Social Research: क्या प्राकृतिक आपदायें (Prakritik Aapda) इंसान की देन?

प्राकृतिक आपदायें (Prakritik Aapda) in Hindi: नमस्कार दर्शकों! “खबरों की खबर का सच” कार्यक्रम में आप सभी का स्वागत है। आज के कार्यक्रम में हम देश दुनिया में होने वाली दुर्घटनाओं और आकस्मिक मौतों के कारणों के बारे में चर्चा करेंगे और जानेंगे की कैसे बचें जीवन में घटने वाली दुर्घटनाओं और आकस्मिक मौत के कहर से?

हम नहीं जानते कि आने वाले पलों में हम जीवित रहेंगे भी या नहीं और हमारी मौत का कारण क्या बनेगा? आने वाला कल हमारे लिए एक रहस्य समान है। हमारे साथ कब , कहां , कैसे और किस समय कोई दुर्घटना घट जाए हम नहीं जानते। जब किसी व्यक्ति की एक कार एक्सीडेंट में मृत्यु हो जाती है तो क्या उसे यह पहले से मालूम होता है की कल सुबह जब वो अपनी कार से ऑफिस जायेगा तब रास्ते में एक्सीडेंट के चलते उसकी मृत्यु हो जायेगी? क्या विदेश से स्वदेश लौटने वाले व्यक्ति को यह पता होता है कि प्लैन क्रेश में मृत्यु हो जाने से वो अपने परिवार वालों से दोबारा कभी नहीं मिल पाएगा? दोस्तों “जि़ंदगी” एक पहेली है, जिसमें आने वाले समय में क्या होगा कोई नहीं जानता।

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दुर्घटनाओं का स्वरूप लगभग 80-90 साल पहले आज से थोड़ा भिन्न था। जब तक मानव संसाधनों का इतना विकास नहीं हुआ था, तब होने वाली मौतों का कारण प्राकृतिक आपदाएं अधिक हुआ करती थीं। इसके अलावा महामारी और बीमारी, धंधे में नुकसान हो जाना, कर्जा हो जाना, चोरी लूट पाट ,अकाल पड़ना,भूस्खलन, भूकंप, नदी में उफान, पहाडो़ं का गिरना,सर्प का डसना , जानवरों द्वारा हमला, डाकुओं द्वारा मार देना ,आपसी रंजिश तथा युद्ध के चलते भी बहुत सी मौतें हुआ करती थीं।

यदि हम बात करें वर्तमान समय की तो अब प्राकृतिक आपदाओं से कहीं ज्यादा मानव निर्मित आपदाएं घटित होने लगी हैं क्योंकि प्रकृति को नुकसान पहुंचाने का मूल कारण मनुष्य स्वयं है। पूरी पृथ्वी पर अपना मालिकाना अधिकार समझने वाले मानव ने अपनी प्रगति के लिए पृथ्वी पर से अंधाधुंध पेड़ों काे काटने का काम अभी भी चालू रखा हुआ है। कारखानों का धुंआ सीधा वायुमंडल में छोड़ा जाता है क्योंकि मनुष्य अभी तक कोई ठोस और दूसरा विकल्प नहीं ढ़ूंढ पाए हैं। बड़े बडे़ कारखानों का अपशिष्ट नदियों में फैंका जाता है जिससे यमुना और गंगा जैसी स्वच्छ नदियां भी नालों में बदल चुकी हैं। पेड़,नदियां, पहाड़,ज़मीन,जंगलों में इसान की बढ़ती दखलअंदाज़ी ने कहीं कहीं पृथ्वी को बदसूरत बना दिया है। वातावरण और प्रकृति से खिलवाड़ का सीधा असर मानव के स्वास्थ्य पर पड़ा है जिससे न केवल बिमारियों की संख्या में वृद्धि हुई है बल्कि प्रति व्यक्ति आयु भी कम हो गई है।

प्राकृतिक आपदायें (Prakritik Aapda): दुर्घटनाओं का असर अमीर और गरीब दोनों को प्रभावित करता है

Prakritik Aapda in Hindi: अपने आस पास प्रतिदिन आप किसी ना किसी के साथ कोई दुर्घटना घटते हुए देखते ,पढ़ते या फिर उसके बारे में न्यूज़ या रेडियो पर सुनते होंगे। अखबार में भी अक्सर ऐसी ढेरों खबरें छपती ही रहती हैं जैसे कोई दो वर्ष का बच्चा खेलते खेलते गर्म तेल के कढ़ाहे में गिर गया, तो कभी बोरिंग वैल में। कोरोना महामारी के इस विकट काल में तो मानो आकस्मिक मौतों का तांता लगा हुआ है। बीमारी के इस दौर में दिन प्रतिदिन लाखों लोगों की जानें जा रही हैं। इसके अलावा प्राकृतिक आपदाएं जैसे चक्रवात, भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखी का फट जाना, बाढ़ आना, सुखा पड़ जाना आदि से भी सैकड़ों लोगों की जानें जा रही हैं। मनुष्यों द्वारा संचालित इस आधुनिक युग में सड़क हादसे, प्लेन क्रैश, ट्रेन एक्सीडेंट, अस्पतालों-फैक्ट्रियों में आग लग जाना, कहीं तारों में शॉर्ट सर्किट हो जाना, आदि दुर्घटनाएं बढ़ती ही जा रही हैं।

प्राकृतिक आपदायें (Prakritik Aapda): सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या भारत में सबसे अधिक है

पूरे विश्व में सबसे ज़्यादा दुर्घटनाएं सड़क हादसों के चलते होती हैं। विश्व बैंक के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक भारत देश में हर 4 मिनट में सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मृत्यु होती है। रिपोर्ट के मुताबिक पूरे विश्व में से सड़क दुर्घटनाओं में हताहत होने वाले लोगों की संख्या भारत में सबसे अधिक है। पूरे विश्व के सड़क हादसों में भारत का हिस्सा 11% का है। देश में हर घंटे लगभग 53 सड़क हादसे होते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में भारतीय सड़कों पर 13 लाख लोगों की मौतें हुई हैं और इनके अलावा 50 लाख लोग घायल हुए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में सड़क दुर्घटनाओं के चलते 5.96 लाख करोड़ रुपये यानी GDP के 3.14% के बराबर नुकसान होता है। भारत में महायुद्धों से भी अधिक मौतें सड़क हादसों से अब तक हो चुकी हैं।

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Prakritik Aapda in Hindi: साल 2018 में 4,67,044 ( चार लाख,सत्तासठ हज़ार चवालीस) सड़क दुर्घटनाएं हुईं जिसमें 1,51,471 ( एक लाख,इकयावन हज़ार चार सौ इकहत्तर) लोग मारे गए। विश्व स्वास्थ्य संगठन की सड़क दुर्घटना से संबंधित ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट में हुए सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में सड़क दुर्घटना में मरने वालों की दर प्रति 100,000 (एक लाख) पर 6 की है।

प्राकृतिक आपदायें: भारत में प्राकृतिक आपदाओं का कहर

पिछले 2 दशकों में भारत कई बड़ी प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर चुका है और इन प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान और मौतों का आंकड़ा बहुत चिंताजनक है। गुजरात के कच्छ में 2001 में आए भयंकर भूकंप के चलते 30 हजार से भी अधिक लोगों की मृत्यु हुई थी, वहीं करीब 2 लाख लोग बुरी तरह से घायल हुए थे और साथ ही 4 लाख से भी अधिक लोग बेघर हो गए थे।

Prakritik Aapda in Hindi: सन 2004 में हिंद महासागर में आई सुनामी के चलते 2 लाख 30 हजार से भी अधिक लोगों की मौेत हो गई थी, बिहार में 2007 में बाढ़ आने से 1300 लोगों और सैेकड़ों जानवरो की जानें गई थीं, इसके अलावा सन 2013 में उत्तराखंड में बादल फटने से करीबन 6 हज़ार लोगों की जानें गईं थीं। 72 साल पहले बंगाल (मौजूदा बांग्लादेश, भारत का पश्चिम बंगाल, बिहार और उड़ीसा) ने अकाल का वो भयानक दौर देखा था, जिसमें करीब 30 लाख लोगों की भूख से तड़पकर मौतें हुई थी। ये द्वितीय विश्वयुद्ध का दौर था।

आंकड़ों के मुताबिक पिछले 2 दशकों में भारत में तकरीबन 300 प्राकृतिक आपदाओं के चलते 100 करोड़ लोग प्रभावित हुए हैं। वहीं चीन में 577 (पांच सौ सत्तत्तर) तो अमरीका में 467 (चार सौ सत्तासठ) प्राकृतिक आपदाएं देखी गईं।

Prakritik Aapda in Hindi: भारत में महामारी का दौर नया नहीं है

यदि हम महामारी की बात करें तो कोरोना महामारी से पहले भी कई महामारियों ने देश दुनिया में कहर मचाया है।

Prakritik Aapda in Hindi: इससे पहले हैज़ा, प्लेग, चिकनपॉक्स, इंफ्लूएंजा जैसे खतरनाक वायरस मानव जीवन पर संकट खड़ा कर चुके हैं। 1976 में अफ्रीकी देश के कॉन्गों से शुरू हुई एचआईवी एड्स बीमारी ने अब तक 3.6 करोड़ से भी अधिक लोगों की जान ले ली है। मौजूदा समय में भी लगभग 3.5 करोड़ लोग एचआईवी पॉजिटिव हैं। इसके अलावा 1956 में एशियन फ्लू नामक बिमारी ने 20 लाख लोगों की जान ली थी। साल 1918 में इंफ्लूंजा नामक एक घातक बीमारी ने पूरी दुनिया को अपनी जकड़ में लिया था। इस बीमारी से 2.5 करोड़ लोगों की जान चली गई थी जबकि 50 करोड़ लोग इससे बुरी तरह से प्रभावित हो गए। वहीं कॉलेरा जैसी बीमारी ने अपने शुरुआती दिनों में 8 लाख भारतीयों की जान ले ली थी। इसके अलावा प्लेग, स्पेनिश फ्लू, चाइना का ब्यूबानिक प्लेग या ब्लैक डेथ आदि महामारियों के चलते करोड़ों लोगों की जान जा चुकी है l

दोस्तों, क्या आपने कभी इस विषय पर विचार किया है की आखिर क्यों एक न एक दिन सभी की मृत्यु होगी? ज़रा कल्पना कीजिए कि आप किसी दिन किसी काम से बाहर गए हों और सड़क पर चल रहे हों, और आपको पीछे या आगे से कोई वाहन अचानक से टक्कर मगर देता है और आप गिरते ही मृत्यु को प्राप्त हो जाते हो। यह कैसा जीवन है? हमने ऐसा भी देखा और सुना है जब एक दूल्हा हंसी खुशी अपनी शादी की बारात लेकर जा रहा होता है और रास्ते में दुर्घटनावश उसकी मृत्यु हो जाती है। ऐसा देखकर मुंह से यही शब्द निकलते हैं कि आखिर यह कैसा जीवन है? जहां एक सैंकंड की भी कोई गारंटी नहीं।

प्राकृतिक आपदायें: आध्यात्मिक दृष्टिकोण से इस बात को समझने की कोशिश करते हैं

दोस्तों, इस संसार में सब कुछ कर्मों पर आधारित होता है। जैसा करोगे उसके प्रतिफल में वैसा ही पाओगे। मनुष्य जीवन की आयु सांसों के मुताबिक तय होती है। जिसके जितने अधिक स्वांस उसकी उतनी ही अधिक आयु। जब प्राणी के स्ंवास समाप्त हो जाते हैं तब यम के दूत उसे ले जाने आते हैं। मृत्यु का कारण कोई भी बन जाता है। पाप कर्मों के कारण ही प्राणी की अकाल मृत्यु होती है। एक्सीडेंट, महामारी की चपेट,लाइलाज बीमारी, आत्महत्या, हमला,युद्ध में मृत्यु, प्राकृतिक आपदा आदि के कारण होने वाली मृत्यु को अकाल मृत्यु कहा जाता है। यह संसार जिसमें हम रह रहे हैं उसका राजा काल है।

Prakritik Aapda in Hindi: वह अपने बनाए विधान के चलते हम सबको धोखा देकर मूर्ख बनाता है। हम सब अपने परिवार को अपना मानते हैं, धन संपत्ति को अपना मानते हैं अचानक से एक पल में ही हमारी मृत्यु हो जाती है, और यह काल हमसे सब कुछ छीनकर हमें पापों से लाद कर यम के दूतों के हवाले कर देता है। मृत्यु के बाद प्राणी खुद भी रोता हुआ जाता है और परिवार भी उसके पीछे रो रो कर अपना बुरा हाल कर लेते हैं। फिर दोबारा इस संसार में , उसी परिवार में मिलना भी नहीं हो पाता है। यह धोखा व मजबूरी हमारे साथ काल ने की है। इस मजबूरी से हमें केवल पूर्ण परमात्मा ही बचा सकते हैं। यह दुर्घटनाएं हमारे जन्म जन्मांतर के पाप कर्मों की वजह से हमारे साथ घटित होती हैं। पवित्र वेद गवाही देते हैं की पाप कर्म को केवल पूर्ण परमात्मा ही काट सकते हैं। पूर्ण परमात्मा साधक की आयु भी बढ़ा सकते हैं।

इसी विषय में परमेश्वर कबीर साहेब जी कहते हैं;

तुम कौन राम का जपते जापम, तांते कटे ना ये तीनों तापम।

प्राणी के तीनों ताप: दैहिक, दैविक, और आध्यात्मिक, जिसके चलते प्राणी के साथ दुर्घटनाएं होती हैं उसे ब्रह्मा, विष्णु , महेश या अन्य देवी देवता नहीं काट सकते। उसे तो केवल पूर्ण ब्रह्म अविनाशी परमात्मा कबीर साहेब जी ही काट सकते हैं।

इसी विषय में संत गरीबदास जी महाराज जी बताते हैं;

मासा घटे ना तिल बढ़े, विधना लिखे जो लेख।
साचा सतगुरु मेटकर ऊपर मारे मेख।।

पूर्ण संत प्रारब्ध में जमा पाप कर्मों को भी काट सकता है। प्राणी के कर्मों को मिटा कर उनको समाप्त कर सकता है। वर्तमान समय में केवल जगत गुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ही वह पूर्ण संत हैं जो किसी भी प्रकार की दुर्घटनाओं से प्राणी को निजात दिला सकते हैं। संत रामपाल जी महाराज प्राकृतिक आपदाओं को भी समाप्त कर सकते हैं। ऐसे में इस वीडियो को देखने वाले सभी दर्शकों से निवेदन है कि बगैर समय गवाएं संत रामपाल जी महाराज जी की शरण में आकर अपना कल्याण करवाएं।

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