवाई’ करने की चेतावनी दी

ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने ईरानी नैतिकता पुलिस द्वारा हिरासत में ली गई एक महिला की मौत के बाद से देश में हो रहे विरोध प्रदर्शनों से “निर्णायक” रूप से निपटने का संकल्प लिया है। सरकारी मीडिया ने राष्ट्रपति के हवाले से कहा है कि ईरान को देश की सुरक्षा और शांति का विरोध करने वालों से निर्णायक रूप से निपटना चाहिए। विरोध प्रदर्शनों को कमजोर करने के प्रयास में तेहरान और कुर्दिस्तान में इंटरनेट सुविधा रोकी गईं। इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप को भी अवरुद्ध किया गया। प्रशासन ने धार्मिक ड्रेस कोड को बढ़ावा देने के लिए देश भर के प्रांतों में जवाबी विरोध प्रदर्शनों का आयोजन किया जिससे प्रदर्शनकारियों के “ड्रेस कोड मानदंड तोड़ने वाले व्यवहार” का मुकाबला किया जा सके।

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को सुरक्षा बलों की ओर से घातक प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ रहा है और उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र जांच की मांग की। इराक, जर्मनी, ग्रीस, स्वीडन, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका के शहरों में ईरानी प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए लोग सड़कों पर उतर आए। इराक में दर्जनों इराकी और ईरानी कुर्दों ने उत्तरी शहर इरबिल में संयुक्त राष्ट्र परिसर के बाहर अमिनी की तस्वीर वाली तख्तियों के साथ रैली निकाली जिसमें खामनेई के खिलाफ ‘तानाशाह को मौत’ के नारे लगाए।

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इस प्रकार के खूनी झगड़े वास्तव में काल ब्रह्म की योजना से होते हैं। काल ब्रह्म को शैतान भी कहते है। भोले लोग जिसे परमात्मा समझ बैठे है वह भी अलग रूप में शैतान ही है। पवित्र वेदों, पवित्र कुरान और पवित्र बाइबल के अनुसार पूर्ण परमात्मा कविर देव या कबीर साहेब हैं जिन्हें भोले लोग नहीं जानते। तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने इस कुंठित ज्ञान का पर्दाफाश कर वास्तविक परमात्मा का पूरा भेद खोलकर बताया है। पूर्ण संत रामपाल जी ने परमेश्वर की पहचान और उनको पाने की सही साधना विधि भी बताई है।

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