भारत में गैस (LPG और नेचुरल गैस) की स्थिति 7 अप्रैल 2026 तक एक संतुलित लेकिन चुनौतीपूर्ण परिदृश्य पेश कर रही है। एक ओर घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं को कीमतों में स्थिरता के कारण राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर कमर्शियल LPG सिलेंडरों की लगातार बढ़ती कीमतों ने होटल, रेस्तरां और छोटे व्यापारियों की लागत बढ़ा दी है। वैश्विक स्तर पर वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का सीधा असर भारतीय गैस बाजार पर दिखाई दे रहा है।

घरेलू LPG: कीमतों में स्थिरता से मिली राहत

घरेलू LPG (14.2 किलोग्राम सिलेंडर) की कीमतों में अप्रैल 2026 में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इससे पहले मार्च 2026 में ₹60 की बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद अब कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।

देश के प्रमुख महानगरों में वर्तमान दरें इस प्रकार हैं:

दिल्ली: ₹913

मुंबई: ₹912.50

कोलकाता: ₹939

चेन्नई: ₹928.50

बेंगलुरु: ₹915.50

इस स्थिरता ने आम उपभोक्ताओं को राहत दी है, खासकर उन परिवारों को जो घरेलू बजट में बढ़ती महंगाई से जूझ रहे हैं। सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए लगभग ₹30,000 करोड़ का मुआवजा सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों—IOCL, BPCL और HPCL—को दिया है, ताकि सस्ती दरों पर LPG की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

सब्सिडी व्यवस्था अभी भी लागू है, जिससे पात्र उपभोक्ताओं को अतिरिक्त राहत मिल रही है। यह कदम सरकार की उस नीति को दर्शाता है, जिसमें आम जनता को महंगाई से बचाने के प्रयास प्राथमिकता में हैं।

कमर्शियल सिलेंडर महंगे: लगातार बढ़ती कीमतों से बढ़ी चिंता

कमर्शियल LPG (19 किलोग्राम सिलेंडर) की कीमतों में 1 अप्रैल 2026 से बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विभिन्न शहरों में यह वृद्धि ₹195.50 से ₹218 तक रही है, जो पिछले चार से पांच महीनों में लगातार बढ़ोतरी का हिस्सा है।

नए दाम इस प्रकार हैं:

दिल्ली: ₹2,078.50 (₹195.50 की वृद्धि)

मुंबई: ₹2,031 (₹196 की वृद्धि)

कोलकाता: ₹2,208 (₹218 की वृद्धि)

चेन्नई: ₹2,246.50 (₹203 की वृद्धि)

बेंगलुरु: ₹2,161

इस बढ़ोतरी ने विशेष रूप से होटल, रेस्तरां, कैटरिंग व्यवसाय और छोटे व्यापारियों की लागत को प्रभावित किया है। कई छोटे व्यवसायों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है, क्योंकि उन्हें या तो कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं या मुनाफे में कटौती करनी पड़ रही है।

अंतरराष्ट्रीय कारण: वेस्ट एशिया में तनाव का असर

कमर्शियल गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का प्रमुख कारण वेस्ट एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। ईरान से जुड़े हालात और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अस्थिरता ने वैश्विक तेल और LPG बाजार को प्रभावित किया है।

भारत अपनी LPG जरूरतों का बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से आयात करता है, इसलिए वहां की स्थिति का सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ता है। इसी के चलते LPG और अन्य ईंधनों की लागत में वृद्धि हुई है।

इसके अलावा, एविएशन सेक्टर में जेट फ्यूल (ATF) की कीमतें भी रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई हैं, जिससे परिवहन और हवाई यात्रा महंगी होने की आशंका बढ़ गई है।

सप्लाई की स्थिति: पैनिक बुकिंग के बाद नियंत्रण

मार्च 2026 के दौरान देश के कई हिस्सों—विशेष रूप से दिल्ली, मुंबई और हरियाणा—में LPG की पैनिक बुकिंग देखी गई थी। इससे अस्थायी रूप से सिलेंडरों की उपलब्धता प्रभावित हुई थी।

हालांकि, सरकार ने तेजी से कदम उठाते हुए उत्पादन बढ़ाया, आयात को तेज किया और ब्लैक मार्केटिंग पर सख्ती बरती।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब रोजाना लाखों सिलेंडरों की आपूर्ति की जा रही है और घरेलू LPG की स्थिति सामान्य है। हरियाणा और दिल्ली सरकारों ने भी आश्वासन दिया है कि किसी प्रकार की बड़ी कमी नहीं है।

हालांकि, कुछ क्षेत्रों में कमर्शियल सिलेंडरों की कमी की समस्या अभी भी बनी हुई है, जिसे दूर करने के प्रयास जारी हैं।

Also Read: Petrol Diesel Price: पैट्रोल और डीज़ल के बढ़ते दाम: कैसे बचें मंहगाई से?

PNG की ओर झुकाव: नीति में बदलाव

कमर्शियल LPG पर बढ़ती निर्भरता को कम करने के लिए दिल्ली सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब होटलों और रेस्तरां को PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शन के लिए आवेदन करना अनिवार्य किया गया है।

इस निर्णय का उद्देश्य LPG पर दबाव कम करना और अधिक स्थिर एवं किफायती गैस आपूर्ति सुनिश्चित करना है। आने वाले समय में यह बदलाव गैस खपत के पैटर्न को भी प्रभावित कर सकता है।

नेचुरल गैस और LNG: आयात दबाव और भविष्य की रणनीति

अप्रैल 2026 के लिए घरेलू नेचुरल गैस की कीमत $10.76 प्रति MMBTU निर्धारित की गई है, हालांकि कुछ गैस फील्ड्स पर मूल्य सीमा लागू है।

LNG आयात पर भी दबाव बना हुआ है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और कतर जैसे क्षेत्रों में व्यवधान देखने को मिला है। इसके बावजूद, सरकार वैकल्पिक स्रोतों से गैस आयात कर रही है ताकि सप्लाई बनी रहे।

सरकार का लक्ष्य 2030 तक भारत की ऊर्जा खपत में गैस की हिस्सेदारी को 15% तक बढ़ाना है। इसके लिए गैस इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है और गैस आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है।

इस बीच, पेट्रोल और डीजल की सप्लाई पर्याप्त बनी हुई है और उनकी कीमतों में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया है।

निष्कर्ष: संतुलन बनाए रखने की चुनौती

समग्र रूप से देखा जाए तो भारत में गैस की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन चुनौतियां बरकरार हैं। घरेलू उपभोक्ताओं को राहत जरूर मिली है, लेकिन कमर्शियल उपयोगकर्ताओं पर बढ़ती कीमतों का दबाव साफ दिखाई दे रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में वैश्विक परिस्थितियों के आधार पर कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे में उपभोक्ताओं को सलाह दी जा रही है कि वे पैनिक न करें और केवल आधिकारिक प्लेटफॉर्म जैसे myLPG.in के माध्यम से ही बुकिंग करें। सरकार की ओर से यह भरोसा दिलाया जा रहा है कि गैस की सप्लाई को सुचारू बनाए रखने, वैकल्पिक मार्गों को विकसित करने और आम जनता को राहत देने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।